मारपीट का मामला: आगरा के एसपी सिटी सहित छह नामजद और 20 अज्ञात के खिलाफ परिवाद दर्ज
पीड़ित परिवार ने पुलिस पर मारपीट, जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया है। कोर्ट ने परिवाद दर्ज कर वादी के बयान के लिए नौ जून की तारीख नियत की है।
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आगरा के आरबी पुरम में दुकान खोलने पर दुकानदार के परिवार को जेल भेजने के मामले में एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद सहित छह नामजद और 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ स्पेशल सीजेएम की कोर्ट परिवाद प्रस्तुत किया गया है। कोर्ट ने परिवाद दर्ज कर वादी के बयान के लिए नौ जून की तारीख नियत की है। इसमें मारपीट, जान से मारने की कोशिश का आरोप है।
आरबी पुरम निवासी पंकज उपाध्याय पुत्र प्रमोद उपाध्याय ने मुकदमा प्रस्तुत किया है। इसके अनुसार, 18 अप्रैल को वह मकान में बनी दुकान से घर के लिए जरूरी सामान निकाल रहे थे। तभी फाउंड्री नगर चौकी प्रभारी विनीत राणा चार-पांच पुलिसकर्मियों के साथ आ गए।
आरोप है कि चौकी प्रभारी ने डंडों से पीटा। लॉकडाउन में दुकान खोलने का आरोप लगाया। उनकी मूक-बधिर मां किरन देवी से पुलिसकर्मियों ने मारपीट की। पत्नी ज्योति, पिता प्रमोद उपाध्याय, भाई हरि गोपाल एवं भाभी वर्षा को भी पीटा। पुलिसकर्मी धमकी देकर चले गए। कुछ देर बाद फिर आए और घर में घुस आए।
पुलिस ने परिवार के कई लोगों को किया था गिरफ्तार
परिवार की महिलाओं और मासूम बच्चों के साथ मारपीट की। मुकदमा दर्ज करके माता-पिता, पत्नी, भाई और भाभी समेत गिरफ्तार कर लिया। जिला अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद थाने लाए। सभी की पिटाई करने के बाद जेल भेज दिया। थाने पर एसपी सिटी भी आ गए थे।
पंकज के अनुसार, क्षेत्रीय लोगों, विधायकों और सांसद ने उनके हक में आवाज उठाई। इस पर मुकदमे से जानलेवा हमला और सात क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट की धारा को हटाया। तब उन्हें जमानत मिल सकी। सात मई को अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया। मगर, कोई कार्रवाई नहीं की।
इस पर एसपी सिटी समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ बलवा, गाली-गलौज, धमकी, घर में घुसकर मारपीट और जानलेवा हमले की धारा में मुकदमा दर्ज करने के लिए कोर्ट में वाद प्रस्तुत किया है। इसमें एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद, चौकी प्रभारी विनीत राणा, एसआई योगेश कुमार, एसआई नीतू शर्मा, एसआई रोहित आर्य, पुलिसकर्मी प्रियंका यादव और 15-20 अज्ञात पुलिसकर्मी पर आरोप है।