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कामयाबी: संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों के लिए रामबाण बनी आइवरमेक्टिन, आगरा से हुई शुरुआत पूरे प्रदेश ने अपनाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 12 May 2021 10:03 AM IST
सार

आरआरटी के प्रभारी डॉ. अंशुल पारीक ने कहा मार्च 2020 में जब संक्रमण की शुरुआत हुई तब इससे बचने के लिए कोई दवा नहीं थी। हमारी टीम को संक्रमितों के संपर्क में रहना था।

आइवरमेक्टिन
आइवरमेक्टिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जिस संक्रमण ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया उससे आगरा की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) बिल्कुल चिंतित नहीं हुई। संक्रमितों को खोज निकलना हो या उनके घर जाकर संपर्क में आए लागों को बचाना। एक छोटी सी गोली आरआरटी के लिए ‘रामबाण’ बन गई। नाम है आइवरमेक्टिन। जो पहले आगरा ने खाई... अब पूरे प्रदेश में खिलाई जा रही है। 



आरआरटी के प्रभारी डॉ. अंशुल पारीक ने कहा मार्च 2020 में जब संक्रमण की शुरुआत हुई तब इससे बचने के लिए कोई दवा नहीं थी। हमारी टीम को संक्रमितों के संपर्क में रहना था। मैंने मेडिकल किताबों में कोरोना के बारे में पढ़ा। मुझे पता चला कि ये वायरस गाय-भैंस और अन्य पशुओं में भी पाया जाता है। फिर मेरे एक पशु चिकित्सक दोस्त ने बताया कि ऐसी स्थिति में पशुओं को आइवरमेक्टिन की बड़ी खुराक से ठीक किया जाता है।


पहले हमने प्रत्येक 15 दिन पर एक गोली के सेवन शुरू किया। मेरी टीम में 10 सदस्य थे। सभी 15-15 दिन पर इसे खाते थे, प्रयोग सफल रहा। टीम के सदस्य संक्रमितों के संपर्क में आकर भी संक्रमित नहीं हुए। जो संक्रमित हुए उनमें वायरल लोड बहुत कम मिला। फिर इसे स्वास्थ्य और अन्य फ्रंटलाइन कर्मियों पर प्रयोग किया। पिछले 14 महीने में 10 लाख से अधिक लोग इसे खा चुके हैं। 

जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह - फोटो : अमर उजाला
कोविड प्रोटोकॉल में शामिल
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि हमने इस दवा के बारे में शासन से फीडबैक साझा किया। जिसके बाद आइवरमेक्टिन को प्रदेश में कोविड प्रोटोकॉल में शामिल किया गया। देश में उत्तर प्रदेश पहला राज्य है जिसने सबसे पहले इस दवा का प्रयोग व्यापक रूप में शुरू किया।

अब राष्ट्रीय प्रोटोकॉल में इस दवा को शामिल किया जा चुका है। अमेरिकन मेडिकल जर्नल का हवाला देते हुए डीएम ने बताया कि इसकी रिपोर्ट में दावा किया है कि आइवरमेक्टिन का दुष्प्रभाव नहीं है। 

आरआरटी में इन्होंने किया प्रयोग
डॉ. अंशुल पारीक ने बताया शुरुआत में मैंने खुद आइवरमेक्टिन के डिब्बे खरीदे और अपनी टीम के सदस्यों को 10-10 टेबलेट दीं। डॉ. अरुण दत्त, डॉ. अभिषेक यादव, फार्मासिस्ट अजय शर्मा, दिवाकर, दीपेंद्र कुशवाह ने स्वयं पर प्रयोग किया। परिणाम सुखद रहे तो इसे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अपनाया। 
 

एंटी हैलमेथिक है यह दवा
आइवरमेक्टिन एंटी हैलमैथिक दवा है। मुख्य रूप से इसका प्रयोग कोविड से पहले एलबेंडाजोल के विकल्प के रूप में किया जाता रहा है। ये पेट के कीड़ों को मारती है। इसे कृमिनाशक भी कहते हैं। - डॉ. अरुण दत्त, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल

कोविड में ऐसे करती है काम
- वायरस को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है।
- शरीर में मौजूद वायरस को फैलने से रोकती है।
- हल्के संक्रमित मरीजों में लक्षण खत्म करती है।
- अब कोरोना वायरस की उपचार पद्दति में शामिल की गई है।
- 15 दिन में 12 मिलीग्राम दवा वजन अनुसार ले सकते हैं।
- गर्भवती, बच्चों, अत्यधिक गंभीर रोगी के लिए यह दवा नहीं है।
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