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Coronavirus : मास्क लगाते और निकालते समय इन बातों का रखें हमेशा ध्यान
Mon, 30 Mar 2020 12:34 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 30 Mar 2020 12:34 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस असाध्य रोग है, लेकिन इससे सावधानी और सतर्कता बचा जा सकता है। आगरा के दयालबाग शिक्षण संस्थान के रसायन विज्ञान में कार्यरत सहायक प्रोफेसर एवं पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ रंजीत कुमार का कहना है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) पर वैज्ञानिक शोध का अभी अभाव है।
उन्होंने कहा कि अभी ऐसा कोई शोध नहीं है, इसके आधार पर यह कहा जा सके कि यह वायरस वायुजनित नहीं है। ऐसी परिस्थिति में सभी तरह का एहतियात बरतना बेहद जरूरी है। मास्क लगाते और निकालते वक्त भी कुछ बातों को विशेष ध्यान रखना चाहिए।
डॉ कुमार ने बताया कि जब हम छींकते हैं, खांसते हैं, तब रेस्पिरेटरी डरोप्लेटस (श्वसन की बूंदें) बाहर निकलता है। यह बहुत ही सूक्ष्म होती हैं लेकिन संख्या काफी होती है। ये छोटे-छोटे डरोप्लेट मिलकर बड़े डरोप्लेट में बदल सकते हैं तथा हवा में जो कण होते हैं उसपर जम जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि अभी ऐसा कोई शोध नहीं है, इसके आधार पर यह कहा जा सके कि यह वायरस वायुजनित नहीं है। ऐसी परिस्थिति में सभी तरह का एहतियात बरतना बेहद जरूरी है। मास्क लगाते और निकालते वक्त भी कुछ बातों को विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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डॉ कुमार ने बताया कि जब हम छींकते हैं, खांसते हैं, तब रेस्पिरेटरी डरोप्लेटस (श्वसन की बूंदें) बाहर निकलता है। यह बहुत ही सूक्ष्म होती हैं लेकिन संख्या काफी होती है। ये छोटे-छोटे डरोप्लेट मिलकर बड़े डरोप्लेट में बदल सकते हैं तथा हवा में जो कण होते हैं उसपर जम जाते हैं।
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हवा में हो सकते हैं विषाणु
पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ रंजीत कुमार
- फोटो : अमर उजाला
यह पहले के शोध से साबित है कि वायरस भी दो घंटे तक वातावरण में रह सकते हैं। इसलिए कोविड-19 के विषाणु भी वातावरण में हो सकते हैं। यह संक्रमण वाले स्थान के वातावरण में पाए जा सकते हैं तथा थोड़े दूर तक संचारित होकर एक जगह से दूसरे जगह पहुंच सकते हैं। हालांकि अभी कोविड-19 विषाणु पर कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
डॉ कुमार ने कहा कि जिस तरह परफ्यूम स्प्रे करते हैं तो उसके डरोप्लेटस एक जगह से दूसरे पहुंच जाते हैं उसी तरह खांसने-छींकने से रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेटस तथा उसके झुंड या बादल नजदीकी वातावरण में प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए अभी के परिस्थिति में सभी तरह का एहतियात बरतना जरूरी है।
डॉ रंजीत कुमार के अनुसार आईसीयू तथा वार्ड में कार्यरत चिकित्सक, कंपाउंडर, नर्स आदि को विशेष सावधानी इस समय बरतना चाहिए। आत्मसुरक्षा के सभी चीजों को पहनना चाहिए। इसमें एप्रन, ग्लव्स, मास्क, हेलमेट आदि शामिल है। साथ ही मास्क पहनने संबंधित निम्नलिखित सावधानी अपनाना जरूरी है।
डॉ कुमार ने कहा कि जिस तरह परफ्यूम स्प्रे करते हैं तो उसके डरोप्लेटस एक जगह से दूसरे पहुंच जाते हैं उसी तरह खांसने-छींकने से रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेटस तथा उसके झुंड या बादल नजदीकी वातावरण में प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए अभी के परिस्थिति में सभी तरह का एहतियात बरतना जरूरी है।
डॉ रंजीत कुमार के अनुसार आईसीयू तथा वार्ड में कार्यरत चिकित्सक, कंपाउंडर, नर्स आदि को विशेष सावधानी इस समय बरतना चाहिए। आत्मसुरक्षा के सभी चीजों को पहनना चाहिए। इसमें एप्रन, ग्लव्स, मास्क, हेलमेट आदि शामिल है। साथ ही मास्क पहनने संबंधित निम्नलिखित सावधानी अपनाना जरूरी है।
बरतें यह सावधानी
- मास्क पहनने और उतारने से पहले हाथ धोना चाहिए।
- मास्क नाक तथा मुंह पर पूरी तरह फिट हो तथा अच्छी तरह से ढक रहा हो।
- मास्क का इलास्टिक बैंड ठीक हो।
- धातु के तार नाक पर फिट होने चाहिए।
- मास्क पहनने के बाद उसे न छुएं। जरूरी होने पर छूने से पहले व बाद में हाथ को अच्छी तरह से धोएं।
- मास्क को ग्लैव्स पहने हाथ से न छुएं।
- मास्क का बाहरी हिस्से पर विषाणु हो सकता इसलिए मास्क उतरते समय उसका बाहरी हिस्सा न छुएं।
- मास्क का उपयोग करने के बाद उसे प्लास्टिक बैग में रख का कचरा डब्बा में डालें या जमीन के नीचे गाड़ दें।
- प्रतिदिन सर्जिकल मास्क को बदलें।
डीईआई के राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ सौरभ मनि ने कहा कि सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल करना जरूरी है। साथ ही इस्तेमाल करने का तरीका जानना भी बहुत जरूरी है। समाज के कर्णधार डॉक्टर, कंपाउडर, नर्स का सुरक्षित तथा स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। इसलिए आप सभी से नम्र निवेदन है कि सावधानी जरूर बरतें।
- मास्क नाक तथा मुंह पर पूरी तरह फिट हो तथा अच्छी तरह से ढक रहा हो।
- मास्क का इलास्टिक बैंड ठीक हो।
- धातु के तार नाक पर फिट होने चाहिए।
- मास्क पहनने के बाद उसे न छुएं। जरूरी होने पर छूने से पहले व बाद में हाथ को अच्छी तरह से धोएं।
- मास्क को ग्लैव्स पहने हाथ से न छुएं।
- मास्क का बाहरी हिस्से पर विषाणु हो सकता इसलिए मास्क उतरते समय उसका बाहरी हिस्सा न छुएं।
- मास्क का उपयोग करने के बाद उसे प्लास्टिक बैग में रख का कचरा डब्बा में डालें या जमीन के नीचे गाड़ दें।
- प्रतिदिन सर्जिकल मास्क को बदलें।
डीईआई के राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ सौरभ मनि ने कहा कि सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल करना जरूरी है। साथ ही इस्तेमाल करने का तरीका जानना भी बहुत जरूरी है। समाज के कर्णधार डॉक्टर, कंपाउडर, नर्स का सुरक्षित तथा स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। इसलिए आप सभी से नम्र निवेदन है कि सावधानी जरूर बरतें।