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राधे-राधे के जयघोष से गूंज उठी बटेश्वर नगरी
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 01 Feb 2016 02:10 AM IST
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ब्रज की विरासत को सहेजने की जनजागरण मुहिम में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल के मालदा से 100 साधु-संत रविवार को बटेश्वर पहुंचे। ब्रह्मलाल जी मंदिर में मत्था टेकने के बाद सियाराम दास महाराज के आश्रम में हरिनाम संकीर्तन शुरू किया गया। राधे-राधे की धुन पर भगवान शिव की नगरी बटेश्वर में साधु और साध्वियां झूम उठीं।
वंदन गिरि महाराज और सियाराम दास महाराज के नेतृत्व में ब्रजधाम के दिव्य दर्शन और ब्रज की विरासत को सहेजने की जनजागरण यात्रा में शामिल होने के लिए साधु-संतो के आने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। सोमवार को बटेश्वर की मंदिर शृंखला से शुरू होने वाली ब्रज दिव्य दर्शन पदयात्रा से पहले यहां पहुंचे मालदा के जगदीश बाबा, नारायन बाबा, शंकरदास बाबा, जानकी घोष, ज्योत्सना दास, गीतादास, सुमित्रा साहू, सुशीला साहू, तरुबाला दास, बातासी सरकार, अनिल दार आदि ने ब्रह्मलाल जी मंदिर में मत्था टेका। सियाराम दास महाराज का आश्रम और मंदिर शृंखला दिन भर राधे-राधे के घोष से गूंजती रही। राधे कृष्ण के गीतों पर साधु संत जमकर नाचे। सियाराम दास महाराज ने बताया कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, बंगाल, दिल्ली, हरियाणा और यूपी के साधु संतों के आने का सिलसिला जारी है। जनजागरण यात्रा में बाह क्षेत्र के लोगों को जोड़ने के लिए विभिन्न गांवों में रविवार को भी साधु संतों की टोलियां पहुंची।
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खुद बनाकर खाते हैं खाना
बाह। साधु-संत अपना खाना खुद ही बनाते हैं। सियाराम दास के आश्रम पर साधु संत सामूहिक रूप से खाना बनाते हैं। सब बैैठकर एक साथ खाना खाते भी हैं। सियाराम दास महाराज ने बताया कि अलग से खाना बनाने वालों की व्यवस्था नहीं की गई है। साधु संत ही लंगर चला रहे हैं।
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यमुना की दुर्दशा देखकर रो पड़ी मालदा की साध्वियां
बाह। बटेश्वर घाट पर यमुना का मैला आंचल देखकर मालदा की साध्वियां रो पड़ीं। राधे-राधे के स्वर के साथ उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। जसोदा बाई ने कहा कि जब तक यमुना पवित्र नहीं हो जाती तब तक यमुना बचाने के आंदोलन से जुड़ी रहेगी। ब्रज से बंगाल तभी लौटेंगी जब यमुना में जल की निर्मल धारा बहने लगेगी। यमुना के मैले आंचल को देख ज्योत्सना दास की आस्था को गहरा आघात लगा। उन्होंने कहा कि यमुना की पवित्रता को लेकर सरकारें गंभीर नहीं हैं। साधु-संतों के आंदोलन के बाद भी सरकारों का ढर्रा नहीं बदला है। मालदा से कक्षा नौ की छात्रा खुशी साहू भी ब्रज दर्शन यात्रा में शामिल होने आई हैं। यमुना का मेला आंचल देख उनकी आंखों से भी आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि जिस यमुना जल से भगवान भोले का अभिषेक करते हैं वह आचमन के लायक भी नहीं रह गया है।
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वंदन गिरि महाराज और सियाराम दास महाराज के नेतृत्व में ब्रजधाम के दिव्य दर्शन और ब्रज की विरासत को सहेजने की जनजागरण यात्रा में शामिल होने के लिए साधु-संतो के आने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। सोमवार को बटेश्वर की मंदिर शृंखला से शुरू होने वाली ब्रज दिव्य दर्शन पदयात्रा से पहले यहां पहुंचे मालदा के जगदीश बाबा, नारायन बाबा, शंकरदास बाबा, जानकी घोष, ज्योत्सना दास, गीतादास, सुमित्रा साहू, सुशीला साहू, तरुबाला दास, बातासी सरकार, अनिल दार आदि ने ब्रह्मलाल जी मंदिर में मत्था टेका। सियाराम दास महाराज का आश्रम और मंदिर शृंखला दिन भर राधे-राधे के घोष से गूंजती रही। राधे कृष्ण के गीतों पर साधु संत जमकर नाचे। सियाराम दास महाराज ने बताया कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, बंगाल, दिल्ली, हरियाणा और यूपी के साधु संतों के आने का सिलसिला जारी है। जनजागरण यात्रा में बाह क्षेत्र के लोगों को जोड़ने के लिए विभिन्न गांवों में रविवार को भी साधु संतों की टोलियां पहुंची।
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खुद बनाकर खाते हैं खाना
बाह। साधु-संत अपना खाना खुद ही बनाते हैं। सियाराम दास के आश्रम पर साधु संत सामूहिक रूप से खाना बनाते हैं। सब बैैठकर एक साथ खाना खाते भी हैं। सियाराम दास महाराज ने बताया कि अलग से खाना बनाने वालों की व्यवस्था नहीं की गई है। साधु संत ही लंगर चला रहे हैं।
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यमुना की दुर्दशा देखकर रो पड़ी मालदा की साध्वियां
बाह। बटेश्वर घाट पर यमुना का मैला आंचल देखकर मालदा की साध्वियां रो पड़ीं। राधे-राधे के स्वर के साथ उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। जसोदा बाई ने कहा कि जब तक यमुना पवित्र नहीं हो जाती तब तक यमुना बचाने के आंदोलन से जुड़ी रहेगी। ब्रज से बंगाल तभी लौटेंगी जब यमुना में जल की निर्मल धारा बहने लगेगी। यमुना के मैले आंचल को देख ज्योत्सना दास की आस्था को गहरा आघात लगा। उन्होंने कहा कि यमुना की पवित्रता को लेकर सरकारें गंभीर नहीं हैं। साधु-संतों के आंदोलन के बाद भी सरकारों का ढर्रा नहीं बदला है। मालदा से कक्षा नौ की छात्रा खुशी साहू भी ब्रज दर्शन यात्रा में शामिल होने आई हैं। यमुना का मेला आंचल देख उनकी आंखों से भी आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि जिस यमुना जल से भगवान भोले का अभिषेक करते हैं वह आचमन के लायक भी नहीं रह गया है।