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विधानसभा में उठा मुद्दा, फिर भी नहीं खुला कैंसर यूनिट का ताला
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03एमएनपी-21-जिला अस्पताल स्थित कैंसर यूनिट
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। मैनपुरी में बंद पड़ी कैंसर यूनिट का मुद्दा विधानसभा में उठने के बाद भी कैंसर यूनिट का ताला नहीं खुल सका है। ऐसा तब है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में जिले में सर्वाधिक कैंसर के मरीज बताए गए हैं। कैंसर पीड़ितों को जांच से लेकर इलाज तक के लिए महानगरों की दौड़ लगानी पड़ती है।
जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या छह सौ के करीब है। सबसे ज्यादा पीड़ित मरीज मुंह के कैंसर के हैं। कैंसर पीड़ितों के उपचार के लिए जिला अस्पताल परिसर में 14 करोड़ रुपये खर्च करके कैंसर यूनिट की स्थापना की गई, लेकिन आज तक इस यूनिट का ताला नहीं खुला। खास बात तो यह रही कि स्थापना के 15 वर्ष बाद भी यूनिट स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित तक नहीं हो सकी। हाल ही में एमएलसी अरविंद प्रताप यादव ने नियम 115 के तहत मांग करते हुए विधान परिषद सदन में बंद पड़ी कैंसर यूनिट को शीघ्र चालू करने की मांग की है। उन्होंने सदन में जनपद में करोड़ों रुपये से निर्मित बंद पड़ी कैंसर यूनिट को जनहित में शीघ्र चालू कराए जाने मांग की।
वर्ष 2005 में हुई थी यूनिट की स्थापना
जिले में कैंसर के मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए वर्ष 2005 में कैंसर यूनिट के लिए सात करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। वर्ष 2010 में 6.50 करोड़ की लागत से यहां मशीनों की स्थापना कराई गई थी। 2015 में मशीनों को सही कराने के लिए एक करोड़ रुपये खर्च हुए लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। जिले में कैंसर यूनिट होने के बाद भी कैंसर पीड़ित मरीजों को दिल्ली व ग्वालियर में उपचार कराना पड़ रहा है।
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जून 2019 में कराया गया था सर्वे
मुख्यमंत्री के निर्देश पर 27 जून 2019 को जिले में पहुंची डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने यूनिट की जांच की थी। कार्यदायी संस्था सीमेंस के सीनियर मैनेजर डॉ. अशोक चौधरी, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फिरोजाबाद के आरएसओ डॉ. नसीम अहमद, लखनऊ से अभिषेक गहलोत आदि की टीम ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। टीम ने कई महत्वपूर्ण मशीनें खराब होने के साथ ही लगभग दो करोड़ का खर्च आने की बात कही थी।
ग्वालियर से करा रहे इलाज
शहर के मोहल्ला चौथियाना निवासी वीरेंद्र सिंह को तंबाकू खाने की वजह से करीब दस वर्ष पहले कैंसर हुआ। जानकारी समय से हो जाने पर उन्होंने ग्वालियर में इलाज लेना शुरू कर दिया। वर्तमान में उनका ग्वालियर से ही इलाज चल रहा है जनपद में उपचार की व्यवस्था होती तो इतनी दिक्कत नहीं उठानी पड़ती।
12 साल से कैंसर से जूझ रहे बबलू
पंजाबी कॉलोनी निवासी बबलू गुप्ता पेशे से दुकानदार हैं। करीब 12 साल पहले उन्हें मुंह का कैंसर हो गया। जानकारी हुई तो इलाज लेना शुरू किया। डॉक्टरों ने उनकी जिंदगी बचा ली। इनका कहना है कि जिले में कैंसर यूनिट चालू होनी चाहिए। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा।
जिले में मिलता उपचार तो नहीं बंद होती दुकान
छपट्टी मोहल्ला निवासी धथनपाला सिंह को 2005 में कैंसर हो गया। आगरा, ग्वालियर और दिल्ली में इलाज कराकर लाखों रुपये खर्च किया। पेशे से दुकानदार थे, इसलिए बीमार होने से आमदनी भी बंद हो गई। उनका कहना है कि जिले में यदि उपचार की व्यवस्था होती तो कम पैसों में ही अच्छा उपचार हो जाता और उनकी दुकान भी बंद नहीं होती।
बोले जिम्मेदार
कैंसर यूनिट को चालू कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। विधान परिषद में आवाज उठाई गई है। याचिका समिति में इस संदर्भ को दर्ज कर लिया है। सत्र सात मार्च के बजाय 28 फरवरी को बंद होने के कारण अब अगले सत्र में इस समस्या पर सरकार जवाब देगी। कैंसर यूनिट के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
अरविंद प्रताप सिंह, सदस्य विधान परिषद
दिसंबर में कार्यदायी संस्था की रिपोर्ट के बाद शासन को पत्र भेज दिया गया था। तब से आज तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं। जैसे निर्देश मिलेंगे उनका पालन किया जाएगा
डॉ. आरके सागर, सीएमएस
कैंसर यूनिट को चालू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री के निर्देश पर सर्वे भी कराया गया है। मशीनों में कुछ तकनीकी खामी है। जल्द ही समस्या का हल निकालकर कैंसर यूनिट को चालू किया जाएगा।
प्रदीप चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष।
हाईलाइर्ट्स
2005 में कैंसर यूनिट के लिए धनराशि हुई थी स्वीकृति
