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अब प्लेटलेटस, प्लाजमा के लिए नहीं जाना पड़ेगा बाहरी जनपद
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कासगंज। शासन ने जिला को कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की सौगात दी है। विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस यूनिट के बनने के जिले में ही रक्त को चार भागों में बांटा जा सकेगा। अमर उजाला की 25 सितंबर को प्रकाशित की गई खबर के बाद इस यूनिट पर काम शुरू हो गया है। अस्पताल से इस यूनिट की डिमांड शासन को भेजी गई थी।
जिला अस्पताल में अभी तक ब्लड बैंक की ही सुविधा थी। इसमें ब्लड बैंक में जमा होने वाल रक्त की एक यूनिट एक ही व्यक्ति के काम आ सकती थी। ब्लड के कंपोनेंट को अलग करने के लिए किसी प्रकार के इंतजाम न होने से प्लेटलेटस, प्लाज्मा, पीआरबीसी, व क्रॉयोप्रेसीपिटेट यूनिट की अलग से व्यवस्था न होने से ऐसे मरीजों को बाहरी जनपदों तक दौड़ लगानी पड़ रही थी। सरकार ने इस यूनिट से वंचित प्रदेश के सभी 47 जिलों में यूनिट तैयार करने के निर्देश के साथ ही निमार्णदीय संस्था को बजट भी अवमुक्त कर दिया है। इसके बाद जिला अस्पताल में इस यूनिट के निर्माण की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि एक माह के भीतर यह यूनिट अपना काम शुरू कर देगी। इसके बाद मरीज को ब्लड के जिस कंपोनेंट की आवश्यकता होगी वह उसका उपलब्ध हो सकेगा। ऐसे में मरीजों को प्लेटलेटस, प्लाज्मा, पीआरबीसी व क्रॉयोप्रेसीपिटेट के लिए बाहरी जनपदों की दौड़ नहीं लगानी होगी। ब्लड के एक यूनिट से चार मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
कंपोनेंट की इन रोगियों को होती है जरूरत
सामान्य खून की कमी वाले मरीजों को पीआरबीसी, जलने के कारण गंभीर हुए मरीजों व कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत होती है। जबकि डेेंगू व अन्य संक्रमण वाले मरीज को प्लेटनेट्स चढ़ाकर बचाया जा सकता है। वहीं क्रायोप्रेसीपिटेट का उपयोग हेमोफिलिया ए या वॉन विलेब्रांड रोग के कारण रक्तस्राव के इलाज के लिए किया जाता है।
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- शासन से जिला को कंपोनेट यूनिट की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए अस्पताल पर कार्य शुरू हो गया है। ब्लड बैंक के समीप ही इस यूनिट को स्थापित किया जाएगा। एक माह में यह यूनिट चालू हो जाएगी। डा. एसपी सिंह सिद्घू, सीएमएस
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जिला अस्पताल में अभी तक ब्लड बैंक की ही सुविधा थी। इसमें ब्लड बैंक में जमा होने वाल रक्त की एक यूनिट एक ही व्यक्ति के काम आ सकती थी। ब्लड के कंपोनेंट को अलग करने के लिए किसी प्रकार के इंतजाम न होने से प्लेटलेटस, प्लाज्मा, पीआरबीसी, व क्रॉयोप्रेसीपिटेट यूनिट की अलग से व्यवस्था न होने से ऐसे मरीजों को बाहरी जनपदों तक दौड़ लगानी पड़ रही थी। सरकार ने इस यूनिट से वंचित प्रदेश के सभी 47 जिलों में यूनिट तैयार करने के निर्देश के साथ ही निमार्णदीय संस्था को बजट भी अवमुक्त कर दिया है। इसके बाद जिला अस्पताल में इस यूनिट के निर्माण की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि एक माह के भीतर यह यूनिट अपना काम शुरू कर देगी। इसके बाद मरीज को ब्लड के जिस कंपोनेंट की आवश्यकता होगी वह उसका उपलब्ध हो सकेगा। ऐसे में मरीजों को प्लेटलेटस, प्लाज्मा, पीआरबीसी व क्रॉयोप्रेसीपिटेट के लिए बाहरी जनपदों की दौड़ नहीं लगानी होगी। ब्लड के एक यूनिट से चार मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
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कंपोनेंट की इन रोगियों को होती है जरूरत
सामान्य खून की कमी वाले मरीजों को पीआरबीसी, जलने के कारण गंभीर हुए मरीजों व कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत होती है। जबकि डेेंगू व अन्य संक्रमण वाले मरीज को प्लेटनेट्स चढ़ाकर बचाया जा सकता है। वहीं क्रायोप्रेसीपिटेट का उपयोग हेमोफिलिया ए या वॉन विलेब्रांड रोग के कारण रक्तस्राव के इलाज के लिए किया जाता है।
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- शासन से जिला को कंपोनेट यूनिट की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए अस्पताल पर कार्य शुरू हो गया है। ब्लड बैंक के समीप ही इस यूनिट को स्थापित किया जाएगा। एक माह में यह यूनिट चालू हो जाएगी। डा. एसपी सिंह सिद्घू, सीएमएस