अमर उजाला विशेष: ताजनगरी में भूमाफियाओं पर नहीं गरजता प्रशासन का बुलडोजर, जानें क्या है वजह
भूमाफिया चिह्नित करने के लिए तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित हैं, लेकिन छह तहसीलों में बाह, एत्मादपुर, फतेहाबाद, खेरागढ़ तहसील ने एक भी भूमाफिया चिह्नित नहीं किया।
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विस्तार
ताजनगरी में भूमाफियाओं पर प्रशासन का बुलडोजर नहीं गरजता। कार्रवाई तो दूर एसडीएम की टास्क फोर्स ने जो चिह्नित किए, वो डीएम की टास्क फोर्स ने घोषित तक नहीं किए। पिछले चार साल में एंटी भूमाफिया पोर्टल पर अवैध कब्जों की 3123 शिकायतें आईं हैं, जबकि जिले में महज 44 भूमाफिया घोषित हो सके हैं। छह एसडीएम की टास्क फोर्स में सिर्फ दो तहसीलों ने 86 भूमाफिया चिह्नित किए हैं। इनमें 42 जिला स्तर पर घोषित ही नहीं हो सके हैं।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने पहली बार सूबे की कमान संभालते ही निजी व सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे व कूटरचित दस्तावेजों से खरीद-फरोख्त कर अकूत संपत्तियां इकठ्ठा करने वालों को भूमाफिया घोषित करने के आदेश दिए थे। पांच साल बाद भी नतीजा सिफर है। भूमाफिया चिह्नित करने के लिए तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित हैं, लेकिन छह तहसीलों में बाह, एत्मादपुर, फतेहाबाद, खेरागढ़ तहसील ने एक भी भूमाफिया चिह्नित नहीं किया। सदर और किरावली तहसील ने पांच साल में 86 भूमाफिया चिह्नित किए हैं। जिनके कब्जे में 127 हेक्टेयर भूमि है। सर्किल रेट के अनुसार भूमि की कीमत 155 करोड़ रुपये है। इन 86 भूमाफिया के विरुद्ध विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज है। आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं, लेकिन डीएम की टास्क फोर्स ने 86 में 44 भूमाफिया ही घोषित किए हैं।
44 घोषित भूमाफिया द्वारा कब्जाई भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। रोक लगाकर प्रशासन ने कार्रवाई की इतिश्री कर दी। न उनके कब्जे से जमीन मुक्त कराई, न उनकी संपत्तियां जब्त की गई। ये हाल तब है जब बीती 3 जुलाई को पंचायत राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह को बड़े भूमाफिया की संपत्ति जब्त करने के आदेश दिए थे। 20 दिन बाद भी मंत्री के आदेश यहां बेअसर साबित हो रहे हैं।
दलील: मुकदमे से करेंगे बेदखल
विस्तृत जानकारी व रिपोर्ट के अभाव में सभी चिह्नित भूमाफिया, जिला स्तर पर घोषित नहीं हो सके हैं। उनकी दोबारा रिपोर्ट मांगी है। जो घोषित हैं, वो अपनी संपत्तियां नहीं बेच सकते। संपत्ति जब्त नहीं होती। कोई प्रावधान नहीं है। कब्जे की भूमि को मुक्त कराने के लिए उनके विरुद्ध बेदखली के मुकदमे विचाराधीन हैं।
अजय कुमार सिंह, एडीएम प्रशासन एवं प्रभारी एंटी भूमाफिया सेल
फैक्ट फाइल...
- 3125 शिकायतें दर्ज हुई एंटी भूमाफिया पोर्टल पर
- 86 भूमाफिया चिह्नित किए दो तहसीलों की टास्क फोर्स ने
- 44 भूमाफिया घोषित हुए जिला स्तरीय टास्क फोर्स द्वारा
- 42 चिह्नित भूमाफिया की दोबारा जांच तक नहीं हो सकी
- 155 करोड़ रुपये की भूमि कब्जाई जिले में भूमाफिया ने
- 127 हेक्टेयर निजी व सरकारी भूमि पर भूमाफिया का कब्जा
35 थानों में एक भी भूमाफिया नहीं घोषित
जिले में 42 पुलिस थाने हैं। इनमें से 35 थाना क्षेत्रों में एक भी भूमाफिया घोषित नहीं हुआ है। यानी इन थाना क्षेत्रों में न किसी भूमि पर कब्जा हुआ, न कोई चिह्नित हो सका। जिले में महज 7 थाना क्षेत्रों में भूमाफिया राज है। इन सात थानों में 44 भूमाफिया घोषित हैं।
यहां घोषित हैं भूमाफिया
- पुलिस थाना एत्माउद्दौला: 12
- पुलिस थाना सिकंदरा: 11
- पुलिस थाना जगदीशपुरा: 10
- पुलिस थाना हरीपर्वत: 4
- पुलिस थाना ताजगंज: 3
- पुलिस थाना छत्ता: 3
- थाना सदर बाजार: 1
आगरा के टॉप-10 भूमाफिया
- गूड्डू चाहर उर्फ जोगेंद्र चाहर पुत्र बाबूलाल निवासी बाग फरजाना।
- संजय चाहर पुत्र बाबूलाल निवासी बाग फरजाना।
- सुरेश चाहर पुत्र बाबूलाल निवासी बाग फरजाना।
- राजेंद्र प्रसाद जैन उर्फ रज्जो पुत्र चिम्मनलाल जैन निवासी बेलनगंज।
- हेमेंद्र अग्रवाल उर्फ चुनमुन पुत्र देवेंद्रनाथ अग्रवाल निवासी जीवनी मंडी।
- कंवलदीप सिंह पुत्र त्रिलोचन निवासी संजय प्लेस।
- कपूरा पुत्र टीका निवासी नौफरी, ताजगंज।
- रवि बंसल पुत्र गोविंद प्रसाद निवासी केदार नगर
- शैलेंद्र अग्रवाल पुत्र ओमप्रकाश निवासी निर्भय नगर
- जितेंद्र सिंह उर्फ चीकू पुत्र विक्रम सिंह निवासी सींगना