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Agra: प्रधानों को नहीं पता क्या है प्लास्टिक बैंक, आगरा में धूल चाट रहा स्वच्छता अभियान
Thu, 27 Oct 2022 10:15 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 27 Oct 2022 10:15 AM IST
सार
स्वच्छ भारत मिशन को पांच साल बीत गए। 2020 तक कागजों में 695 गांव खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो गए। अब एक कदम आगे ओडीएफ प्लस स्कीम में 113 गांव चयनित हुए हैं, इनमें कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक प्रबंधन होना है।
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प्लास्टिक बैंक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ताजनगरी आगरा ही नहीं, गांव में भी स्वच्छता अभियान धूल चाट रहा है। यहां ग्रामीणों को गीले-सूखे कचरे में अंतर नहीं पता है। ग्राम प्रधानों को प्लास्टिक बैंक के बारे में ही पता नहीं है। जिले के 113 गांव ओडीएफ प्लस के लिए चयनित हुए हैं, जिनमें प्लास्टिक प्रबंधन के लिए कूड़ेदान की तर्ज पर प्लास्टिकदान रखे गए हैं। इनमें प्लास्टिक को इकठ्ठा करना है।
स्वच्छ भारत मिशन को पांच साल बीत गए। 2020 तक कागजों में 695 गांव खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो गए। अब एक कदम आगे ओडीएफ प्लस स्कीम में 113 गांव चयनित हुए हैं, इनमें कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक प्रबंधन होना है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक बैंक की पड़ताल की, तो ओडीएफ प्लस की पोल खुल गई। फतेहाबाद की मीठपुरा पंचायत के प्रधान रामदेव का कहना है कि उन्हें प्लास्टिक बैंक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न विकास खंड अधिकारी ने कभी बताया। वरना के ग्राम प्रधान राजेश वर्मा ने बताया कि उन्हें नहीं पता प्लास्टिक बैंक क्या होता है।
एत्मादपुर ब्लॉक की बरहन में ग्राम प्रधान खेडी अडू विशंभर सिंह ने बताया कि प्लास्टिक बैंक कागजों में बन गई होगी। जमीन पर कोई बैंक नहीं। ग्राम प्रधान नगला पचौरी के पुत्र जयवीर सिंह का कहना था कि उन्होंने प्लास्टिक बैंक का कभी नाम तक नहीं सुना। नगला गोल की प्रधान के पति बीरेंद्र सिंह ने बताया कि प्लास्टिक बैंक के लिये पंचायत सचिव से कहा था, लेकिन उन्होंने यह कह कर टाल दिया कि लगवा देंगे अभी जरूरी नहीं है। ग्राम प्रधान बरहन भूदेव प्रसाद का कहना था कि प्लास्टिक बैंक अभी नहीं लगा है। ये हाल तब है जब स्वच्छता मिशन के निदेशक से लेकर पंचायत राज विभाग के अफसर गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाने का दावा कर रहे हैं।
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जिला पंचायत राज अधिकारी नीतेश भोंडेले ने बताया कि ओडीएफ प्लस में चयनित गांवों के प्रधानों का लखनऊ और बुलंदशहर में प्रशिक्षण कराया था। प्लास्टिक बैंक की कार्य योजना बनाना सिखाया था। यदि वह कह रहे हैं उन्हें प्लास्टिक बैंक के बारे में पता नहीं है तो एडीओ पंचायत व सचिव जिम्मेदार हैं। उनके विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। लोगों को जागरुक करेंगे।
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स्वच्छ भारत मिशन को पांच साल बीत गए। 2020 तक कागजों में 695 गांव खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो गए। अब एक कदम आगे ओडीएफ प्लस स्कीम में 113 गांव चयनित हुए हैं, इनमें कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक प्रबंधन होना है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक बैंक की पड़ताल की, तो ओडीएफ प्लस की पोल खुल गई। फतेहाबाद की मीठपुरा पंचायत के प्रधान रामदेव का कहना है कि उन्हें प्लास्टिक बैंक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न विकास खंड अधिकारी ने कभी बताया। वरना के ग्राम प्रधान राजेश वर्मा ने बताया कि उन्हें नहीं पता प्लास्टिक बैंक क्या होता है।
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एत्मादपुर ब्लॉक की बरहन में ग्राम प्रधान खेडी अडू विशंभर सिंह ने बताया कि प्लास्टिक बैंक कागजों में बन गई होगी। जमीन पर कोई बैंक नहीं। ग्राम प्रधान नगला पचौरी के पुत्र जयवीर सिंह का कहना था कि उन्होंने प्लास्टिक बैंक का कभी नाम तक नहीं सुना। नगला गोल की प्रधान के पति बीरेंद्र सिंह ने बताया कि प्लास्टिक बैंक के लिये पंचायत सचिव से कहा था, लेकिन उन्होंने यह कह कर टाल दिया कि लगवा देंगे अभी जरूरी नहीं है। ग्राम प्रधान बरहन भूदेव प्रसाद का कहना था कि प्लास्टिक बैंक अभी नहीं लगा है। ये हाल तब है जब स्वच्छता मिशन के निदेशक से लेकर पंचायत राज विभाग के अफसर गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाने का दावा कर रहे हैं।
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