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गोरखपुर में SP ने तो यहां मास्टर स्ट्रोक से BJP ने ढहा दिया सपा का किला

Sat, 17 Mar 2018 10:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Sat, 17 Mar 2018 10:21 AM IST
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bjp defeats sp in agra and firozabad
आगरा में दर्ज की जीत - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव में भले ही सीएम योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद की सीट पर सपा ने कब्जा कर लिया है। गोरखपुर में जीत इसलिए बड़ी है क्योंकि यहां भाजपा का किला ही ढहा दिया। 
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लेकिन सपा फिरोजाबाद आगरा में अपना किला नहीं बचा सकी। फिरोजाबाद में सपा से बगावत करके जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार को जीत मिली। 
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जबकि आगरा में भी भाजपा ने अपने मास्टर स्ट्रोक से सपा का चोरों खाना चित कर दिया। यहां तो सपा की ओर कोई प्रत्याशी नामांकन करने तक नहीं गया। 

bjp defeats sp in agra and firozabad
भाजपा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
इसलिए आगरा में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा के प्रबल प्रताप सिंह (राकेश बघेल) की ताजपोशी हो गई। 15 मार्च को उन्हें जीत का प्रमाणपत्र भी दे दिया गया। 

फिरोजाबाद में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पिछले दिनों जिले में जो कुछ भी हुआ वह अप्रत्याशित और चौंकाने वाला है। भाजपा के मास्टर स्ट्रोक से सपा के दिग्गज नेता भी भौचक हैं। 

सपाई यकीन नहीं कर पा रहे कि जिस विधायक के उत्पीड़न के खिलाफ पार्टी आंदोलन कर रही थी वही विधायक भाजपा से हाथ मिला लेगा। राजनीति का एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सोमवार को यहां हुआ।

ये रहे सूत्रधार 

bjp defeats sp in agra and firozabad
An interesting story of samajwadi party symbol bicycle
पूरी रणनीति के सूत्रधार पूर्व मंत्री और भाजपा नेता जयवीर सिंह रहे। उन्हीं के आवास पर रणनीति बनी। सदस्यों की तोड़फोड़ और अपने पाले में लाने का चौंकाने वाला खेल जब सबके सामने आया तो लोग गणित ही लगाते रहे ऐसा कैसे हुआ। 

क्योंकि सभी जानते हैं कि हरिओम यादव और जयवीर सिंह के बीच जबरदस्त सियासी दुश्मनी है। जयवीर सिंह को ही हरा कर हरिओम सिरसागंज से विधायक बने। हरिओम यादव और छोटू के खिलाफ मुकदमों की फेहरिस्त से लेकर थाने में हिस्ट्रीशीट खुलवाने तक किसका हाथ रहा। 

उधर पूर्व विधायक रामवीर यादव और हरिओम यादव के बीच भी कभी रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं। इसी का फायदा उठाकर भाजपा ने उनसे हाथ मिला लिया और उनके बेटे अमोल यादव को प्रत्याशी बनाकर जिला पंचायत की कुर्सी अपने कब्जे में कर ली। 
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