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पुश्तैनी मकान बना खंडहर, बिखरी ईंटें, अटलजी के बटेश्वर स्थित आवास को संरक्षित नहीं कर पाई सरकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Updated Fri, 17 Aug 2018 10:26 AM IST
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अटल बिहारी वाजपायी का पुश्तैनी घर
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दुनिया में देश का मान बढ़ाने वाले अटल जी के घर के आंगन में चंद ईंटें बिखरी पड़ी है। बबूल के पेड़ उग आए हैं। यहां पहुंचने के लिए सुगम रास्ता तक नहीं है। बटेश्वर में रिश्तेदार गंगा देवी, रमेश वाजपेयी कहते हैं कि अटल जी ने देश का मान बढ़ाया है लेकिन उन्होंने अपने लिए और अपने परिवार के लिए कुछ नहीं किया।
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भ्रष्टाचार उन्हें छू भी नही सका। अब उनके घर के अवशेष का संरक्षण होना चाहिए। स्मारक का दर्जा मिलना चाहिए। पर्यटन को बढावा देने के लिए उन्होने 1975 में बटेश्वर आकर तत्कालीन केंद्र और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया था।
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1942 में क्रांतिकारियों संग अटल ने धावा बोल कर फहराया था तिरंगा
बाह ( आगरा) अटल के जीते जी बटेश्वर की जंगलात कोठी क्रांति स्थल नहीं बन सकी। 1942 में महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ों आंदोलन से प्रभावित होकर अटल ने क्रांतिकारियों संग जंगलात कोठी पर धावा बोला था। इसे तहस नहस कर तिरंगा फहराया और खुद को आजाद घोषित किया था। 1942 में बटेश्वर में रक्षा बंधन पर आल्हा की महफिल सजी थी।
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लीलाधर बाजपेयी ने क्रांति को आवाज दी। जिसपर 300 देश भक्तों ने जंगलात कोठी को तहस नहस कर दिया और राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर खुद को आजाद घोषित कर दिया। जिसमें लीलाधर, भवानी प्रसाद, शोभाराम चंद्रवंशी, मातादीन, वंशीधर, अटल बिहारी वाजपेयी, रुकमणी देवी आदि शामिल थे। तभी से जंगलात कोठी को क्रांति स्थल के रूप में विकसित किए जाने की मांग होती रही है। किसी भी सरकार ने इसे क्रांति स्थल का दर्जा नहीं दिया।
स्मारक के रूप में विकसित नहीं किया। अटल जी के निधन के साथ ही गमजदा लोगों की जुबान पर जंगलात कोठी भी रही। राम सिंह आजाद, चरण सिंह यादव, नरेंद्र चंद्रवंशी, विनोद जैन, वीपी मिश्र आदि ने कहा कि उनके जीते जी जंगलात कोठी राष्ट्रीय स्मारक न बन पाना बडे़ अफसोस की बात है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। अटल से जुडे़ स्मृति स्थल संरक्षित किए जाने चाहिए।