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ब्लैक फंगस: खाली वर्ड के सहारे होगा मरीजों का इलाज
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कासगंज। जिले की ब्लैक फंगस संक्रमित महिला की दिल्ली में इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। इसके बाद भी इस बीमारी से निपटने केे लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं हैं। जिला में न तो नेत्र चिकित्सक ही मौजूद हैं और न ही अभी तक दवा के ही कोई इंतजाम हो सका है। ऐसे में यदि यह बीमारी मरीजों में फैली तो उनको इलाज भी नहीं मिल सकेगा।
ब्लैक फंगस के खतरे को देखते हुए विभाग ने जिला अस्पताल में एक वार्ड तो बना दिया है लेकिन इस वार्ड के बनने का कोई लाभ इस बीमारी से पीड़ित होने वाले मरीजों को नहीं मिल सकेगा। इस बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं हैं। जिले में एक भी नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं। सरकारी अस्पतालों में मात्र आप्टोमेटिस्ट के सहारे ही नेत्र रोगियों का इलाज होता है। निजी क्षेत्रों में भी नेत्र चिकित्सकों का कोई स्थाई क्लीनिक नहीं है। अलीगढ़ व अन्य क्षेत्र से सप्ताह में एक या दो दिन के लिए नेत्र चिकित्सक नेत्र रोगियों केे देखने के लिए आते है लेकिन कोरोना के चलते इस समय वे भी नहीं आ रहे। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी से निपटने के लिए अभी तक दवा के इंतजाम तक नहीं किए हैं। चिकित्सकों का मानना है कि यह बीमारी स्टोरायड के अधिक सेवन से होती है।
इस तरह फैलता है ब्लैक फंगस
यह बीमारी गले में शरीर की बड़ी धमनी केटोरिड के रास्ते खून के साथ आंखों में फैलता है। इस बीमारी का सबसे अधिक खतरा शुगर के मरीजों को होता है। इसके अलावा बीपी, एचआईवी आदि के संक्रमित मरीजों को भी इस बीमारी के फैलने का खतरा रहता है। आंखों के साथ ही नाक और सिर के एक हिस्से तक यह पहुंच जाता है। मरीज का आधा चेहरा काला तक पड़ जाता है।
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बाजार में भी नहीं हैं इंजेक्शन
ब्लैक फंगस में एफोटेरिसिन बी का इंजेक्शन दिया जाता है, लेकिन यह इंजेक्शन न तो स्वास्थ्य विभाग के पास ही है और न ही बाजार में ही इस इंजेक्शन की उपलब्धता है। वैसे एक इंजेक्शन की कीमत 7 से 8 हजार रुपये तक होती है।
यह हैं लक्षण
इस बीमारी में आंखे लाल होना, आंखों में पानी आना, सूजन, जलन आदि लक्षण पाए जाते हैं। मरीज की आंखे घूमना बंद कर देती हैं। धुंधलापन होने लगता है और आंखें बाहर निकलने लगती हैं। लगातार अनदेखी करने पर आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
ऐेसे करें बचाव
ब्लैक फंगस कोमन नहीं है, लेकिन कोरोना के दौरान इसका खतरा बढ़ गया है।
कोरोना होने पर मरीज अपना शुगर लेवल नियंत्रित रखें
चिकित्सक की सलाह पर ही लें स्टेरायड
प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर ही इसका खतरा अधिक होता है
नाक और आंख में दर्द, सूजन, सिर में एक तरफ दर्द हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं
वर्जन
ब्लैक फंगस के खतरे को देखते हुए जिला अस्पताल पर एक आइसोलेशन बार्ड तैयार किया गया है। आवश्यक दवा के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी आपूर्ति नहीं मिली है। जिला में एक भी नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। -डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ
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ब्लैक फंगस के खतरे को देखते हुए विभाग ने जिला अस्पताल में एक वार्ड तो बना दिया है लेकिन इस वार्ड के बनने का कोई लाभ इस बीमारी से पीड़ित होने वाले मरीजों को नहीं मिल सकेगा। इस बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं हैं। जिले में एक भी नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं। सरकारी अस्पतालों में मात्र आप्टोमेटिस्ट के सहारे ही नेत्र रोगियों का इलाज होता है। निजी क्षेत्रों में भी नेत्र चिकित्सकों का कोई स्थाई क्लीनिक नहीं है। अलीगढ़ व अन्य क्षेत्र से सप्ताह में एक या दो दिन के लिए नेत्र चिकित्सक नेत्र रोगियों केे देखने के लिए आते है लेकिन कोरोना के चलते इस समय वे भी नहीं आ रहे। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी से निपटने के लिए अभी तक दवा के इंतजाम तक नहीं किए हैं। चिकित्सकों का मानना है कि यह बीमारी स्टोरायड के अधिक सेवन से होती है।
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इस तरह फैलता है ब्लैक फंगस
यह बीमारी गले में शरीर की बड़ी धमनी केटोरिड के रास्ते खून के साथ आंखों में फैलता है। इस बीमारी का सबसे अधिक खतरा शुगर के मरीजों को होता है। इसके अलावा बीपी, एचआईवी आदि के संक्रमित मरीजों को भी इस बीमारी के फैलने का खतरा रहता है। आंखों के साथ ही नाक और सिर के एक हिस्से तक यह पहुंच जाता है। मरीज का आधा चेहरा काला तक पड़ जाता है।
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बाजार में भी नहीं हैं इंजेक्शन
ब्लैक फंगस में एफोटेरिसिन बी का इंजेक्शन दिया जाता है, लेकिन यह इंजेक्शन न तो स्वास्थ्य विभाग के पास ही है और न ही बाजार में ही इस इंजेक्शन की उपलब्धता है। वैसे एक इंजेक्शन की कीमत 7 से 8 हजार रुपये तक होती है।
यह हैं लक्षण
इस बीमारी में आंखे लाल होना, आंखों में पानी आना, सूजन, जलन आदि लक्षण पाए जाते हैं। मरीज की आंखे घूमना बंद कर देती हैं। धुंधलापन होने लगता है और आंखें बाहर निकलने लगती हैं। लगातार अनदेखी करने पर आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
ऐेसे करें बचाव
ब्लैक फंगस कोमन नहीं है, लेकिन कोरोना के दौरान इसका खतरा बढ़ गया है।
कोरोना होने पर मरीज अपना शुगर लेवल नियंत्रित रखें
चिकित्सक की सलाह पर ही लें स्टेरायड
प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर ही इसका खतरा अधिक होता है
नाक और आंख में दर्द, सूजन, सिर में एक तरफ दर्द हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं
वर्जन
ब्लैक फंगस के खतरे को देखते हुए जिला अस्पताल पर एक आइसोलेशन बार्ड तैयार किया गया है। आवश्यक दवा के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी आपूर्ति नहीं मिली है। जिला में एक भी नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। -डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