{"_id":"59fd921e4f1c1bc1678b9218","slug":"cause-of-accident-on-yamuna-expressway-may-be-this","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर को डरावना बना रहीं इन 10 शहरों की गाड़ियां ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर को डरावना बना रहीं इन 10 शहरों की गाड़ियां
पुनीत शर्मा/अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 04 Nov 2017 03:40 PM IST
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यमुना एक्सप्रेसवे पर 10 बड़े शहरों की गाड़ियों से डर लगता है। इनकी रफ्तार 150 से 180 तक पहुंच जाती है जबकि एक्सप्रेसवे पर रफ्तार का मानक 100 किलोमीटर प्रतिघंटा का ही है। टोल प्लाजा से जो हर रोज ओवरस्पीड में चालान भेजे जा रहे हैं वह एनसीआर और उसके आसपास के शहरों के ज्यादा हैं।
नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर के यमुना एक्सप्रेसवे पर रफ्तार का मानक 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखा गया है। रफ्तार को चेक करने के लिए 30 स्पीड कैमरे भी लगे हुए हैं। जब भी कोई गाड़ी इस कैमरे के संपर्क में आती है तो उसकी स्पीड पता चल जाती है।
हर रोज ओवर स्पीड करने वाली गाड़ियों का डाटा भी टोल पर तैयार किया जाता है। जो रिपोर्ट आ रही है उसके मुताबिक दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, लखनऊ, चंडीगढ़, फरीदाबाद और राजस्थान के नंबरों वाली गाड़ियां सबसे ज्यादा ओवर स्पीड कर रही हैं। इन शहरों की गाड़ियों की रफ्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक रिकार्ड की गई है।
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नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर के यमुना एक्सप्रेसवे पर रफ्तार का मानक 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखा गया है। रफ्तार को चेक करने के लिए 30 स्पीड कैमरे भी लगे हुए हैं। जब भी कोई गाड़ी इस कैमरे के संपर्क में आती है तो उसकी स्पीड पता चल जाती है।
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हर रोज ओवर स्पीड करने वाली गाड़ियों का डाटा भी टोल पर तैयार किया जाता है। जो रिपोर्ट आ रही है उसके मुताबिक दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, लखनऊ, चंडीगढ़, फरीदाबाद और राजस्थान के नंबरों वाली गाड़ियां सबसे ज्यादा ओवर स्पीड कर रही हैं। इन शहरों की गाड़ियों की रफ्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक रिकार्ड की गई है।
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yamuna expressway
- फोटो : file photo
यमुना एक्सप्रेसवे पर कॉरीडोर इंचार्ज मेजर मनीष का कहना है कि हर रोज 150 गाड़ियों के चालान के लिए पुलिस और आरटीओ आफिस को रिपोर्ट भेजी जा रही है। यह सभी गाड़ियां ओवर स्पीड में होती हैं।
इन गाड़ियों में एनसीआर और बड़े शहरों की गाड़ियों की संख्या सबसे ज्यादा है। जो लोग एक्सप्रेसवे से गुजरते रहते हैं वह तो चालान से बचने के लिए कैमरों के पास गाड़ी को धीमा कर लेते हैं और बाद में फिर ओवर स्पीड करने लगते हैं। इस प्रकार के मामले भी हर रोज सामने आने लगे हैं।
इन गाड़ियों में एनसीआर और बड़े शहरों की गाड़ियों की संख्या सबसे ज्यादा है। जो लोग एक्सप्रेसवे से गुजरते रहते हैं वह तो चालान से बचने के लिए कैमरों के पास गाड़ी को धीमा कर लेते हैं और बाद में फिर ओवर स्पीड करने लगते हैं। इस प्रकार के मामले भी हर रोज सामने आने लगे हैं।
60 फीसदी हादसों की वजह चालक की झपकी
यमुना एक्सप्रेसवे
- फोटो : अमर उजाला
एक्सप्रेसवे के सफर के लिए थके हुए ड्राइवर सबसे ज्यादा खतरा बन रहे हैं। उनकी नींद पूरी होती नहीं और ड्राइविंग के दौरान उनकी नींद की झपकी लग जाती है। इससे हादसा हो जाता है। एक्सप्रेसवे के अफसरों का कहना है कि जो हादसे होते हैं उनमें ज्यादा तर की वजह यही आ रही है।
गाड़ी की रफ्तार तेज होती है और जरा सी झपकी भी गाड़ी को अनियंत्रित कर देती है। एक्सप्रेसवे पर ही नहीं हाईवे पर भी चालक को नींद आ जाने के कारण हादसे हो रहे हैं। गुरुवार को छाता में टेंपो खड़े ट्रक में घुस गया था। इस हादसे की वजह भी चालक को नींद आ जाना ही रहा। चालक दो दिन से बगैर सोए टेंपो चला रहा था।
गाड़ी की रफ्तार तेज होती है और जरा सी झपकी भी गाड़ी को अनियंत्रित कर देती है। एक्सप्रेसवे पर ही नहीं हाईवे पर भी चालक को नींद आ जाने के कारण हादसे हो रहे हैं। गुरुवार को छाता में टेंपो खड़े ट्रक में घुस गया था। इस हादसे की वजह भी चालक को नींद आ जाना ही रहा। चालक दो दिन से बगैर सोए टेंपो चला रहा था।