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बैंक प्रबंधक हत्याकांड: पत्नी, ससुर या फिर साला, किसने घोंटा गला? ये सवाल खोलेंगे कत्ल का राज
Sun, 22 Oct 2023 01:45 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sun, 22 Oct 2023 01:45 PM IST
सार
बैंक प्रबंधक हत्या के बाद साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश की गई। इस मामले में फिर से क्राइम सीन दोहराने की तैयारी कर रही है।
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बैंक प्रबंधक हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के ताजगंज के रामरघु एग्जोटिका में बैंक प्रबंधक सचिन उपाध्याय की गला घोंटकर हत्या के मामले में फ्लैट से साक्ष्यों को एकत्रित किया जाएगा। इसके लिए पुलिस टीम क्राइम सीन दोहराएगी। हत्या से पहले उनके शरीर को जलाया भी गया था। पुलिस ने आरोपी साले को जेल भेजा है। वहीं, नामजद कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रिजेंद्र रावत और उनकी बेटी प्रियंका उर्फ मोना की गिरफ्तारी न होने से परिजन आक्रोशित हैं।
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सचिन उपाध्याय की शादी फरवरी 2015 में प्रियंका उर्फ मोना से हुई थी। 12 अक्तूबर की शाम 5 बजे उनकी खुदकुशी की सूचना पुलिस को दी गई थी। चिकित्सकों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गला घोंटकर हत्या आई थी। उन्हें जलाया भी गया था। शरीर पर कई चोटों के निशान मिले थे। शव एक से दो दिन पुराना था। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि हत्या 11 अक्तूबर की रात की गई थी। ताजगंज थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे में ससुर अधिवक्ता बिजेंद्र रावत, साला कृष्णा रावत और पत्नी प्रियंका रावत को नामजद किया गया था। शुक्रवार को पुलिस ने साले कृष्णा रावत को जेल भेजा था।
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डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि घटनास्थल पर साक्ष्य नष्ट किए गए थे। इसलिए मुकदमे में धारा 201 की बढ़ोतरी की गई। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया था। बाथरूम में पाइप टूटा मिला। टूटी चूड़ियां व एक दो अन्य सामान भी टूटा हुआ पड़ा था। सचिन के बच्चे छोटे हैं। बेटा छह साल और बेटी तीन साल की है। घटना के समय बच्चे घर में ही थे मगर इतने छोटे हैं कि कुछ बता नहीं सकते। क्या हुआ था इसकी तह तक पहुंचने के लिए पुलिस क्राइम सीन का दोहराव करेगी। इसके लिए फोरेंसिक टीम को पत्र लिखा जा रहा है। मुकदमे में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस साक्ष्य संकलन कर रही है।
इन सवालों के अभी नहीं मिले जवाब
-सचिन उपाध्याय का गला किसने और किससे घोंटा था। एक व्यक्ति अकेले गला दबाकर नहीं मार सकता है। सचिन ने संघर्ष किया होगा।
- घर में टूटे पड़े सामान से यही आशंका है कि संघर्ष के दौरान सामान टूटा हो।
-शरीर पर मिले निशान प्रेस से जलाने के होने की आशंका है। घर की तलाशी में प्रेस नहीं मिली।
-वॉशिंग मशीन में कपड़े धुले हुए मिले। उस कमरे की चादर भी धोई गई थी, जिसमें लाश थी।
परिजन बोले दबाव में है पुलिस
सचिन उपाध्याय के परिजन का आरोप है कि पुलिस दबाव में है। हत्यारोपी प्रभावशाली लोग हैं। यही मामला किसी गरीब से जुड़ा होता तो पहले दिन ही तीनों नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी हो जाती। पुलिस दबाव में नहीं होती तो हत्याकांड का मुकदमा कई दिन बाद नहीं लिखा जाता। हत्या के मुकदमे से पहले पुलिस ने दहेज उत्पीडऩ का मुकदमा लिखा। हकीकत सामने है।