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दर्द: पांच मासूमों की छिन गई मां, 17 ने खोया पिता को, प्रशासन ने शुरू किया सत्यापन
Fri, 04 Jun 2021 10:35 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 04 Jun 2021 10:35 AM IST
सार
चाइल्ड लाइन 1098 ने 17 बच्चे चिह्नित किए हैं। जिनके माता या पिता में से किसी एक की कोरोना संक्रमित होने के बाद मृत्यु हो गई।
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
आगरा में कोरोना संक्रमण में 26 बच्चों की दुनिया उजड़ गई। महामारी का ऐसा दंश जो उन्हें जिंदगीभर सालता रहेगा। पांच मासूमों से मां की गोद छिन गई। 17 बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। चार बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता दोनों संक्रमण की बलि चढ़ गए। प्रशासन इन 26 बच्चों के सत्यापन में जुट गया है। चाइल्ड लाइन 1098 ने 17 बच्चे चिह्नित किए हैं। जिनके माता या पिता में से किसी एक की कोरोना संक्रमित होने के बाद मृत्यु हो गई।
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चाइल्ड लाइन समन्वयक रितु वर्मा ने बताया कि 17 बच्चों की देखरेख करने वालों से उनके माता-पिता की मृत्यु का प्रमाण व कोविड रिपोर्ट मांगी गई है। इनमें 12 बच्चों के पिता और पांच बच्चों की मां नहीं है। ‘महफूज’ सुरक्षित बचपन संस्था ने प्रशासन को पांच ऐसे बच्चों की सूची सौंपी है जिनके पिता खत्म हो गए।
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मां पालन-पोषण करने में सक्षम नहीं है। प्रभारी अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार ने बताया कि चाइल्डन, सामाजिक संस्थाओं के अलावा बीडीओ और एसडीएम से बच्चों का सत्यापन कराया जा रहा है। पहले चरण में ऐसे बच्चों को लाभ मिलेगा जिनके माता-पिता दोनों नहीं रहे। ऐसे बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जोड़ा जाएगा।
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13 अनाथों को भी मदद की दरकार
महफूज संस्था समन्वयक नरेश पारस ने 13 ऐसे अनाथ बच्चों की सूची जिला प्रशासन को भेजी है जिनका दुनिया में कोई नहीं। पारस ने बताया कि इन बच्चों के मां-बाप कोरोना से पहले ही खत्म हो गए। इन्हें भी मदद की दरकार है। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा, ऐसे बच्चों के लिए अलग स्कीम है। इन्हें भी आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी।
जिलाधिकारी बने दो बच्चों के संरक्षक
बाह के गुही गांव में दो बच्चे अब अनाथ नहीं रहे। गुरुवार को जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह उनके संरक्षक बन गए। दोनों बच्चों से उनके घर जाकर चार हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक मदद और बच्चे के लिए लैपटॉप देने का वादा किया। बता दें कि दोनों बच्चों की मां शिक्षामित्र थीं। कोरोना संक्रमित होने के बाद 9 मई को मां की मृत्यु हो गई। वहीं उनके पिता प्राइवेट नौकरी करते थे। 14 मई को पिता भी गुजर गए। अब दोनों बच्चों को गांव के नजदीकी रिश्तेदार पाल रहे हैं। डीएम प्रभु एन सिंह ने बच्चों की शिक्षा से लेकर खाने व चिकित्सा का जिम्मा उठाया है। उन्होंने एसडीएम बाह को बच्चों के संपर्क में रहने के आदेश दिए। इनके अलावा नगला कारे में दो बच्चे भी अनाथ हुए हैं। जिनका सत्यापन प्रशासनिक स्तर से जारी है।
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के नियम
- 0 से 18 साल के बच्चे आर्थिक मदद के लिए पात्र होंगे
- मार्च 2020 से मई 2021 के बीच माता-पिता की मृत्यु
- माता-पिता का संक्रमण एवं मृत्यु का प्रमाणपत्र जरूरी
- 0 से 10 वर्ष बच्चों को प्रति माह चार हजार रुपये मिलेंगे
- कक्षा 6 से 12 तक के निराश्रित बच्चों को शिक्षा मिलेगी
- 11 से 18 वर्ष बच्चों के लिए कक्षा 12 तक निशुल्क शिक्षा
- ऐसे मां-बाप की बेटियों के विवाह हेतु 1.01 लाख रुपये की मदद
- ऐसे बच्चों की चल-अचल संपत्ति के लिए डीएम संरक्षक हैं।
यहां करें सपंर्क
- अगर आप भी ऐसे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो 9454417661 सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार को सूचना दे सकते हैं। अमर उजाला भी ऐसे बच्चों की मदद के लिए तत्पर है।
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महफूज संस्था समन्वयक नरेश पारस ने 13 ऐसे अनाथ बच्चों की सूची जिला प्रशासन को भेजी है जिनका दुनिया में कोई नहीं। पारस ने बताया कि इन बच्चों के मां-बाप कोरोना से पहले ही खत्म हो गए। इन्हें भी मदद की दरकार है। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा, ऐसे बच्चों के लिए अलग स्कीम है। इन्हें भी आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी।
जिलाधिकारी बने दो बच्चों के संरक्षक
बाह के गुही गांव में दो बच्चे अब अनाथ नहीं रहे। गुरुवार को जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह उनके संरक्षक बन गए। दोनों बच्चों से उनके घर जाकर चार हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक मदद और बच्चे के लिए लैपटॉप देने का वादा किया। बता दें कि दोनों बच्चों की मां शिक्षामित्र थीं। कोरोना संक्रमित होने के बाद 9 मई को मां की मृत्यु हो गई। वहीं उनके पिता प्राइवेट नौकरी करते थे। 14 मई को पिता भी गुजर गए। अब दोनों बच्चों को गांव के नजदीकी रिश्तेदार पाल रहे हैं। डीएम प्रभु एन सिंह ने बच्चों की शिक्षा से लेकर खाने व चिकित्सा का जिम्मा उठाया है। उन्होंने एसडीएम बाह को बच्चों के संपर्क में रहने के आदेश दिए। इनके अलावा नगला कारे में दो बच्चे भी अनाथ हुए हैं। जिनका सत्यापन प्रशासनिक स्तर से जारी है।
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के नियम
- 0 से 18 साल के बच्चे आर्थिक मदद के लिए पात्र होंगे
- मार्च 2020 से मई 2021 के बीच माता-पिता की मृत्यु
- माता-पिता का संक्रमण एवं मृत्यु का प्रमाणपत्र जरूरी
- 0 से 10 वर्ष बच्चों को प्रति माह चार हजार रुपये मिलेंगे
- कक्षा 6 से 12 तक के निराश्रित बच्चों को शिक्षा मिलेगी
- 11 से 18 वर्ष बच्चों के लिए कक्षा 12 तक निशुल्क शिक्षा
- ऐसे मां-बाप की बेटियों के विवाह हेतु 1.01 लाख रुपये की मदद
- ऐसे बच्चों की चल-अचल संपत्ति के लिए डीएम संरक्षक हैं।
यहां करें सपंर्क
- अगर आप भी ऐसे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो 9454417661 सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार को सूचना दे सकते हैं। अमर उजाला भी ऐसे बच्चों की मदद के लिए तत्पर है।
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