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आगरा: श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिंजय जैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज, लगाईं ये धाराएं 

Wed, 09 Jun 2021 12:26 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 09 Jun 2021 12:26 AM IST
सार

डॉ. आरके अग्निहोत्री की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में धारा 144 के उल्लंघन, महामारी अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम लगाया गया है। 

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Case Filed Against Dr. Arinjay Jain Director Of Shri Paras Hospital
पुलिस के बीच श्री पारस अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अरिंजय जैन, सफेद शर्ट में - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा केथाना  न्यू आगरा में श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ.. अरिंजय जैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में धारा 144 के उल्लंघन, महामारी अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम लगाया गया है। प्रशासन ने मुकदमे में कहा है कि आगरा में पर्याप्त ऑक्सीजन की उपलब्धता थी। संचालक के वायरल वीडियो से भ्रम की स्थिति बनी। 

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उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री की ओर से थाना न्यू आगरा में दर्ज कराए गए मुकदमे में कहा है कि सात जून को सोशल मीडिया के माध्यम से तथाकथित वीडियो वायरल हुआ। इसमें डॉ. अरिंजय जैन, संचालक, श्री पारस अस्पताल ऑक्सीजन की ओर से मोदीनगर, गाजियाबाद स्थित प्लांट पर भी आक्सीजन न होने और तथाकथित मॉक ड्रिल बात कही गई है, जबकि जिला प्रशासन, औषधि निरीक्षक की टीम, स्थानीय और शासन स्तर पर ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई गई थी।
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इसके बाद भी डॉ. अरिंजय जैन के तथाकथित बयान से जनमानस में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है, जबकि आगरा में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता थी। डॉ. अरिंजय जैन का यह कृत्य लोक शांति के निहित प्रावधानों के विपरीत है। इसलिए चिकित्सक के खिलाफ महामारी अधिनियम और सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। 

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इन धाराओं में लिखा गया मुकदमा 
-धारा 188 ः 
-धारा 505  ः 
-आपदा प्रबंधन अधिनियम ः 2005 की धारा 52 ः 
-आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005  की धारा 54 ः
-महामारी अधिनियम  की धारा तीन 

ऑक्सीजन मंगाई, फिर भी 20 मिनट बाद पिता की मौत के बारे में बताया 
श्री पारस अस्पताल के डाक्टर और कर्मचारियों के खिलाफ एक पीड़ित ने एसएसपी मुनिराज जी को प्रार्थना दिया। इसमें हत्या का मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की मांग की गई। पीड़ित के पिता और भाई की पत्नी की इलाज के दौरान मौत हुई थी। कृष्णा कॉलोनी, थाना छत्ता निवासी अशोक चावला ने एसएसपी को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उनके पिता वासदेव चावला को आठ अप्रैल को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इस पर उन्हें घर में ही आइसोलेट किया गया था। 12 अप्रैल को उनकी तबीयत खराब हो गई थी। इस पर उन्हें श्री पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज चल रहा था। 20 अप्रैल को स्टाफ ने बताया कि पिता को वेंटिलेटर लगाना होगा। इस पर वेंटिलेटर लगाने के लिए कह दिया। 

एसएसपी को दिया प्रार्थना पत्र, हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग 
इस दौरान डॉ. अरिंजय जैन पिता की तबीयत में सुधार होने की कहते रहे। आरोप है कि 26 अप्रैल को डाक्टर ने बुलाकर कहा कि ऑक्सीजन की कमी हो गई है। ऑक्सीजन का इंतजाम करना होगा। इस पर परिवार के लोगों ने ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध करा दिया। 20 मिनट बाद उनके पिता की मौत के बारे में बताया गया। 27 अप्रैल को अशोक चावला के छोटे भाई अमित चावला की पत्नी मनीषा की भी मृत्यु इसी अस्पताल में डाक्टर की लापरवाही की वजह से हो गई।

आरोप लगाया कि एक वीडियो में डाक्टर ने स्वीकार कर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया गया। पीड़ित ने डॉ. अरिंजय जैन और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। एसएसपी को प्रार्थना पत्र देने के दौरान सिंधी सेंट्रल पंचायत आगरा के पदाधिकारी हेमंत भोजवानी, चंद्रप्रकाश सोनी, सुशील नोतनानी, मेघराज दियालानी, सूर्य प्रकाश भी मौजूद रहे। उन्होंने कार्रवाई की मांग की। 

शिकायत पर दर्ज नहीं हुआ मुकदमा 
इटावा के अलियापुरा निवासी राजू सिंह यादव ने 17 मई को एसएसपी को डाक से शिकायत भेजी थी। इसमें लिखा कि उनके जीजा भरथना निवासी रिंकू उर्फ रजनीश यादव (30) को 15 अप्रैल को बुखार आया था। 19 अप्रैल को उन्हें श्री पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया। 26 अप्रैल को उनके खून की जांच को रुपये जमा कराए गए। दवा भी मंगाई। देर रात रिंकू यादव की मौत हो गई। उन्हें कोविड पॉजिटिव का प्रमाण पत्र दिया गया। राजू का आरोप है कि रिंकू यादव आक्सीजन सपोर्ट पर जिंदा थे। 26 अप्रैल को आक्सीजन की सप्लाई न करके उन्हें मार दिया गया। पुलिस से शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। बाद में शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

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