आगरा: 13 आयुष अस्पतालों पर 10 महीने से पड़ा है ताला, गोदामों में भरी दवाएं
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आगरा में आयुष विभाग के चिकित्सकों की कोरोना से संबंधित काम में ड्यूटी लगने से 13 अस्पतालों पर ताले पड़े हुए हैं। मार्च से ये अस्पताल बंद हैं और सरकार हर महीने दवाएं भेज रही है। इसके चलते गोदामों में भी इनको रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। ऐसे में आयुष अधिकारी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर आयुष डॉक्टरों को रिलीव कराने की मांग की है।
क्षेत्रीय आयुष एवं यूनानी चिकित्साधिकारी डॉ. जेके राणा ने बताया कि आयुष विभाग के 26 अस्पतालों में 26 डॉक्टर हैं। मार्च में कोरोना वायरस आने के बाद 26 डॉक्टरों को रैपिड रिस्पांस टीम में लगाया गया था। इनमें से 13 डॉक्टर अभी टीम में सेवाएं दे रहे हैं।
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इस कारण लेडी लॉयल (महिला अस्पताल), बेलनगंज, बाईंपुर सिकंदरा, रुनकता, किरावली, लादूखेड़ा, कुर्राचित्तरपुर, खंदौली, बाह जैतपुर, पारना, बांगुरी, शमसाबाद और पनवारी के अस्पताल खोले नहीं जा सके हैं। जिलाधिकारी को पत्र लिखकर यह समस्या बताई है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से इस बाबत रिपोर्ट मांगी है।
कोरोना महामारी में आयुष दवाओं की सबसे ज्यादा मांग रही। सामान्य दिनों में अस्पताल में 80 से अधिक मरीज प्रतिदिन आते थे। इस तरह से एक महीने में 13 अस्पतालों में 30 हजार से अधिक मरीज लाभ पाते थे।
गोदामों में 85 तरह की दवाओं का भंडार
अस्पताल जरूर बंद हैं, लेकिन सरकार हर महीने औषधियां भेज रही है। इस तरह से गोदामों में इनको रखने के लिए जगह नहीं बची है। यहां 85 तरह की औषधियां हैं। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली, पेट, एलर्जी, बुखार-खांसी समेत हर मर्ज की औषधि शामिल है।
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