फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   coronavirus lockdown updates: food crisis in front of migrant workers in agra

लॉकडाउन: पैदल चलते-चलते पांव में पड़ गए छाले, घर लौटे मजदूरों को अब रोटियों के लाले

Sat, 16 May 2020 04:51 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 16 May 2020 04:51 PM IST
सार

  • जिस रोटी के लिए सैकड़ों किमी पैदल चलकर आए, अब उसके लिए संघर्ष  
  • वहां दाने-दाने को मोहताज थे, यहां भी राशन का इंतजाम नहीं 

विज्ञापन
coronavirus lockdown updates: food crisis in front of migrant workers in agra
लॉकडाउन में पैदल घर लौटे मजदूर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लॉकडाउन में पैदल चलते-चलते पांव में छाले पड़ गए, फिर भी गृहस्थी के सामान का बोझ उठाकर घर लौटे मजदूरों की मुसीबतें यहां भी कम नहीं हो रहीं। समस्या सिर्फ यह नहीं है कि इन्हें कुछ दिन क्वारंटीन में रहना होगा या स्क्रीनिंग के बाद गांव में घुसने दिया जाएगा। संघर्ष उन रोटियों के लिए भी है जिनके लिए ये परदेस से आए हैं। 
विज्ञापन


आगरा में अपने घर लौटे ऐसे ही मजदूर बता रहे हैं कि वहां दाने-दाने को मोहताज थे और यहां भी राशन का इंतजाम नहीं है, क्योंकि काम-धंधों पर यहां भी ताला लगा है। जगदीशपुरा से तपती दोपहरी में छह किमी पैदल चलकर पेट भरने के लिए आगरा-दिल्ली हाईवे स्थित गुरुद्वारा गुरु का ताल पहुंचे मजदूरों ने अपना दर्द बयां किया। 
विज्ञापन


 

सबकी अपनी-अपनी कहानी


मध्य प्रदेश से लौटे संजय ने बताया कि वो ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन आदि जगहों पर मेलों में खेल तमाशे की दुकान लगाता था। लॉकडाउन होते ही मेला बंद हो गया, इसलिए घर चला आया। सोचा था, आगरा में और कुछ न सही, किराए पर लेकर ऑटो तो चला ही लेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

उसने बताया कि जैसे वहां काम-धंधे बंद हैं, ऐसे ही यहां भी संकट है। थोड़ी बहुत जमा पूंजी थी, वो खत्म हो गई। अब कोई राशन दे जाए तो घर में चूल्हा जलता है, वरना फाके हैं। गुरुद्वारे में खाना खाकर भूख मिटा रहा है।  

जगदीशपुरा में शांति टॉकीज के पास रहने वाला राजेश गाजियाबाद में बेलदारी करता था। लॉकडाउन होने के बाद 30 मार्च को घर लौट आया। कई साल से बाहर रह रहा था, इसलिए राशन कार्ड ब्लॉक हो गया। जिन अपनों के बीच वो आया, अब उनके चूल्हे भी ठंडे पड़े हैं। राजेश ने बताया कि बस इतनी राहत है कि परिवार के साथ हैं, वरना रोटी का इंतजाम वहां भी नहीं था, यहां भी नहीं है। 

यहां अकेलापन महसूस नहीं होता 

जगदीशपुरा के विनोद ने बताया कि वो दिल्ली में जूता फैक्टरी में काम करता था। वो बंद हो गई। सब चले गए तो वो भी चला आया। वहां डर लग रहा था, पता नहीं क्या होगा, बड़ी आपदा हैं। अब घर में है, खाली बैठा है। रोटी का इंतजाम नहीं। पर परिवार के साथ रहने से अकेलापन महसूस नहीं होता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed