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छोटेलाल का बड़ा सियासी ड्रामा

Sat, 21 May 2016 01:07 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Sat, 21 May 2016 01:07 AM IST
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big political drama of chhotelal
छाोटे लाल और रामश्‍ांकर कठे‌र‌िया - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
फतेहाबाद सीट से विधायक छोटेलाल वर्मा शुक्रवार को हुए बड़े सियासी ड्रामे का केंद्र रहे। भाजपा  सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया का घर इसका मंच था। छोटेलाल उनसे बंद कमरे में मिले। वह भी तब जब बाहर मीडियाकर्मी मौजूद थे। बाहर निकले तो सवालों पर कहा कि वह भाजपा तो क्या फिलहाल किसी दल में नहीं हैं। क्लाइमेक्स सीन वह था जब डा. कठेरिया ने कहा, ‘इसकी घोषणा सही समय आने पर की जाएगी।’
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हुआ यह कि डा. कठेरिया ने विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी देने के लिए अपने आवास पर प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई थी। सभी प्रमुख पत्रकार वहां मौजूद थे। प्रेस कान्फ्रेंस शुरू होने से ठीक पहले दोपहर लगभग सवा बजे विधायक छोटेलाल ने वहां पहुंचकर सभी को चौंका दिया। उनके भाजपा में आने की चर्चा तो थी ही, किंतु  पत्रकार कुछ पूछ पाते, इससे पहले ही कठेरिया और विधायक जगन प्रसाद गर्ग उन्हें कमरे में ले गए। करीब 15 मिनट बाद निकले छोटेलाल ने सिर्फ इतना ही कहा कि वह अभी किसी दल में नहीं हैं। बताया कि वह व्यक्तिगत कार्य से मंत्री जी से मिलने आए थे। हालांकि भविष्य में भाजपा में शामिल होने की बात को भी उन्होंने खारिज नहीं किया। वहीं डा. कठेरिया ने कहा कि छोटेलाल लगातार उनके संपर्क में हैं, समय पर आने पर उनकी पार्टी में शामिल होने की घोषणा की जाएगी। बता दें कि छोटेलाल वर्मा पुराने भाजपाई हैं। लंबे समय तक पार्टी में रहे हैं।
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पहले से तय थी पटकथा
इस सियासी ड्रामे का लेखक-निर्देशक कौन था, इसे लेकर भले कयास जुदा हों पर जो हुआ वह तैयार पटकथा के मुताबिक था। जिस तरह मुलाकात हुई, उससे छोटेलाल की भाजपा से नजदीकी साफ नजर आई। बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद भी वर्मा घोषित रूप से सपा में शामिल नहीं हुए थे। शायद वह सपा के टैग को भाजपा से बदलने का संदेश बिना कहे देना चाहते थे, इसलिए भेंट का वक्त वही चुना गया, जब मीडिया वहां मौजूद हो।
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यानी घोषणा भर ही बाकी
छोटेलाल ने पहली बार वर्ष 1993 में भाजपा के टिकट पर फतेहाबाद सीट से चुनाव जीता था। 2002 का चुनाव भी वे इसी पार्टी से जीते। 2007 में सपा के टिकट पर लड़े पर हार गए। 2012 में बसपा के टिकट पर लड़े। चुनाव जीता किंतु सपा का दामन थाम लिया। माना जा रहा है कि 2017 के लिए सपा से टिकट की आस टूटी तो वह बरास्ता कल्याण सिंह भाजपा के संपर्क में आए। कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनके शामिल होने की घोषणा भर ही बाकी है।
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