राजकीय बालगृह में शिशुओं की मौत: अमर उजाला पड़ताल में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत
- बालगृह प्रबंधन अनदेखी नहीं, ठंड से बता रहा बच्चों की मौत, जबकि बालगृह में 44 बच्चों की देखभाल के लिए केवल दो आया
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आगरा के धनौली-जगनेर मार्ग स्थित राजकीय बालगृह की शनिवार को अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो हैरान करने वाली हकीकत सामने आई। शिशु गृह में 44 बच्चों की देखरेख के लिए तीन शिफ्ट में छह आया संविदा पर काम करती हैं।
यानी एक शिफ्ट में दो आया 44 बच्चों को संभालती हैं। इन 44 बच्चों में 12 बच्चे 0 से 5 साल उम्र के हैं। इनमें 5 लड़कियां हैं और 7 लड़के हैं। 5 से 10 साल उम्र के यहां 32 बच्चे हैं। 4 कमरों में चल रहे शिशु गृह में सिंगल बेड पर दो से तीन बच्चे रहते हैं।
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शिशु गृह में तीन बच्चे अभी बीमार हैं। इनका संस्था में ही उपचार चल रहा है। यहां सप्ताह में एक दिन चिकित्सक देखने आते हैं। चिकित्सक का रोस्टर के अनुसार स्वास्थ्य परीक्षण दिवस निर्धारित है। शिशु गृह में कुल 12 कर्मचारी हैं।
बता दें कि 24 और 25 अक्तूबर को राजकीय बालगृह के तीन शिशुओं ने दम तोड़ दिया था। बालगृह प्रबंधन ने सप्ताहभर तक मामले को दबाए रखा। इसका खुलासा 27 अक्तूबर को निदेशक बाल कल्याण को भेजी गई रिपोर्ट में हुआ। बालगृह अधीक्षक ने ठंड से बच्चों की मौत होना बताया है।
'ठंड से बिगड़ी तबीयत'
राजकीय बाल शिशु गृह के अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि तीनों बच्चे प्री मैच्योर थे, अचानक मौसम बदला तो ठंड से उनकी तबीयत खराब हो गई। उस दिन मैं मौजूद नहीं था, इसलिए दूसरे कर्मचारी ने निरीक्षण समिति को लेक्टोजन पाउडर व खरीद रजिस्टर नहीं दिखाया।
बच्चों को दूध न मिल रहा, न पौष्टिक आहार
राजकीय बाल शिशु गृह में रह रहे बच्चे बेहद कमजोर हैं। उन्हें देखने से ऐसा लगता है कि मानक के अनुरूप दूध और पौष्टिक आहार नहीं मिल रहा। 18 सितंबर को निरीक्षण समिति आगरा के अध्यक्ष एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सर्वजीत कुमार सिंह ने जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) को भेजी निरीक्षण रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।
अध्यक्ष ने संस्था प्रभारी से बच्चों के लिए खरीदे गए लेक्टोजन पाउडर व खाद्य रजिस्टर दिखने के लिए कहा तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अध्यक्ष ने अपनी रिपोर्ट के जवाब में डीपीओ से कार्रवाई करने को कहा था, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। डीपीओ लवकुश भार्गव से उनका पक्ष जानने के लिए कलक्ट्रेट स्थित कार्यालय में संपर्क किया तो वह कार्यालय में नहीं मिले। उनका मोबाइल नंबर पर संपर्क किया तो उनका फोन स्विच ऑफ था।