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नालों की सफाई अब तक न हो पाई
अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 15 Jun 2016 12:15 AM IST
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नाले
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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इस बार अधिक बारिश की मौसम विभाग की भविष्यवाणी है। मानसून भी निकट आ चुका है। इसके उलट प्रशासन नींद से नहीं जागा है। थोड़ी सी बारिश में जलमग्न होने वाले शहर में पूरी तरह नाला सफाई नहीं हुई है। अधिकांश नाले कूड़े और सिल्ट से अटे पड़े हैं। एक भी नाले की हेड से टेल तक तली झाड़ सफाई नहीं हो पाई है। हालांकि नगर निगम का दावा है कि 321 नालों में से अब तक लगभग 290 नाले साफ कर दिए हैं।
मुगलिया दौर में व्यवस्थिति तरीके से विकसित हुआ शहर अब पूरी तरह से अव्यवस्थित हो चुका है। स्थिति यह है कि मिनटों की बारिश घंटों के बाद लोगों को घंटों जलभराव से जूझना पड़ता है। इसके बाद भी नगर निगम ने शहर के नालों की सफाई कार्य को गंभीरता से नहीं लिया।
नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बावजूद शायद ही किसी नाले की तली झाड़ सफाई हुई हो। खानापूर्ति के लिए बड़े नालों में से सिल्ट तो निकाली गई, लेकिन वह भी बीच-बीच में से। इन्हीं के आधार पर कागजों में नाला सफाई पूरी हो गई। इस प्रमाण हैं बिजलीघर, बीएसएनएल कार्यालय के सामने स्थित नाले। यह नाले कूड़े से भरा हुए हैं।
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नाले की सिल्ट फिर नाले में
नियमानुसार, नाले से निकलने वाली सिल्ट सूखने के बाद उठाने होती है। मगर, कई दिन भी नगर निगम सिल्ट नहीं उठता। इस बीच क्षेत्रीय लोग धूल और गंदगी से तो परेशान रहते ही हैं, यदि बारिश हो जाए तो नाले की सिल्ट पानी के साथ बहकर फिर से नाले में चली जाती है। यही हकीकत मंटोला नाले की सफाई के बाद सामने आई। सिल्ट बाउंड्री पर ही एकत्रित कर दी। आए दिन हो रही बारिश में यह सिल्ट फिर से नाले में जा रही है।
ये हैं प्रमुख नाले
मंटोला, काजीपाड़ा, शाही कैनाल, राजनगर, अशोक नगर, नाई की मंडी
यहां होता है जलभराव
सूरसदन चौराहा, चर्च रोड, आलमगंज, आवास विकास, पृथ्वीनाथ मंदिर (शाहगंज), मारुति एस्टेट, विनय नगर, अलबतिया रोड, केदार नगर, खेरिया मोड़, ईदगाह, नामनेर, नगला पदी, न्यू आगरा, साकेत कालोनी, दयालबाग आदि।
अतिक्रमण बना मुसीबत
शहर के अधिकांश बड़े नाले अतिक्रमण से घिरे हुए हैं। इसकी वजह से इनकी सफाई में अड़चन आती है। दरअसल, ये नाले इतने बड़े और गहरे हैं कि सफाई कर्मचारी बिना मशीनों से इसे साफ नहीं कर सकते। नगर निगम अधिकारियों की मानें तो मंटोला नाले पर ही लगभग 150 अवैध मकान बनें हैं। प्रशासन से इन्हें हटाने के बारे में लिखा है।
‘नालों में कूड़ा न डालें’
नगर आयुक्त इंद्रविक्रम सिंह ने लोगों से नालों में कूड़ा-कचरा न डालने की अपील की है। उनका कहना है कि नाला सफाई के बाद क्षेत्रीय लोग घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कूड़ा डस्टबीन में डालने की बजाए नालों में डाल देते हैं। उन्होंने सफाई निरीक्षकों को भी निर्देशित किया कि वे नालों में कूड़ा फेंकने वालों का चालान काटें। प्रतिदिन ऐसे 3-4 लोगों के चालान काटने का लक्ष्य दिया है।
शहर के अधिकांश नालों की सफाई कर दी गई है। शेष नालों की सफाई इसी सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी। इनकी तली झाड़ सफाई की जा रही है।
- सीपी शर्मा, जेडएसओ
नगर आयुक्त ने किया निरीक्षण
