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Health News: बेड़ई-कचौड़ी से निकला पेट, हो रहीं आठ तरह की बीमारियां

Mon, 12 Sep 2022 11:31 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 12 Sep 2022 11:31 PM IST
सार

फिजीशियंस एसोसिएशन ने मधुमेह के 1190 मरीजों पर स्टड़ी की है, जिसमें 40 फीसदी को उच्च रक्तचाप की समस्या मिली। इसके साथ ही  मोटापा, कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, लिवर, ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियां भी मिलीं हैं।

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Bedai kchodi breakfast giving eight types of diseases to Agra people
बेड़ई कचौड़ी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में सुबह की बेड़ई- कचौड़ी का नाश्ता, दोपहर में समोसे खा लिए। मौका मिला तो पेटीज खाई, कोल्डड्रिंक भी गटक ली। पेट निकला, वजन भी बढ़ गया। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कॉलेस्ट्रोल, हृदय रोग, तंत्रिका तंत्र, किडनी, लिवर जैसी बीमारियां पनप गईं। इस पर स्टडी करने वाले शहर के डॉ. बीके अग्रवाल को लखनऊ स्थित कार्यशाला में फेलोशिप मिली है।

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वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि एक साल में 25 से 55 साल के 1190 मरीजों पर अध्ययन किया। ये मधुमेह रोगी थे, इनमें 412 मरीजों में हृदय रोग, 570 मरीजों को उच्च रक्तचाप मिला। 484 लोगों में कॉलेस्ट्रोल की दिक्कत रही। 798 का वजन बढ़ा हुआ था, इनमें 78 फीसदी का पेट निकला हुआ था। इनसे पूछताछ में पता चला कि 68 फीसदी लोग सप्ताह में तीन से पांच दिन तली सामग्री और फास्ट फूड से पेट भरते हैं। पैदल चलने, व्यायाम से भी बचते हैं। ऐसे मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक और ह्दयाघात का खतरा भी तीन गुना अधिक है।

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औसत से तीन गुना ज्यादा खा रहे नमक, चीनी

एसएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि लोग तीन गुना अधिक नमक- चीनी खा रहे हैं। 14.5 ग्राम नमक रोज खा रहे हैं, जबकि पांच-छह ग्राम ही बहुत है। उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए दो-तीन ग्राम नमक ही पर्याप्त है। रोजाना 20- 30 ग्राम चीनी ही खाएं, लेकिन लोग 80-100 ग्राम तक उपयोग कर रहे हैं। फास्ट फूड की वजह से नमक-चीनी की मात्रा शरीर में अधिक पहुंच रही है। बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। 

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कड़ाई का ट्रांसफैट से नलिकाओं में जम रहा प्लाग

उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार गुप्ता का कहना है कि हलवाई, रेस्टोरेंट, होटल समेत ढकेल संचालक कड़ाही का तेल बदलते नहीं हैं। लगातार ताप से ट्रांसफैट की अधिक मात्रा हो रही है, जो जहर समान है। पैक्ड फास्ट फूड में नुकसान पहुंचाने वाले तत्व हैं। इससे नलिकाओं में प्लाग जम रहा है। इससे नलिकांए संकुचित होने से रक्त का प्रभाव कम होने लगता है। इससे युवाओं में भी हृदय रोग, लिवर की बीमारी तेजी से पनप रही हैं।


स्वस्थ रहने को ये हैं मानक: 

140/90: मिलीमीटर मर्करी
60-100 धड़कन प्रति मिनट
18-25: बॉडी मास्क इंडेक्स
20-30: ग्राम चीनी
5-6: ग्राम नमक रोजाना 

क्या करें, क्या न करें

- पैकेट बंद भोजन, फास्ट फूड और तली सामग्री से बचें। 
- दाल, चपाती, सलाद, हरी तरकारी भोजन में शामिल करें। 
- रोजाना योग करें, साइकिल चलाएं या रस्सी कूद सकते हैं।
- बहुमंजिला इमारत में लिफ्ट में न जाएं, सीढ़ियां इस्तेमाल करें।
- बैठने का कार्य है तो 30-45 मिनट बाद कुछ देर टहलें। 

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