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बम भोले के जयघोष से गूंज उठी ब्रज की काशी बटेश्वर
बम भोले के जयघोष से गूंज उठी ब्रज की काशी बटेश्वर
Updated Sat, 25 Feb 2017 12:20 AM IST
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बम भोले के जयघोष से गूंज उठी ब्रज की काशी बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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महाशिवरात्रि की पावन बेला पर बने सर्वार्थ सिद्ध आदि दुर्लभ योगों के बीच ब्रज की काशी बटेश्वर में शुक्रवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्मलाल जी महाराज के एक द्वार पर सोरों से कांवड़ लाये कांवड़ियों की अभिषेक के लिए दिन भर लंबी लाइन लगी रही। दूसरे द्वार पर यमुना में स्नान करने वालों ने गौरीशंकर महाराज का शृंगार किया। घंटों की घनघनाहट और बम भोले के स्वर से बटेश्वर नगरी गूंजती रही।
सोरों से कांवड़ में गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़ियों की मध्यरात्रि में पांच किमी लंबी लाइन लग गई। भीड़ के दबाव में ब्रह्मलाल जी मंदिर के पट मध्यरात्रि में ही खोलने पड़े। मध्यरात्रि से शुक्रवार को दिन भर गंगाजल से भगवान का अभिषेक किया गया। भोर की पहली किरण के साथ ही शिव मन्दिर शृंखला के घाट पर यमुना नदी में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। बाद में ब्रह्मलाल जी मन्दिर में पूजा की। गौरीशंकर मन्दिर में शृंगार पूजा कर अपने सौभाग्य की कामना की। स्नान के दौरान यमुना में पीएसी के गोताखोर मोटर वोट के साथ मुस्तैद रहे। जबकि स्थानीय गोताखोर घाटों पर तैनात रहे। मन्दिर महन्त जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि शिव मन्दिर शृंखला के अन्य मन्दिरों में भी विशेष पुण्य लाभ के लिए रुद्राभिषेक और महारुद्र यज्ञ के अनुष्ठानों का सिलसिला दिन भर चला। तीर्थ क्षेत्र में पुलिस प्रशासन सीओ बाह सतीश शर्मा के नेतृत्व में मुस्तैद रहा।
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महिला भक्तों में दिखा जोश और जज्वा
बाह। कंधे पर झूलती कांवड़, पैरों में बंधे घुंघरू की छनछन, बम भोले के स्वर। सोरों से बटेश्वर तक करीब 130 किमी की दूरी पैदल नाप कर पहुंची महिला श्रद्धालुओं का जोश और जज्वा देखने लायक था। किसी ने संतान सुख की मन्नत मांगी थी तो किसी ने परिवार की खुशहाली। सरिता, सुमन, गीता, मीनाक्षी, सोनकली लंबी पदयात्रा के बाद भी थकान महसूस नहीं कर रही थीं। उनके पैरों में पडे़ छालों का दर्द और चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। 17 वर्षीय यशोदा से 48 वर्षीय सुम्मेर सिंह तक शामिल रहे। सिरसागंज की संध्या अपने सिर पर पांच किलो दूध की मटकी लेकर पहुंची। उसने बताया कि वह पैदल चल कर आई है। उसने भोले का दुग्धाभिषेक कर प्रसाद ग्रहण किया।
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साधु-संतों के लिए दिन भर चले भंडारे
बाह। धार्मिक आयोजनों में कहीं अखंड रामायण पाठ तो कहीं दानपुण्य के कार्यक्रम हुए। अन्न क्षेत्र में राजकुमार गोस्वामी ने साधु-सन्तों और व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को फलाहार कराया। एनजीओ एंग्री यूथ ने श्रद्धालुओं को मीठे दूध का वितरण कराया। साधु-सन्तों के आश्रम पर भी कार्यक्रम हुए। वहीं, घाट पर काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए श्रद्धालुओं ने सपेरों के पास मौजूद काले नाग की पूजा की।
