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निकाय चुनावः आगरा में वापसी नहीं, बसपा को हुआ है इतना बड़ा नुकसान
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 02 Dec 2017 05:34 PM IST
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बसपा
- फोटो : amar ujala
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लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से हारी बसपा के लिए स्थानीय निकाय चुनाव निराशाजनक साबित हुए। मेयर चुनाव में पहली बार सिंबल पर उतरी बसपा के प्रत्याशी दिगंबर सिंह धाकरे ने पिछले चुनाव से वोट तो ज्यादा प्राप्त किए, लेकिन उनकी हार का अंतर बीते चुनाव से करीब छह गुना बढ़ गया। अब तक के चुनाव में बसपा का हार का अंतर नौ से 17 हजार के बीच रहा था।
1995 से लेकर अब तक के पांचों नगर निकाय चुनाव में बसपा और भाजपा के बीच ही मुकाबला रहा है। मेयर भाजपा के चुने गए, लेकिन मुख्य प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी ही रहे। इस बार भी मुकाबला भाजपा के नवीन जैन और बसपा के दिगंबर सिंह धाकरे के बीच रहा, लेकिन हार का अंतर 74 हजार पहुंच गया।
बीते चुनाव में बसपा समर्थित 38 पार्षद चुनकर आए थे, लेकिन इस बार इसका आंकड़ा 27 ही रहा, जबकि पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव चिन्ह पर लड़े। नगर पंचायतों में सात में से केवल एक पर बसपा अपना अध्यक्ष बना सकी, जबकि बसपा के छह विधायक पूर्व में जिले में रहे हैं। इसी तरह नगर पालिका परिषद में भी बसपा साफ हो गई। केवल एत्मादपुर में बसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रह पाया।
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1995 से लेकर अब तक के पांचों नगर निकाय चुनाव में बसपा और भाजपा के बीच ही मुकाबला रहा है। मेयर भाजपा के चुने गए, लेकिन मुख्य प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी ही रहे। इस बार भी मुकाबला भाजपा के नवीन जैन और बसपा के दिगंबर सिंह धाकरे के बीच रहा, लेकिन हार का अंतर 74 हजार पहुंच गया।
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बीते चुनाव में बसपा समर्थित 38 पार्षद चुनकर आए थे, लेकिन इस बार इसका आंकड़ा 27 ही रहा, जबकि पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव चिन्ह पर लड़े। नगर पंचायतों में सात में से केवल एक पर बसपा अपना अध्यक्ष बना सकी, जबकि बसपा के छह विधायक पूर्व में जिले में रहे हैं। इसी तरह नगर पालिका परिषद में भी बसपा साफ हो गई। केवल एत्मादपुर में बसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रह पाया।
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दलित वोट बैंक में लगी सेंध
AAP AND BSP
लोकसभा चुनाव से छिटके बसपा के दलित वोट बैंक में इस चुनाव में भी सेंध लगी। दलित बाहुल्य दर्जनों इलाकों में भाजपा के पार्षद चुनकर आए। वहीं कई जगह निर्दलीय ही चुने, जबकि बसपा प्रत्याशी दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे। इसी तरह मुस्लिम वोट बैंक ने बसपा प्रत्याशी की जगह निर्दलीय बशीर का हवाई जहाज उड़ाया।
हालांकि बसपा के आगरा- अलीगढ़ मंडल जोन कोआर्डिनेटर सुनील कुमार चित्तौड़ ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद से मायूस कार्यकर्ताओं का मनोबल चुनाव परिणामों से बढ़ा है। पार्टी का बेस वोट बैंक मजबूत हुआ है। 27 पार्षद जीते हैं और मेयर चुनाव में कड़ी टक्कर दी है।
बशीर को जो वोट मिले, उससे सपा को नुकसान हुआ है। बसपा को अपेक्षित वोट नहीं मिल सके। इसके कारण ढूंढे जा रहे हैं। जिन नेताओं ने, कार्यकर्ताओं ने पार्टी के खिलाफ काम किया है, उनकी जांच हो रही है। उन पर जल्द ही अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। ऐसे लोग पार्टी से बाहर किए जाएंगे।
हालांकि बसपा के आगरा- अलीगढ़ मंडल जोन कोआर्डिनेटर सुनील कुमार चित्तौड़ ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद से मायूस कार्यकर्ताओं का मनोबल चुनाव परिणामों से बढ़ा है। पार्टी का बेस वोट बैंक मजबूत हुआ है। 27 पार्षद जीते हैं और मेयर चुनाव में कड़ी टक्कर दी है।
बशीर को जो वोट मिले, उससे सपा को नुकसान हुआ है। बसपा को अपेक्षित वोट नहीं मिल सके। इसके कारण ढूंढे जा रहे हैं। जिन नेताओं ने, कार्यकर्ताओं ने पार्टी के खिलाफ काम किया है, उनकी जांच हो रही है। उन पर जल्द ही अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। ऐसे लोग पार्टी से बाहर किए जाएंगे।