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कोरोना जांच के चक्कर में तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाए व्यापारी नेता

Fri, 29 May 2020 11:25 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2020 11:25 PM IST
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corona
कासगंज। जिले के वरिष्ठ व्यापारी नेता एवं व्यापार मंडल के कई प्रांतीय पदों पर रह चुके कवि दविंदर चंडौक की शुक्रवार को बीमारी से मौत हो गई। कोरोना काल में उन्हें समय से अस्पताल में भर्ती नहीं किया। पहले उनकी कोरोना की जांच की गई। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उनका इलाज शुरू किया गया। तब तक उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई। इसकी जानकारी मिलते ही शहर के व्यापारियों में शोक की लहर दौड़ गई।
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व्यापारी नेता दविंदर चंडौक 55 वर्ष के थे। वे व्यापार मंडल के प्रांतीय मंत्री, प्रांतीय संगठन मंत्री रह चुके थे। लायंस क्लब के रीजनल चेयरपर्सन भी थे। इसके अलावा तमाम समाजसेवी संगठनों, साहित्यकार संगठनों से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे थे। 21 मई को वे सामान्य रूप से जांच कराने के लिए नोएडा गए थे। चिकित्सक के परामर्श के बाद उन्होंने अपनी जांच कराई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती होने की सलाह दी।
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लेकिन इससे पहले कोरोना की जांच कराना आवश्यक बताया। शनिवार को उनका कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया गया। इसकी रिपोर्ट सोमवार को निगेटिव आई। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। उनकी हालत निरंतर बिगड़ती रही और मौत हो गई। व्यापारी नेता की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। शुक्रवार देर शाम उनका शव यहां लाया गया।
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व्यापारियों ने दी श्रद्धांजलि
व्यापारी नेता दविंदर चंडौक के निधन की सूचना मिलने के बाद शोक की लहर दौड़ गई। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सतीश गुप्ता, नगर अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल, डा. फारुख, विकास गुप्ता, अशरार सैफी, राज गुप्ता, अभय यादव, गौरव वर्मा, पूरन सिंह राना, अनिल अग्रवाल, पदम बौहरे, मिंकी अग्रवाल, राजवीर सिंह सराफ, सत्यप्रकाश गहलौत, लईक अहमद, जहीरुद्दीन सैफी, रजत बिड़ला, सतवीर सिंह मनकू, राकेश गर्ग, रविकांत सक्सेना, प्रमोद अग्रवाल, सुनील सहित विभिन्न संगठनों के लोगों ने व्यापारी नेता चंडौक को श्रद्धांजलि दी।

- मेरे पिता गंभीर रोग से ग्रसित थे। उनका निरंतर इलाज चल रहा था। अभी भी उन्हें नोएडा ले जाया गया। जहां अस्पताल में भर्ती करने से पूर्व कोरोना की जांच की गई। जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें भर्ती किया गया। यदि पिता को पहले भर्ती कर लिया होता तो शायद उनकी जान बच जाती। परेशानी बढ़ने के बाद कोई राहत नहीं मिल सकी।- गुरलीन चंडौक, पुत्र।
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