{"_id":"5e510e3c8ebc3ef3875cc695","slug":"barsana-lathmar-holi-and-braj-ki-gali","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बरसाना के लोग आज भी श्रीकृष्ण को सुनाते हैं प्रेम पगी गालियां, द्वापर युग से जुड़ी है अनूठी परंपरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बरसाना के लोग आज भी श्रीकृष्ण को सुनाते हैं प्रेम पगी गालियां, द्वापर युग से जुड़ी है अनूठी परंपरा
Sun, 23 Feb 2020 12:15 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 23 Feb 2020 12:15 PM IST
सार
ब्रज में प्रेम पगी गालियों का बड़ा महत्व है। तमाम मांगलिक अवसरों पर गालियां सुनाए जाने की यह अनूठी परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है।
विज्ञापन
लठामार होली (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के विवाह के दौरान जनकपुर की महिलाओं ने प्रेम पगी गालियां सुनाईं। इसी प्रकार द्वापर में भी बरसाना की महिलाओं द्वारा ठाकुर जी को गालियां सुनाने का उल्लेख मिलता है।
ब्रज के बारे में एक कहावत है कि बोलंत हेला, वचनंत गारी
भक्ति काल के तमाम कवियों ने इन गालियों को अपने काव्य में पिरोया है। ब्रज में सगाई, लग्न, विवाह जैसे मांगलिक कार्यों में आज भी गालियों का प्रयोग महिलाओं द्वारा किया जाता है।
नंदगांव-बरसाना में भी ये प्रथाएं देखने को मिलती हैं। नंदगांव राधा जी की ससुराल है। ऐसे में राधाष्टमी एवं होली के अवसर पर बरसाना के लोगों द्वारा प्रेम पगी गालियां कृष्ण को सुनाई जाती हैं।
विज्ञापन
गावैं दै दै तारियां हो ब्रज की नारियां सुकुमारि
लाला तेरी बहन छैल छिनकारी याकी श्रीदामा ते यारी
नंद नंदन तेरी भूआ जाकें क्वारी के सुत हुआ।
नंद नंदन तेरी काकी वह तौ काम कला में पाकी।
विज्ञापन
ब्रज के बारे में एक कहावत है कि बोलंत हेला, वचनंत गारी
भक्ति काल के तमाम कवियों ने इन गालियों को अपने काव्य में पिरोया है। ब्रज में सगाई, लग्न, विवाह जैसे मांगलिक कार्यों में आज भी गालियों का प्रयोग महिलाओं द्वारा किया जाता है।
विज्ञापन
नंदगांव-बरसाना में भी ये प्रथाएं देखने को मिलती हैं। नंदगांव राधा जी की ससुराल है। ऐसे में राधाष्टमी एवं होली के अवसर पर बरसाना के लोगों द्वारा प्रेम पगी गालियां कृष्ण को सुनाई जाती हैं।
विज्ञापन
गावैं दै दै तारियां हो ब्रज की नारियां सुकुमारि
लाला तेरी बहन छैल छिनकारी याकी श्रीदामा ते यारी
नंद नंदन तेरी भूआ जाकें क्वारी के सुत हुआ।
नंद नंदन तेरी काकी वह तौ काम कला में पाकी।
आज भी जब किसी तीज-त्योहार के अवसर पर समाज गायन के दौरान दोनों गांवों के लोग आपस में एक-दूसरे के सामने बैठ कर समाज गायन करते हैं तो बरसाना के लोग इन गालियों को कृष्ण के गांव के लोगों को सुनाते हैं। नंदगांव के लोग इस परिहास पर बुरा न मान कर प्रत्युत्तर देते हैं।
'ब्रज में बिना गाली के मिठास नहीं'
नंदगांव के साहित्यकार रामशरण शर्मा बताते हैं कि ब्रजभाषा में बिना गाली के मिठास नहीं है। मांगलिक कार्यों में साहित्यिक गालियों को महत्व दिया गया है। लठामार होली पर भी समाज गायन के दौरान ठाकुर जी को अनुरागयुक्त गालियां सुनाई जाती हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षक श्यामलाल शर्मा का कहना है कि इन गालियों में अश्लीलता, भौंडापन नहीं होता। माधुर्यरस होता है। इनमें केवल कटाक्ष होता है। साहित्यिक गालियों का चलन ब्रज में बहुत पुराना है।
'ब्रज में बिना गाली के मिठास नहीं'
नंदगांव के साहित्यकार रामशरण शर्मा बताते हैं कि ब्रजभाषा में बिना गाली के मिठास नहीं है। मांगलिक कार्यों में साहित्यिक गालियों को महत्व दिया गया है। लठामार होली पर भी समाज गायन के दौरान ठाकुर जी को अनुरागयुक्त गालियां सुनाई जाती हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षक श्यामलाल शर्मा का कहना है कि इन गालियों में अश्लीलता, भौंडापन नहीं होता। माधुर्यरस होता है। इनमें केवल कटाक्ष होता है। साहित्यिक गालियों का चलन ब्रज में बहुत पुराना है।