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लापरवाही: आबादी तक पहुंचा माइनर का पानी, दो दिन बाद टूटी सिंचाई विभाग की नींद
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कासगंज सिढ़पुरा के ग्राम हमीरपुर में कटे माइनर को मिट्टी की बोरियां डालकर बंद करते ग्रामीण
- फोटो : KASGANJ
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सिढ़पुरा (कासगंज)। रविवार रात कटी बाछमई माइनर का पानी खंदी से ग्राम हमीरपुर के आबादी क्षेत्र तक पहुंच गया। ग्रामीण रविवार को एवं सोमवार की रात जागकर कटान को रोकने का प्रयास करते रहे। दो दिन बाद सिंचाई विभाग की नींद खुली, तब तक पानी आबादी क्षेत्र में भर गया। जेसीबी की सहायता से मंगलवार को पानी का कटान बंद हो सका। विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों में रोष है।
ग्राम हमीरपुर के पास बाछमई माइनर की खंदी रविवार की रात लगभग 9 बजे कट गई। इसके बाद लगभग 600 बीघा फसलें जलमग्न हो गई। किसान फसलों के जलमग्न होने से बर्बाद हुई फसलों से परेशान थे। वहीं उनके द्वारा मिट्टी की बोरियां भरकर कटान को रोके जाने का प्रयास कर रहे थे। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी इसकी सूचना दी गई। लेकिन सिंचाई विभाग के द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे खंदी को बंद किया। पानी का कटान रूकने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वहीं बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिलाए जाने की मांग की गई।
आबादी क्षेत्र में पानी पहुंचने से हुई खासी परेशानी
आबादी क्षेत्र में जलभराव हो जाने से ग्रामीणों को अपने पशुओं को बांधने के लिए जगह नहीं बची। उन्होंने ठंड के मौसम में पानी से पशुओं को बचाने के लिए अन्यत्र सुरक्षित स्थानों पर लेे जाकर बांधा। वहीं आबादी क्षेत्र में रखे उपले और भूसा की बुर्जी भीग जाने से दिक्कतें हुई हैं। पशुओं के लिए अन्य लोगों से भूसा मांगकर चारे की व्यवस्था करनी पड़ी।
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ग्राम हमीरपुर के पास बाछमई माइनर की खंदी रविवार की रात लगभग 9 बजे कट गई। इसके बाद लगभग 600 बीघा फसलें जलमग्न हो गई। किसान फसलों के जलमग्न होने से बर्बाद हुई फसलों से परेशान थे। वहीं उनके द्वारा मिट्टी की बोरियां भरकर कटान को रोके जाने का प्रयास कर रहे थे। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी इसकी सूचना दी गई। लेकिन सिंचाई विभाग के द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे खंदी को बंद किया। पानी का कटान रूकने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वहीं बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिलाए जाने की मांग की गई।
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आबादी क्षेत्र में पानी पहुंचने से हुई खासी परेशानी
आबादी क्षेत्र में जलभराव हो जाने से ग्रामीणों को अपने पशुओं को बांधने के लिए जगह नहीं बची। उन्होंने ठंड के मौसम में पानी से पशुओं को बचाने के लिए अन्यत्र सुरक्षित स्थानों पर लेे जाकर बांधा। वहीं आबादी क्षेत्र में रखे उपले और भूसा की बुर्जी भीग जाने से दिक्कतें हुई हैं। पशुओं के लिए अन्य लोगों से भूसा मांगकर चारे की व्यवस्था करनी पड़ी।
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