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UP News: राधा-कृष्ण के विवाह का साक्षी है भांडीरवन, सोमवती अमावस्या पर उमड़ी भीड़; ये है मान्यता
Mon, 02 Sep 2024 01:13 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 02 Sep 2024 01:13 PM IST
सार
राधा-कृष्ण के विवाह के साक्षी भांडीरवन में सोमवती अमावस्या पर पर्वी मेले का आयोजन हो रहा है। इस दौरान यहां भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। आइये जानतें हैं क्या है यहां की मान्यता...
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भांडीरवन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मथुरा के मांट में सोमवती अमावस्या पर सोमवार को भांडीरवन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इसके लिए सेवायत कई दिनों से व्यवस्थाओं में जुटे हुए थे। भांडीरवन के बारे में मान्यता है कि यहां राधा कृष्ण का विवाह संपन्न हुआ था। भांडीरवन में पवित्र वेणु कूप भी है, जिसका जल आज भी नहीं सूखा है।
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मान्यता है भी है कि भगवान श्री कृष्ण एक बार गौचारण करते हुए भांडीरवन आए तो कंस ने बछड़ा के रूप में बछासुर नाम के एक राक्षस को भेज दिया, जिसका भगवान ने वध कर दिया। परन्तु बाद में विद्वान पंडितों ने उन्हें बताया कि उन्होंने बछड़े का वध किया है, इसलिए उन्हें गौ हत्या का पाप लगेगा, इससे मुक्ति पाने के लिए उन्हें सभी तीर्थों की यात्रा करनी होगी। भगवान ने यहीं बांसुरी से कुआं खोदकर सारे तीर्थो का आह्वान किया। सारे तीर्थ वहां आए और अपने पवित्र जल को वेणु कूप में प्रवाहित किया।
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इसके जल से स्न्नान कर योगिराज भगवान श्रीकृष्ण को गौहत्या क़े पाप से मुक्ति मिली। भांडीरवन के सेवायत प्रमोद कुमार ने बताया कि इस कुआं में आज भी सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्म महूर्त में दूध जैसी सफेद धार निकलती है। इस कुएं के जल से स्नान करने से सारी मनोकामना पूर्ण होती हैं। वहीं कुआं के स्नान के बाद एक छोटे से कुंड में एकत्रित हुए उस जल में स्नान करने से निसन्तान स्त्री को संतान प्राप्ति होती है। महिलाएं यहां स्नान के बाद पुराने वस्त्र आभूषणों का त्याग कर नूतन वस्त्र धारण करती हैं।