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UP: खराब मशीन बेचकर फंसी कंपनी, उपभोक्ता आयोग ने 5.10 लाख लौटाने या नई मशीन देने का दिया आदेश

Sat, 18 Apr 2026 11:30 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Sat, 18 Apr 2026 11:30 AM IST
सार

आगरा उपभोक्ता आयोग ने खराब सोल डिजाइन मशीन बेचने पर कंपनी को 5.10 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने या नई मशीन देने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक कष्ट और मुकदमे के खर्च के लिए 15 हजार रुपये अतिरिक्त देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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Consumer Commission Orders Company to Refund 5.10 Lakh or Replace Defective Sole Machine
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने एंजल इंडिया इंपैक्स कंपनी रोहतक को खराब सोल डिजाइन मशीन की कीमत अदा करने का आदेश दिया है। कंपनी को वादी को मशीन की कीमत 5.10 लाख रुपये छह फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ अदा करनी होगी या नई मशीन देनी होगी। इसके अतिरिक्त, मानसिक कष्ट और वाद व्यय के लिए 15 हजार रुपये भी देने होंगे।
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भरतपुर हाउस निवासी विजय कुमार विज और पार्टनर बन्नी पॉली प्लास्ट इंडिया ने 9 जून, 2011 को आयोग में वाद दायर कराया था। आरोप लगाया था कि 2 दिसंबर, 2009 को एंजल इंडिया इंपैक्स कंपनी से सोल बनाने की मशीन खरीदी थी। मशीन को 31 दिसंबर को संजय प्लेस स्थित कार्यस्थल पर कंपनी इंजीनियर अतुल यादव ने फिट किया था। शुरुआत से ही मशीन डिजाइन नहीं दे पा रही थी। ग्राफिकल प्लॉटिंग भी गलत हो रही थी।
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कंपनी में शिकायत पर इंजीनियर अतुल यादव और रवि कुमार तिवारी ने कई बार मरम्मत करने की कोशिश की। वे ठीक नहीं कर पाए। इससे एक साल तक काम बंद रहा। आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 45 दिन के अंदर यह भुगतान करे।
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राज्य आयोग में हुई थी अपील
विपक्षी के हाजिर न होने पर उपभोक्ता आयोग प्रथम के तत्कालीन अध्यक्ष ने 28 फरवरी, 2013 को वादी के हक में एकपक्षीय आदेश पारित किए थे। कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की। वादी की मृत्यु हो जाने पर 5 मई, 2022 को मुकदमा खारिज हो गया था। इसके बाद वादी की पत्नी रीता विज, पुत्र रोहित विज और पुत्री नेहा विज ने संयुक्त रूप से मुकदमे की पैरवी की। राज्य आयोग ने फिर से सुनवाई कर छह महीने में मामले को निस्तारित करने का आदेश दिया था। इसी निर्देश के बाद जिला आयोग ने अब यह अंतिम फैसला सुनाया है।

 
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