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फिर बढ़ा लॉकडाउन, नहीं मिली कोई रियायत
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शहर में एक घर में प्रधानमंत्री का भाषण सुनते लोग
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को देश के नाम दिए गए संबोधन में तीन मई तक लॉकडाउन बढ़ा दिया है। लॉकडाउन बढ़ने का जिले के लोगों ने समर्थन करते हुए इसे जरूरी बताया। रियायत न मिलने से कुछ लोग मायूस दिखे तो। प्रधानमंत्री ने बीते 24 मार्च की रात को देश के नाम दिए गए संबोधन में 14 अप्रैल तक देश को लॉकडाउन करने की बात कहीं थी। 14 अप्रैल का लोगों को बेसब्री से इंतजार था। इस बार प्रधानमंत्री ने देश को तीन मई तक के लिए लॉकडाउन करने की घोषणा की।
प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने के लिए घरों में लोग टीवी के सामने ही जमे रहे। प्रधानमंत्री ने 20 अप्रैल से गाइड लाइन जारी होने की बात कही। साथ ही सप्त पदी का पालन करने की हिदायत दी। लोगों ने देश हित में इसे जरूरी कदम बताया। अपने घरों से दूर फंसे लोगों को रियायत मिलने पर घर पहुंचने की उम्मीद थी लेकिन अब उन्हें कुछ दिन ओर इंतजार करना पड़ेगा। अमित राठौर, प्रकाश चंद्र, भोले सिंह, रमेश चंद्र, बालजी राठौर आदि का कहना है लॉकडाउन बढ़ने के बाद प्रशासन को दवा, राशन जैसी मूलभूत सुविधा की होम डिलीवरी की व्यवस्था करनी चाहिए।
घर पहुंचने की उम्मीद टूटी
एक बार फिर लॉकडाउन बढ़ने से रिश्तेदारी में फंसे लोगों की घर पहुंचने की उम्मीद टूट गई है। रिश्तेदारी में फंसे लोग अपने परिजनों की मौत पर अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। वीडियो कॉलिंग करके ही लोग अपने परिजनों से जानकारी जुटा रहे हैं।
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प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने के लिए घरों में लोग टीवी के सामने ही जमे रहे। प्रधानमंत्री ने 20 अप्रैल से गाइड लाइन जारी होने की बात कही। साथ ही सप्त पदी का पालन करने की हिदायत दी। लोगों ने देश हित में इसे जरूरी कदम बताया। अपने घरों से दूर फंसे लोगों को रियायत मिलने पर घर पहुंचने की उम्मीद थी लेकिन अब उन्हें कुछ दिन ओर इंतजार करना पड़ेगा। अमित राठौर, प्रकाश चंद्र, भोले सिंह, रमेश चंद्र, बालजी राठौर आदि का कहना है लॉकडाउन बढ़ने के बाद प्रशासन को दवा, राशन जैसी मूलभूत सुविधा की होम डिलीवरी की व्यवस्था करनी चाहिए।
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घर पहुंचने की उम्मीद टूटी
एक बार फिर लॉकडाउन बढ़ने से रिश्तेदारी में फंसे लोगों की घर पहुंचने की उम्मीद टूट गई है। रिश्तेदारी में फंसे लोग अपने परिजनों की मौत पर अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। वीडियो कॉलिंग करके ही लोग अपने परिजनों से जानकारी जुटा रहे हैं।
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