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Coronavirus: अफसरों की लापरवाही से आगरा में बेकाबू हुआ संक्रमण, जांच टीम ने शासन को सौंपी रिपोर्ट

Fri, 24 Apr 2020 12:57 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 24 Apr 2020 12:57 AM IST
सार

केजीएमयू से आई जांच टीम ने खड़े किए प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल
कोरोना से निपटने के लिए न तो किए गए इंतजाम और न हुआ प्रशिक्षण

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coronavirus outbreak in Agra due to negligence of officials
स्वास्थ्य विभाग की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना वायरस नियंत्रण के लिए जिस आगरा मॉडल की उत्तर प्रदेश में तूती बोल रही थी, वहां अधिकारियों की लापरवाही से कोरोना संक्रमण बेकाबू हो गया। शासन के निर्देश पर आगरा जांच के लिए आई दो सदस्यीय टीम की रिपोर्ट में प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। 
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जांच टीम ने रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इसमें आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) के प्रधानाचार्य के आकस्मिक छुट्टी लेने, कर्मचारियों के प्रशिक्षित न होने, मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थित लैब न होने सहित कई कारण बताए गए हैं।
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महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता के निर्देश पर किंग जार्ज मेडिकल यूनीवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ के कुलसचिव आशुतोष दुबे ने मेडिसिन विभाग के डॉ. विवेक कुमार व रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के हेड डॉ. सूर्यकांत से आगरा में संक्रमण बेकाबू होने की जांच कराई थी। 
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एसएन मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से की थी पूछताछ

टीम ने 17 अप्रैल को आगरा पहुंचकर एसएन मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से पूछताछ की। वहां का निरीक्षण किया और पूरी रिपोर्ट बनाकर शासन को सौंप दी। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि जिस समय आगरा में कोरोना वायरस का प्रकोप फैल रहा था, उस समय एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के पद पर तैनाती को लेकर स्थितियां गड़बड़ थीं। 

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा सात अप्रैल को अचानक छुट्टी लेकर इलाज के लिए दिल्ली चले गए। डॉक्टर ने उन्हें दो हफ्ते की छुट्टी की सलाह दी थी। इसके बाद वह अचानक नौ अप्रैल को मेडिकल कॉलेज आए और ज्वाइन कर लिया।

जांच रिपोर्ट के अनुसार कोरोना के इलाज के लिए वहां के डॉक्टर व कर्मचारी ठीक से प्रशिक्षित नहीं थे। इसकी वजह से तीन रेजिडेंट व चार पैरामेडिकल स्टाफ संक्र्तमित हो गए। टीम ने रिपोर्ट में लिखा है कि यदि डॉक्टर व कर्मचारी ठीक से प्रशिक्षित होते तो उनके संक्रमित होने की संभावना कम होती। 

तीन महीने से लटका था लैब का मामला

मेडिकल कॉलेज में कोरोना जांच के लिए लैब भी नहीं उच्चीकृत करने में रुचि दिखाई। जांच हुई तो पता चला कि तीन महीने से लैब का मामला अफसरों की लापरवाही से लटका है। लैब न होने के कारण संदिग्ध व मरीजों के नमूने जांच के लिए केजीएमयू लखनऊ भेजने पड़े। इससे जांच में देरी हुई। यहां तक कि मरीजों को समय पर आइसोलेशन में भर्ती करने, उनके प्राइमरी व सेकेंडरी कांटैक्ट की पहचान करके उन्हें भी क्वारंटीन करने में लापरवाही हुई। 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) व भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। इसके चलते एक्टिव क्वारंटीन व पैसिक क्वारंटीन के प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि शासन ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है और आगरा मेडिकल कॉलेज के कई जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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