07 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य कराया गया
2008 में कैंसर यूनिट का निर्माण कार्य हुआ पूरा
2010 में 6.5 करोड़ से लगाई गई थीं मशीनें
40 लाख का बिजली बिल जनवरी 2019 में किया गया भुगतान
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जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या छह सौ के करीब है। सबसे ज्यादा पीड़ित मरीज मुंह के कैंसर के हैं। कैंसर पीड़ितों के उपचार के लिए जिला अस्पताल परिसर में 14 करोड़ रुपये खर्च करके कैंसर यूनिट की स्थापना की गई, लेकिन आज तक इस यूनिट का ताला नहीं खुला। खास बात तो यह रही कि स्थापना के 15 वर्ष बाद भी यूनिट स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित तक नहीं हो सकी। हाल ही में एमएलसी अरविंद प्रताप यादव ने नियम 115 के तहत मांग करते हुए विधान परिषद सदन में बंद पड़ी कैंसर यूनिट को शीघ्र चालू करने की मांग की है। उन्होंने सदन में जनपद में करोड़ों रुपये से निर्मित बंद पड़ी कैंसर यूनिट को जनहित में शीघ्र चालू कराए जाने मांग की।
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वर्ष 2005 में हुई थी यूनिट की स्थापना
जिले में कैंसर के मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए वर्ष 2005 में कैंसर यूनिट के लिए सात करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। वर्ष 2010 में 6.50 करोड़ की लागत से यहां मशीनों की स्थापना कराई गई थी। 2015 में मशीनों को सही कराने के लिए एक करोड़ रुपये खर्च हुए लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। जिले में कैंसर यूनिट होने के बाद भी कैंसर पीड़ित मरीजों को दिल्ली व ग्वालियर में उपचार कराना पड़ रहा है।
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जून 2019 में कराया गया था सर्वे
मुख्यमंत्री के निर्देश पर 27 जून 2019 को जिले में पहुंची डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने यूनिट की जांच की थी। कार्यदायी संस्था सीमेंस के सीनियर मैनेजर डॉ. अशोक चौधरी, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फिरोजाबाद के आरएसओ डॉ. नसीम अहमद, लखनऊ से अभिषेक गहलोत आदि की टीम ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। टीम ने कई महत्वपूर्ण मशीनें खराब होने के साथ ही लगभग दो करोड़ का खर्च आने की बात कही थी।
ग्वालियर से करा रहे इलाज
शहर के मोहल्ला चौथियाना निवासी वीरेंद्र सिंह को तंबाकू खाने की वजह से करीब दस वर्ष पहले कैंसर हुआ। जानकारी समय से हो जाने पर उन्होंने ग्वालियर में इलाज लेना शुरू कर दिया। वर्तमान में उनका ग्वालियर से ही इलाज चल रहा है जनपद में उपचार की व्यवस्था होती तो इतनी दिक्कत नहीं उठानी पड़ती।
12 साल से कैंसर से जूझ रहे बबलू
पंजाबी कॉलोनी निवासी बबलू गुप्ता पेशे से दुकानदार हैं। करीब 12 साल पहले उन्हें मुंह का कैंसर हो गया। जानकारी हुई तो इलाज लेना शुरू किया। डॉक्टरों ने उनकी जिंदगी बचा ली। इनका कहना है कि जिले में कैंसर यूनिट चालू होनी चाहिए। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा।
जिले में मिलता उपचार तो नहीं बंद होती दुकान
छपट्टी मोहल्ला निवासी धथनपाला सिंह को 2005 में कैंसर हो गया। आगरा, ग्वालियर और दिल्ली में इलाज कराकर लाखों रुपये खर्च किया। पेशे से दुकानदार थे, इसलिए बीमार होने से आमदनी भी बंद हो गई। उनका कहना है कि जिले में यदि उपचार की व्यवस्था होती तो कम पैसों में ही अच्छा उपचार हो जाता और उनकी दुकान भी बंद नहीं होती।
बोले जिम्मेदार
कैंसर यूनिट को चालू कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। विधान परिषद में आवाज उठाई गई है। याचिका समिति में इस संदर्भ को दर्ज कर लिया है। सत्र सात मार्च के बजाय 28 फरवरी को बंद होने के कारण अब अगले सत्र में इस समस्या पर सरकार जवाब देगी। कैंसर यूनिट के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
अरविंद प्रताप सिंह, सदस्य विधान परिषद
दिसंबर में कार्यदायी संस्था की रिपोर्ट के बाद शासन को पत्र भेज दिया गया था। तब से आज तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं। जैसे निर्देश मिलेंगे उनका पालन किया जाएगा
डॉ. आरके सागर, सीएमएस
कैंसर यूनिट को चालू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री के निर्देश पर सर्वे भी कराया गया है। मशीनों में कुछ तकनीकी खामी है। जल्द ही समस्या का हल निकालकर कैंसर यूनिट को चालू किया जाएगा।
प्रदीप चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष।
हाईलाइर्ट्स
2005 में कैंसर यूनिट के लिए धनराशि हुई थी स्वीकृति
07 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य कराया गया
2008 में कैंसर यूनिट का निर्माण कार्य हुआ पूरा
2010 में 6.5 करोड़ से लगाई गई थीं मशीनें
40 लाख का बिजली बिल जनवरी 2019 में किया गया भुगतान