नगर आयुक्त इंद्रविक्रम सिंह ने मंगलवार को मंटोला, काजीपाड़ा और बिजलीघर नाले का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सफाई कर्मचारियों को तली झाड़ सफाई और सिल्ट को समय से उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने नाले किनारे सिल्ट पड़ी होने पर रोष भी व्यक्त किया।
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मुगलिया दौर में व्यवस्थिति तरीके से विकसित हुआ शहर अब पूरी तरह से अव्यवस्थित हो चुका है। स्थिति यह है कि मिनटों की बारिश घंटों के बाद लोगों को घंटों जलभराव से जूझना पड़ता है। इसके बाद भी नगर निगम ने शहर के नालों की सफाई कार्य को गंभीरता से नहीं लिया।
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नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बावजूद शायद ही किसी नाले की तली झाड़ सफाई हुई हो। खानापूर्ति के लिए बड़े नालों में से सिल्ट तो निकाली गई, लेकिन वह भी बीच-बीच में से। इन्हीं के आधार पर कागजों में नाला सफाई पूरी हो गई। इस प्रमाण हैं बिजलीघर, बीएसएनएल कार्यालय के सामने स्थित नाले। यह नाले कूड़े से भरा हुए हैं।
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नाले की सिल्ट फिर नाले में
नियमानुसार, नाले से निकलने वाली सिल्ट सूखने के बाद उठाने होती है। मगर, कई दिन भी नगर निगम सिल्ट नहीं उठता। इस बीच क्षेत्रीय लोग धूल और गंदगी से तो परेशान रहते ही हैं, यदि बारिश हो जाए तो नाले की सिल्ट पानी के साथ बहकर फिर से नाले में चली जाती है। यही हकीकत मंटोला नाले की सफाई के बाद सामने आई। सिल्ट बाउंड्री पर ही एकत्रित कर दी। आए दिन हो रही बारिश में यह सिल्ट फिर से नाले में जा रही है।
ये हैं प्रमुख नाले
मंटोला, काजीपाड़ा, शाही कैनाल, राजनगर, अशोक नगर, नाई की मंडी
यहां होता है जलभराव
सूरसदन चौराहा, चर्च रोड, आलमगंज, आवास विकास, पृथ्वीनाथ मंदिर (शाहगंज), मारुति एस्टेट, विनय नगर, अलबतिया रोड, केदार नगर, खेरिया मोड़, ईदगाह, नामनेर, नगला पदी, न्यू आगरा, साकेत कालोनी, दयालबाग आदि।
अतिक्रमण बना मुसीबत
शहर के अधिकांश बड़े नाले अतिक्रमण से घिरे हुए हैं। इसकी वजह से इनकी सफाई में अड़चन आती है। दरअसल, ये नाले इतने बड़े और गहरे हैं कि सफाई कर्मचारी बिना मशीनों से इसे साफ नहीं कर सकते। नगर निगम अधिकारियों की मानें तो मंटोला नाले पर ही लगभग 150 अवैध मकान बनें हैं। प्रशासन से इन्हें हटाने के बारे में लिखा है।
‘नालों में कूड़ा न डालें’
नगर आयुक्त इंद्रविक्रम सिंह ने लोगों से नालों में कूड़ा-कचरा न डालने की अपील की है। उनका कहना है कि नाला सफाई के बाद क्षेत्रीय लोग घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कूड़ा डस्टबीन में डालने की बजाए नालों में डाल देते हैं। उन्होंने सफाई निरीक्षकों को भी निर्देशित किया कि वे नालों में कूड़ा फेंकने वालों का चालान काटें। प्रतिदिन ऐसे 3-4 लोगों के चालान काटने का लक्ष्य दिया है।
शहर के अधिकांश नालों की सफाई कर दी गई है। शेष नालों की सफाई इसी सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी। इनकी तली झाड़ सफाई की जा रही है।
- सीपी शर्मा, जेडएसओ
नगर आयुक्त ने किया निरीक्षण
नगर आयुक्त इंद्रविक्रम सिंह ने मंगलवार को मंटोला, काजीपाड़ा और बिजलीघर नाले का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सफाई कर्मचारियों को तली झाड़ सफाई और सिल्ट को समय से उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने नाले किनारे सिल्ट पड़ी होने पर रोष भी व्यक्त किया।