{"_id":"60c1b7d84af66909824daba0","slug":"black-fungus-patient-operation-done-in-sn-medical-college","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आगरा: दिमाग तक पहुंचा ब्लैक फंगस, छह घंटे चला ऑपरेशन, मधुमेह रोगियों में कनिंघमेला फंगस का भी खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आगरा: दिमाग तक पहुंचा ब्लैक फंगस, छह घंटे चला ऑपरेशन, मधुमेह रोगियों में कनिंघमेला फंगस का भी खतरा
Thu, 10 Jun 2021 12:30 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 10 Jun 2021 12:30 PM IST
सार
ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि अछनेरा के 40 साल के मरीज में ब्लैक फंगस ने आधे चेहरे को चपेट में ले लिया था। दिमाग तक संक्रमण पहुंच गया था।
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ब्लैक फंगस: मरीज का ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने बेहद जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया। ब्लैक फंगस के मरीज के दिमाग तक संक्रमण पहुंच गया था। तीन विभागों के चिकित्सकों ने छह घंटे तक ऑपरेशन कर आंख, गाल, हड्डी, आधा जबड़ा निकाला है। अभी मरीज आईसीयू में है और हालत गंभीर है।
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ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि अछनेरा के 40 साल के मरीज में ब्लैक फंगस ने आधे चेहरे को चपेट में ले लिया था। दिमाग तक संक्रमण पहुंच गया था। ऐसे में तीन विभागों के चिकित्सकों की टीम बनाई और सुबह 11 बजे से साढ़े तीन बजे तक ऑपरेशन चला। इसमें बाईं आंख, गाल, गाल की हड्डी और आधा जबड़ा निकाला गया है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत गंभीर बनी हुई है, इसका आईसीयू में इलाज चल रहा है। ब्लैक फंगस के दो और मरीज वार्ड में भर्ती हुए हैं, अब कुल संख्या 64 हो गई है। टीम में न्यूरोसर्जन डॉ. मयंक अग्रवाल, नेत्र सर्जन डॉ. तिरुपति नाथ, डॉ. अनु जैन, एनेस्थीसिया से डॉ. स्नेहहिंद गुप्ता मौजूद रहे।
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महीने भर से ऑपरेशन की अनुमति नहीं दे रहे थे परिजन
अछनेरा का यह युवक दूसरी बार संक्रमित हुआ। इसका इलाज एसएन के कोविड अस्पताल में चला था। यहां से ठीक होने पर ब्लैक फंगस हुआ। गाल, आंख और मस्तिष्क तक फंगस पहुंच गया था। परिजनों का ऑपरेशन की जटिलता बता दी थी, इससे परिजन ऑपरेशन में ही कोई अनहोनी होने की आशंका से भयभीत थे और ऑपरेशन के लिए अनुमति नहीं दे रहे थे। काउंसलिंग के बाद मंगलवार को परिजनों ने ऑपरेशन की अनुमति दी।
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मधुमेह रोगियों में कनिंघमेला फंगस का भी खतरा
कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मधुमेह रोगी और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में संक्रमण से ठीक होने के बाद कनिंघमेला फंगस का भी खतरा बढ़ गया है। एसएन मेडिकल कॉलेज में एक मरीज में इसकी पुष्टि हुई है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत ठीक है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि यह म्यूकरमाइकोसिस के परिवार का ही एक फंगस है। यह आंखों के अलावा दिमाग को तेजी से संक्रमित करता है। आंद्रता वाले क्षेत्रों में यह फंगस पाया जाता है। वैसे घबराने की जरूरत नहीं है, इसका इलाज भी अन्य फंगस की तरह ही है।
कनिंघमेला फंगस के मरीज की हालत ठीक
ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन सप्ताह भर पहले किया था। फंगस के टुकड़े को बायोप्सी में कनिंघमेला फंगस की पुष्टि हुई है। यह बहुत ही कम मरीजों में मिलता है। एसएन में यह पहला मामला है। इसका इलाज अन्य फंगस की तरह ही है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार हो रहा है।
क्या है कनिंघमेला
माइक्रो बायलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि यह म्यूकरमाइकोसिस के परिवार का ही एक फंगस है। इसके परिवार में राइपोजस प्रजाति से संबंधित मोल्ड, म्यूकोर प्रजातियां, बर्थोलेटिया, लिक्टीमिया और एपोफिसोमी प्रजातियां भी शामिल हैं। यह ज्यादातर मिट्टी में मिलते हैं। आंद्रता वाले क्षेत्रों में मिलता है।
आगरा: एसएन के चिकित्सकों ने बचाई 14 दिन के शिशु की जान, आधे घंटे में किया ब्लैक फंगस का ऑपरेशन
कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मधुमेह रोगी और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में संक्रमण से ठीक होने के बाद कनिंघमेला फंगस का भी खतरा बढ़ गया है। एसएन मेडिकल कॉलेज में एक मरीज में इसकी पुष्टि हुई है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत ठीक है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि यह म्यूकरमाइकोसिस के परिवार का ही एक फंगस है। यह आंखों के अलावा दिमाग को तेजी से संक्रमित करता है। आंद्रता वाले क्षेत्रों में यह फंगस पाया जाता है। वैसे घबराने की जरूरत नहीं है, इसका इलाज भी अन्य फंगस की तरह ही है।
कनिंघमेला फंगस के मरीज की हालत ठीक
ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन सप्ताह भर पहले किया था। फंगस के टुकड़े को बायोप्सी में कनिंघमेला फंगस की पुष्टि हुई है। यह बहुत ही कम मरीजों में मिलता है। एसएन में यह पहला मामला है। इसका इलाज अन्य फंगस की तरह ही है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार हो रहा है।
क्या है कनिंघमेला
माइक्रो बायलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि यह म्यूकरमाइकोसिस के परिवार का ही एक फंगस है। इसके परिवार में राइपोजस प्रजाति से संबंधित मोल्ड, म्यूकोर प्रजातियां, बर्थोलेटिया, लिक्टीमिया और एपोफिसोमी प्रजातियां भी शामिल हैं। यह ज्यादातर मिट्टी में मिलते हैं। आंद्रता वाले क्षेत्रों में मिलता है।
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