Ram Mandir: राममंदिर में लगेंगे फतेहपुर सीकरी के कारीगरों के हाथों से तराशे गए खंभे
- आंखों में छलके खुशी के आंसू, कारीगर बोले- सौभाग्य कि जीते जी प्रभु के काम आ सके
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अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण की पांच अगस्त को नींव रखे जाने की खबर से फतेहपुर सीकरी के कारीगर भी गदगद हैं। मंदिर के खंभों में लगने वाले पत्थर और जालियों को यहीं के कारीगरों ने तराशा है। इन कारीगरों ने कहा कि जीते जी यह शरीर भगवान श्रीराम के काम आ सका।
फतेहपुर सीकरी के 12 से अधिक कारीगर 1992 में अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों तराशने के लिए गए थे। इन कारीगरों में क्षेत्र के गांव दूरा से मई 1992 में कारीगर रामप्रसाद, बच्चू सिंह, हाकिम सिंह, ग्राम इकरामनगर के संतोष कुमार, ग्राम जाजऊ के शंकरलाल, ग्राम बरौली के रमेश मिस्त्री शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि वहां करीब तीन वर्ष रहकर भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए विशाल खंभों ,जालियों व फर्श के लिए पत्थर तरासे हैं। इकराम नगर के कारीगर संतोष कुमार ने बताया कि वो 1992 में अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशने अपने साथियों के साथ गए थे। तीन साल वहां काम किया।
खंभों पर नक्काशी की
कारीगरों ने बताया कि भगवान राम के मंदिर के लिए खंभों पर नक्काशी की। यह सौभाग्य है कि मेरे तरासे हुए खंभे, जालियां भगवान राम की मंदिर निर्माण में लगेंगे। कारीगर विजय सिंह ने भी मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशना अपने ऊपर प्रभु की कृपा मानते हैं।
राम प्रसाद, बच्चू सिंह, हाकिम सिंह, शंकरलाल आदि कारीगर इस समय गुजरात के अंबाजी, अहमदाबाद में मंदिरों के निर्माण के कार्य में गए हुए हैं। इन सभी कारीगरों के परिवार के लोग भी अपने आप को धन्य मानते हैं कि कि उनके परिजनों के हाथों द्वारा तरासे गए पत्थर अयोध्या पति श्रीराम के मंदिर में लगेंगे।
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