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बुद्ध पूर्णिमा पर सोरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, गंगा में लगाई आस्था की डुबकी
Sat, 18 May 2019 06:48 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 18 May 2019 06:48 PM IST
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हरिपदी गंगा में स्नान करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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बुद्ध पूर्णिमा पर शनिवार को कासगंज के सोरों में गंगा घाटों पर पावन स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा और हरिपदी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद जरूरतमंदों को दान कर पुण्यलाभ कमाया।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने और गरीबों को दान करने से पुण्य प्राप्त होता है। इसी श्रद्धा के साथ हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए सोरों पहुंचे। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुख्ता इंतजाम किए गए।
शनिवार को बैसाख पूर्णिमा के साथ ही बुद्ध पूर्णिमा मनाई गई। ज्योतिष के अनुसार इस साल बुद्ध पूर्णिमा और भी मंगलकारी है, क्योंकि बुद्ध पूर्णिमा पर 502 साल बाद दुर्लभ योग बन रहा है। इस अवसर पर ब्रज में जगह जगह कार्यक्रमों को आयोजन किया गया।
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने और गरीबों को दान करने से पुण्य प्राप्त होता है। इसी श्रद्धा के साथ हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए सोरों पहुंचे। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुख्ता इंतजाम किए गए।
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शनिवार को बैसाख पूर्णिमा के साथ ही बुद्ध पूर्णिमा मनाई गई। ज्योतिष के अनुसार इस साल बुद्ध पूर्णिमा और भी मंगलकारी है, क्योंकि बुद्ध पूर्णिमा पर 502 साल बाद दुर्लभ योग बन रहा है। इस अवसर पर ब्रज में जगह जगह कार्यक्रमों को आयोजन किया गया।
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बटेश्वर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
आगरा के बटेश्वर में शिव मंदिर शृंखला के घाट पर यमुना नदी में स्नान के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ा। ज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर ने बताया कि इस साल बुद्ध पूर्णिमा पर मंगल-राहु मिथुन राशि में रहेंगे और उनके ठीक सामने शनि-केतु धनु राशि में स्थित हैं।
इस बार बुध पूर्णिमा पर दुर्लभ योग है। सूर्य और गुरु भी एक-दूसरे पर दृष्टि रखेंगे। बुद्ध पूर्णिमा पर ऐसा दुर्लभ योग 502 साल पहले 16 मई 1517 में बना था। उस समय भी मंगल-राहु की युति मिथुन राशि में थी और शनि-केतु की युति धनु राशि में थी।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि देवगुरु वृहस्पति और नवग्रहों के राजा सूर्यदेव के आमने-सामने होने के समय को समसप्तक राजयोग कहते हैं। इस बार यह राजयोग बुद्ध पूर्णिमा के दिन बन रहा है, जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस योग में जो भी व्यक्ति शुभ कार्य की शुरुआत करता है, उसे इसमें सफलता मिलती ही है।
इस बार बुध पूर्णिमा पर दुर्लभ योग है। सूर्य और गुरु भी एक-दूसरे पर दृष्टि रखेंगे। बुद्ध पूर्णिमा पर ऐसा दुर्लभ योग 502 साल पहले 16 मई 1517 में बना था। उस समय भी मंगल-राहु की युति मिथुन राशि में थी और शनि-केतु की युति धनु राशि में थी।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि देवगुरु वृहस्पति और नवग्रहों के राजा सूर्यदेव के आमने-सामने होने के समय को समसप्तक राजयोग कहते हैं। इस बार यह राजयोग बुद्ध पूर्णिमा के दिन बन रहा है, जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस योग में जो भी व्यक्ति शुभ कार्य की शुरुआत करता है, उसे इसमें सफलता मिलती ही है।