{"_id":"65b32018c75604731a013b74","slug":"captain-shubham-will-receive-army-medal-posthumously-unit-officers-informed-family-2024-01-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैप्टन शुभम को मिलेगा मरणोपरांत सेना मेडल: यूनिट के अधिकारियों ने परिजनों को दी जानकारी, शहरवासियों को गर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैप्टन शुभम को मिलेगा मरणोपरांत सेना मेडल: यूनिट के अधिकारियों ने परिजनों को दी जानकारी, शहरवासियों को गर्व
Fri, 26 Jan 2024 08:29 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 26 Jan 2024 08:29 AM IST
सार
आगरा के कैप्टन शुभम गुप्ता को मरणोपरांत सेना मेडल देने की घोषणा हुई है। कैप्टम शुभम गुप्ता पिछले साल 22 नवंबर को जम्मू कश्मीर के राजौरी में शहीद हो गए थे।
विज्ञापन
कैप्टन शुभम गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजोरी में बलिदान हुए 9 पैरा स्पेशल फोर्स के कमांडो कैप्टन शुभम गुप्ता को मरणोपरांत सेना मेडल मिलेगा। गणतंत्र दिवस के मौके पर यूनिट ने बहादुरों के नाम जारी किए हैं। इसमें अपने शुभम का नाम देखकर हर शहरवासी को गर्व हो रहा है।
प्रतीक एन्क्लेव निवासी बलिदानी के पिता डीजीसी अपराध बसंत गुप्ता ने बताया कि मेरे बहादुर बेटे पर सभी को गर्व है। वह 22 नवंबर को राजोरी में भारतीय नागरिकों को बचाने में शहीद हो गया। उसके पार्थिव शरीर के दर्शन करने के लिए दूरदराज के लोग जुटे थे। यूनिट के अधिकारियों ने फोन पर बेटे को सेना मेडल मिलने की जानकारी दी। बलिदानी के छोटे भाई ऋषभ गुप्ता ने बताया कि ये बात मां से साझा की तो वो मेरे गले लग फफकने लगीं। भाई का नाम लेकर पुकारने लगीं। जैसे-तैसे उनको संभाला है।
वीरता और असाधारण समर्पण के लिए मिलता है सेना मेडल
सेना मेडल सैनिकों की वीरता, कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण और साहस के ऐसे व्यक्तिगत कार्याें के लिए दिया जाता है, जो सेना के लिए विशेष महत्व रखते हैं। पुरस्कार मरणोपरांत भी दिया जाता है। ये सेना की सभी रैंक को दिया जाता है। सेना पदक की स्थापना देश के राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद 26 जनवरी 1960 को की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रतीक एन्क्लेव निवासी बलिदानी के पिता डीजीसी अपराध बसंत गुप्ता ने बताया कि मेरे बहादुर बेटे पर सभी को गर्व है। वह 22 नवंबर को राजोरी में भारतीय नागरिकों को बचाने में शहीद हो गया। उसके पार्थिव शरीर के दर्शन करने के लिए दूरदराज के लोग जुटे थे। यूनिट के अधिकारियों ने फोन पर बेटे को सेना मेडल मिलने की जानकारी दी। बलिदानी के छोटे भाई ऋषभ गुप्ता ने बताया कि ये बात मां से साझा की तो वो मेरे गले लग फफकने लगीं। भाई का नाम लेकर पुकारने लगीं। जैसे-तैसे उनको संभाला है।
विज्ञापन
वीरता और असाधारण समर्पण के लिए मिलता है सेना मेडल
सेना मेडल सैनिकों की वीरता, कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण और साहस के ऐसे व्यक्तिगत कार्याें के लिए दिया जाता है, जो सेना के लिए विशेष महत्व रखते हैं। पुरस्कार मरणोपरांत भी दिया जाता है। ये सेना की सभी रैंक को दिया जाता है। सेना पदक की स्थापना देश के राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद 26 जनवरी 1960 को की गई थी।
विज्ञापन