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चाचा को फोन कर कहा- परिवार का ख्याल रखना, 20 मई को आऊंगा, आई शहादत की खबर

Wed, 16 May 2018 09:06 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Wed, 16 May 2018 09:06 AM IST
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BSF jawan devendra singh baghel martyr in ceasefire violation
शहीद का पार्थिव शरीर उतारते बीएसएफ जवान - फोटो : अमर उजाला
आगरा के रहने वाले बीएसएफ जवान देवेंद्र सिंह बघेल देश की हिफाजत करते हुए कुर्बान हो गए। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने चाचा को घर आने की सूचना दी थी, लेकिन उससे पहले उनके शहीद होने की खबर आ गई।  
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चाचा, घर का ख्याल रखना, चार-पांच दिन की बात है, मेरी छुट्टी मंजूर हो गई है, 19 मई का ट्रेन का रिजर्वेशन है, एक महीना घर पर रहूंगा, 20 जून की वापसी है। देवेंद्र ने चाचा महाराज सिंह से फोन पर यही बात की थी। 
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परिवार को 19 मई का इंतजार था, सब सोच रहे थे कि बेटा घर आएगा, लेकिन वो नहीं आया। उसके शहीद होने की खबर आई। यह सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। 

BSF jawan devendra singh baghel martyr in ceasefire violation
शहीद देवेंद्र सिंह बघेल- फाइल फोटो
चाचा महाराज सिंह के कानों में भतीजे के शब्द गूंज रहे हैं। बार-बार याद आ रहा है कि उसने छुट्टी पर घर आने की बात कही थी। याद करते हैं, आंखें भर आती हैं। 

देवेंद्र ने भाई देवी सिंह को भी फोन पर बताया था कि जल्द ही छुट्टी पर आने वाला है। पत्नी पिंकी भी काफी खुश थी। बेटे धीरज का दूसरा जन्मदिन 25 मई को है। 

बेटे के जन्मदिन को धूमधाम से मनाने की तैयारी थी। क्या पता था कि खुशियों से पहले गम चला आएगा। मासूम बच्चे भी समझ नहीं पा रहे कि आखिर हुआ क्या है।

BSF jawan devendra singh baghel martyr in ceasefire violation
देवेंद्र सिंह बघेल के दोनों मासूम बच्चे - फोटो : अमर उजाला
देवेंद्र के भाई देवी सिंह की आंखों में नमी है लेकिन खुद को किसी तरह संभाले हुए हैं। परिजनों को संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि भाई की शहादत पर उन्हें गर्व है।

देवेंद्र पांच भाई-बहन में चौथे नंबर के थे। उनसे बड़ी दो बहनें हैं और एक भाई। पिता नारायण सिंह को फालिज की बीमारी ने घेर लिया है, चल फिर नहीं पाते हैं। लखनपुर में उनका बहुत छोटा सा घर है। 
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