प्रतिबंध के बाद भी कांच की शीशी में ले गए गंगाजल
बाह। मुख्य मंदिर में कांच की शीशी में गंगाजल के साथ प्रवेश पर प्रतिबंध के बाद भी कांवड़िये नहीं माने। मन्दिर परिसर में टूटी पड़ी कांच की शीशियों से श्रद्धालुओं के पैर लहूलुहान हो गये। कई को तो डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा।
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सोरों से कांवड़ में गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़ियों की मध्यरात्रि में पांच किमी लंबी लाइन लग गई। भीड़ के दबाव में ब्रह्मलाल जी मंदिर के पट मध्यरात्रि में ही खोलने पड़े। मध्यरात्रि से शुक्रवार को दिन भर गंगाजल से भगवान का अभिषेक किया गया। भोर की पहली किरण के साथ ही शिव मन्दिर शृंखला के घाट पर यमुना नदी में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। बाद में ब्रह्मलाल जी मन्दिर में पूजा की। गौरीशंकर मन्दिर में शृंगार पूजा कर अपने सौभाग्य की कामना की। स्नान के दौरान यमुना में पीएसी के गोताखोर मोटर वोट के साथ मुस्तैद रहे। जबकि स्थानीय गोताखोर घाटों पर तैनात रहे। मन्दिर महन्त जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि शिव मन्दिर शृंखला के अन्य मन्दिरों में भी विशेष पुण्य लाभ के लिए रुद्राभिषेक और महारुद्र यज्ञ के अनुष्ठानों का सिलसिला दिन भर चला। तीर्थ क्षेत्र में पुलिस प्रशासन सीओ बाह सतीश शर्मा के नेतृत्व में मुस्तैद रहा।
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महिला भक्तों में दिखा जोश और जज्वा
बाह। कंधे पर झूलती कांवड़, पैरों में बंधे घुंघरू की छनछन, बम भोले के स्वर। सोरों से बटेश्वर तक करीब 130 किमी की दूरी पैदल नाप कर पहुंची महिला श्रद्धालुओं का जोश और जज्वा देखने लायक था। किसी ने संतान सुख की मन्नत मांगी थी तो किसी ने परिवार की खुशहाली। सरिता, सुमन, गीता, मीनाक्षी, सोनकली लंबी पदयात्रा के बाद भी थकान महसूस नहीं कर रही थीं। उनके पैरों में पडे़ छालों का दर्द और चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। 17 वर्षीय यशोदा से 48 वर्षीय सुम्मेर सिंह तक शामिल रहे। सिरसागंज की संध्या अपने सिर पर पांच किलो दूध की मटकी लेकर पहुंची। उसने बताया कि वह पैदल चल कर आई है। उसने भोले का दुग्धाभिषेक कर प्रसाद ग्रहण किया।
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साधु-संतों के लिए दिन भर चले भंडारे
बाह। धार्मिक आयोजनों में कहीं अखंड रामायण पाठ तो कहीं दानपुण्य के कार्यक्रम हुए। अन्न क्षेत्र में राजकुमार गोस्वामी ने साधु-सन्तों और व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को फलाहार कराया। एनजीओ एंग्री यूथ ने श्रद्धालुओं को मीठे दूध का वितरण कराया। साधु-सन्तों के आश्रम पर भी कार्यक्रम हुए। वहीं, घाट पर काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए श्रद्धालुओं ने सपेरों के पास मौजूद काले नाग की पूजा की।
प्रतिबंध के बाद भी कांच की शीशी में ले गए गंगाजल
बाह। मुख्य मंदिर में कांच की शीशी में गंगाजल के साथ प्रवेश पर प्रतिबंध के बाद भी कांवड़िये नहीं माने। मन्दिर परिसर में टूटी पड़ी कांच की शीशियों से श्रद्धालुओं के पैर लहूलुहान हो गये। कई को तो डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा।