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Agra: दुकान से एडीए की सील हटवाने का झांसा, शातिर ने खुद को बताया एसडीएम का स्टेनो; कारोबारी से हड़प ली रकम
Sat, 04 Jul 2026 08:56 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sat, 04 Jul 2026 08:56 PM IST
सार
शातिर ने खुद को एडीएम का स्टेनो बताते हुए कहा कि 15 दिन में सील हटवाने का दावा किया। कारोबारी से 1.50 लाख रुपये मांगे। कारोबारी ने बातचीत संदिग्ध लगने पर पूरी मुलाकात की हिडन कैमरे से वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली।
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
खुद को पुलिस लाइन का ठेकेदार बताकर ठग ने कारोबारी को जाल में फंसाया। एडीए की लगी सील खुलवाने के नाम पर 1.19 लाख रुपये ठग लिए। भरोसे में लेने के लिए अपने साथियों को अधिकारी बनाकर मिलवाया। पीड़ित ने वीडियो और कॉल रिकार्डिंग के साथ पुलिस आयुक्त दीपक कुमार से शिकायत की। इसके बाद सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
राजपुर चुंगी, शमसाबाद रोड निवासी शिवांजल उपाध्याय ने बताया कि शहीद नगर स्थित उनकी दो दुकानें आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने नक्शा संबंधी अभाव के कारण सील कर दी थीं। कुछ दिन बाद छीपीटोला निवासी आर्यन उनसे मिला और खुद को आगरा पुलिस लाइन का ठेकेदार बताते हुए कहा कि उसके एडीए अधिकारियों से अच्छे संबंध हैं। वह दुकानों की सील हटवा देगा। आर्यन ने प्रतापपुरा के एक होटल में उनकी मुलाकात राजा नामक व्यक्ति से कराई। राजा ने खुद को एडीएम का स्टेनो बताते हुए कहा कि 15 दिन में सील हट जाएगी।
इसके लिए 1.50 लाख रुपये देने होंगे। बातचीत संदिग्ध लगने पर उन्होंने पूरी मुलाकात की हिडन कैमरे से वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। आर्यन के भरोसा दिलाने पर राजा को 50 हजार रुपये नकद दे दिए। बाद में आर्यन ने ज्ञानेश नामक व्यक्ति का नंबर देकर उसके खाते में यूपीआई के माध्यम से 9 हजार, 13 हजार, 2 हजार और 5 हजार रुपये ट्रांसफर कराए। इसके अलावा आर्यन ने 40 हजार रुपये नकद भी लिए। कुछ दिन बाद राजा मिला।
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पूछने पर उसने बताया कि वह एडीएम का स्टेनो नहीं है और आर्यन के कहने पर झूठ बोल रहा था, जिस व्यक्ति को मंडलायुक्त का पीआरओ बताया ,उसने स्वयं को आवास विकास का अधिवक्ता होने की जानकारी दी। रुपये वापस मांगने पर आर्यन ने पुलिस कमिश्नर तक पहुंच होने की धमकी दी। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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राजपुर चुंगी, शमसाबाद रोड निवासी शिवांजल उपाध्याय ने बताया कि शहीद नगर स्थित उनकी दो दुकानें आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने नक्शा संबंधी अभाव के कारण सील कर दी थीं। कुछ दिन बाद छीपीटोला निवासी आर्यन उनसे मिला और खुद को आगरा पुलिस लाइन का ठेकेदार बताते हुए कहा कि उसके एडीए अधिकारियों से अच्छे संबंध हैं। वह दुकानों की सील हटवा देगा। आर्यन ने प्रतापपुरा के एक होटल में उनकी मुलाकात राजा नामक व्यक्ति से कराई। राजा ने खुद को एडीएम का स्टेनो बताते हुए कहा कि 15 दिन में सील हट जाएगी।
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इसके लिए 1.50 लाख रुपये देने होंगे। बातचीत संदिग्ध लगने पर उन्होंने पूरी मुलाकात की हिडन कैमरे से वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। आर्यन के भरोसा दिलाने पर राजा को 50 हजार रुपये नकद दे दिए। बाद में आर्यन ने ज्ञानेश नामक व्यक्ति का नंबर देकर उसके खाते में यूपीआई के माध्यम से 9 हजार, 13 हजार, 2 हजार और 5 हजार रुपये ट्रांसफर कराए। इसके अलावा आर्यन ने 40 हजार रुपये नकद भी लिए। कुछ दिन बाद राजा मिला।
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पूछने पर उसने बताया कि वह एडीएम का स्टेनो नहीं है और आर्यन के कहने पर झूठ बोल रहा था, जिस व्यक्ति को मंडलायुक्त का पीआरओ बताया ,उसने स्वयं को आवास विकास का अधिवक्ता होने की जानकारी दी। रुपये वापस मांगने पर आर्यन ने पुलिस कमिश्नर तक पहुंच होने की धमकी दी। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।