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शिखर पर रहने वाली कांग्रेस तरसती नजर आई एक एक वोट को
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कासगंज। जिले की सियासत में शिखर पर रहने वाली कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव 2022 का परिणाम सबसे बुरा साबित हुआ। इस चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी तीनों ही सीटों पर एक-एक वोट के लिए तरसते रहे। जिले की एकमात्र कासगंज विधानसभा ही ऐसी रही, जिसमें पार्टी के प्रत्याशी ने पांच हजार वोटों के आंकड़े को पार किया।
देश की आजादी के बाद 1952 में पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जिले की कासगंज वेस्ट, कासगंज नॉर्थ एवं कासगंज ईस्ट सीट पर जीत हासिल की। जीत का यह सिलसिला 1957 के चुनाव में भी रहा। पार्टी ने कासगंज, सहावर एवं सिढ़पुरा की तीनों सीटें जीत ली।1962 के चुनाव में पार्टी ने सिढ़पुरा की सीट पर जीत हासिल की। 1967 में कासगंज और पटियाली में चुनाव जीता। 1969 के चुनाव में पार्टी का जिले में पूरी तरह से सफाया हो गया, लेकिन तीनों सीटों पर प्रत्याशी उपविजेता बने। 1974 के चुनाव में पार्टी ने वापसी करते हुए कासगंज व पटियाली में चुनाव जीत लिया, जबकि सोरों में दूसरा स्थान पाने में सफलता हासिल कर ली। इसके बाद 1977 के चुनाव में पार्टी का फिर से पूरी तरह से सफाया हो गया, लेकिन तीनों विधानसभा में प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे। 1980 के चुनाव में एक बार फिर से पार्टी ने क्लीन स्वीप कर दिया। यह सिलसिला 1985 के चुनाव में भी बरकरार रहा। 1989 के चुनाव में पार्टी ने मात्र पटियाली की सीट पर जीत हासिल की। जबकि पटियाली व सोरों में पार्टी के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद पार्टी को जिला में फिर कभी जीत नहीं मिली। 1991 से 2012 तक के छह विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव आता रहा, लेकिन पार्टी के प्रत्याशी इतने वोट अवश्य मिलते रहे, जिससे पार्टी का अस्तित्व बना रहा। 2017 में कांग्रेस ने महानदल के साथ चुनाव लड़ा, जिसमें महानदल के प्रत्याशियों ने कासगंज में 22203 वोट, अमांपुर में 16937 वोट, पटियाली में 10579 वोट प्राप्त किए। इस चुनाव में प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार की कमान संभालने से कार्यकर्ताओं में नया जोश आ गया। तीनों ही सीटों पर कई-कई दावेदार टिकट मांगते नजर आए, जिससे लगने लगा कि इस चुनाव में पार्टी कुछ बेेहतर प्रदर्शन करेगी और जिला में अपनी खोई हुई साख को वापस प्राप्त कर लेगी, लेकिन तीनों सीटों पर कोई प्रत्याशी करिश्मा नहीं दिखा पाया। कासगंज से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी कुल्दीप पांडे ने जिले में सबसे अधिक 5945 वोट प्राप्त किए। जबकि अमांपुर में दिव्या शर्मा ने 1337 वोट प्राप्त किए, जिससे इन दोनों विधानसभा में पार्टी के प्रत्याशी चौथे स्थान पर रहे। जबकि पटियाली में पार्टी की प्रत्याशी जनाधिकार पार्टी के विवेक से भी पिछड़ गई। विवेक ने 2224 वोट प्राप्त किए। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी इमरान अली ने मात्र 1243 वोट प्राप्त किए।
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देश की आजादी के बाद 1952 में पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जिले की कासगंज वेस्ट, कासगंज नॉर्थ एवं कासगंज ईस्ट सीट पर जीत हासिल की। जीत का यह सिलसिला 1957 के चुनाव में भी रहा। पार्टी ने कासगंज, सहावर एवं सिढ़पुरा की तीनों सीटें जीत ली।1962 के चुनाव में पार्टी ने सिढ़पुरा की सीट पर जीत हासिल की। 1967 में कासगंज और पटियाली में चुनाव जीता। 1969 के चुनाव में पार्टी का जिले में पूरी तरह से सफाया हो गया, लेकिन तीनों सीटों पर प्रत्याशी उपविजेता बने। 1974 के चुनाव में पार्टी ने वापसी करते हुए कासगंज व पटियाली में चुनाव जीत लिया, जबकि सोरों में दूसरा स्थान पाने में सफलता हासिल कर ली। इसके बाद 1977 के चुनाव में पार्टी का फिर से पूरी तरह से सफाया हो गया, लेकिन तीनों विधानसभा में प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे। 1980 के चुनाव में एक बार फिर से पार्टी ने क्लीन स्वीप कर दिया। यह सिलसिला 1985 के चुनाव में भी बरकरार रहा। 1989 के चुनाव में पार्टी ने मात्र पटियाली की सीट पर जीत हासिल की। जबकि पटियाली व सोरों में पार्टी के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद पार्टी को जिला में फिर कभी जीत नहीं मिली। 1991 से 2012 तक के छह विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव आता रहा, लेकिन पार्टी के प्रत्याशी इतने वोट अवश्य मिलते रहे, जिससे पार्टी का अस्तित्व बना रहा। 2017 में कांग्रेस ने महानदल के साथ चुनाव लड़ा, जिसमें महानदल के प्रत्याशियों ने कासगंज में 22203 वोट, अमांपुर में 16937 वोट, पटियाली में 10579 वोट प्राप्त किए। इस चुनाव में प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार की कमान संभालने से कार्यकर्ताओं में नया जोश आ गया। तीनों ही सीटों पर कई-कई दावेदार टिकट मांगते नजर आए, जिससे लगने लगा कि इस चुनाव में पार्टी कुछ बेेहतर प्रदर्शन करेगी और जिला में अपनी खोई हुई साख को वापस प्राप्त कर लेगी, लेकिन तीनों सीटों पर कोई प्रत्याशी करिश्मा नहीं दिखा पाया। कासगंज से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी कुल्दीप पांडे ने जिले में सबसे अधिक 5945 वोट प्राप्त किए। जबकि अमांपुर में दिव्या शर्मा ने 1337 वोट प्राप्त किए, जिससे इन दोनों विधानसभा में पार्टी के प्रत्याशी चौथे स्थान पर रहे। जबकि पटियाली में पार्टी की प्रत्याशी जनाधिकार पार्टी के विवेक से भी पिछड़ गई। विवेक ने 2224 वोट प्राप्त किए। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी इमरान अली ने मात्र 1243 वोट प्राप्त किए।
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