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बैराज: सीएम ने किया था शिलान्यास, नाै साल में एक ईंट भी न लगी; अब केंद्रीय जल आयोग की आपत्ति से टूटी आस

Sun, 28 Jun 2026 10:31 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Sun, 28 Jun 2026 10:31 AM IST
सार

केंद्रीय जल आयोग ने नगला पैमा में प्रस्तावित रबर डैम योजना को तकनीकी रूप से व्यावहारिक न मानते हुए उसे निरस्त कर दिया है। इसके स्थान पर आयोग ने ताजमहल के पीछे डाउन स्ट्रीम में यमुना पर एक पारंपरिक पक्का बैराज बनाने की सिफारिश की है।

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Construction of barrage in Agra could not take place even after foundation stone was laid by cm
नाै साल पहले सीएम ने किया था शिलान्यास। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

लगभग 9 साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 अक्तूबर, 2017 को ताजमहल के 1.5 किमी आगे नगला पैमा में रबर डैम का शिलान्यास किया था। 3,160 दिनों के लंबे इंतजार के बाद रबर डैम के निर्माण में एक ईंट भी नहीं लग पाई, जबकि 50 करोड़ रुपये का बजट सिंचाई विभाग को दिया गया था। डबल इंजन सरकार में 9 साल के बाद केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट पर रबर डैम की जगह अब बैराज बनाने का सुझाव दिया गया है। हैरतअंगेज पहलू ये है कि सभी एनओसी मिलने के बाद यह आपत्ति की गई। बैराज बनाने के लिए सभी एनओसी दोबारा से लेनी पड़ेंगी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को पीडब्ल्यूडी की समीक्षा के लिए आगरा आ रहे हैं। शहर के पर्यावरणविदों और यमुनाप्रेमियों ने जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि वह बैराज का मामला उठाएं। 9 साल से यह अटका हुआ है। दरअसल, केंद्रीय जल आयोग ने नगला पैमा में प्रस्तावित रबर डैम योजना को तकनीकी रूप से व्यावहारिक न मानते हुए उसे निरस्त कर दिया है। इसके स्थान पर आयोग ने ताजमहल के पीछे डाउन स्ट्रीम में यमुना पर एक पारंपरिक पक्का बैराज बनाने की सिफारिश की है। इसमें तकनीकी दिक्कत यह है कि दोबारा सभी एनओसी लेनी होंगी, जिसमें 9 साल का समय लग गया। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र सिंह फोगाट ने बताया कि बैराज के संबंध में सिंचाई विभाग के पास अभी कोई निर्देश नहीं है। शासन के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।
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60 साल से यमुना पर बैराज का इंतजार
यमुना नदी पर 1965 से बैराज प्रस्तावित है। पर्यावरणविद डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि मनोहरपुर में पूर्व सीएम नारायणदत्त तिवारी, फिर राज्यपाल रोमेश भंडारी ने शिलान्यास कर चुके हैं। 9 साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शिलान्यास किया, लेकिन बैराज नहीं बन पाया। रबर डैम और बैराज के चक्कर में 9 साल बर्बाद हो गए। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता के मुताबिक जब सभी एनओसी दी जा चुकी थीं, तब केंद्रीय जल आयोग की आपत्ति पर रबर बैराज को निरस्त किया जाना कई सवाल खड़े करता है।

 

इन योजनाओं का भी यही हाल
शिवाजी म्यूजियम: सीएम योगी ने वर्ष 2016 में शुरू किए गए मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर शिवाजी म्यूजियम किया, लेकिन 10 साल में यह पूरा नहीं हो पाया। टाटा प्रोजेक्ट्स ने फिर काम शुरू किया है, पर अगले साल तक ही यह बन पाएगा।
यमुना रिवरफ्रंट: वर्ष 2017 में ताजमहल पर झाडू लगाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ताज से रामबाग के बीच यमुना रिवरफ्रंट की योजना बनाने को कहा था। 9 साल में इसका प्रस्ताव तक पूरा नहीं हो पाया। कॉरिडोर की जमीन पर पार्क भी तैयार नहीं हुए।
सिविल एन्क्लेव: धनौली में सिविल एन्क्लेव का काम जारी है, जिसके अक्तूबर तक पूरे होने का दावा एयरपोर्ट अथॉरिटी ने किया है, लेकिन उससे पहले ही आगरा की चार शहरों की उड़ानें अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, भोपाल बंद हो चुकी हैं।

आंकड़ों पर नजर
350 करोड़ थी रबर डैम की लागत
1.5 किमी ताज के आगे बनना था
340 मीटर थी डैम की प्रस्तावित लंबाई
55 मीटर के पांच बैलून गेट लगने थे
50 करोड़ रुपये बजट में वापस हो चुके
 
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