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Agra News: कागजों पर लोहे का कबाड़ खरीद बनाई आर्टिफिशियल ज्वेलरी, करोड़ों का टैक्स हड़पा
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आगरा। कागजों पर लोहे का कबाड़ खरीदा दिखाकर करोड़ों रुपये की आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने के नाम पर टैक्स चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। पता चला है कि कागजों पर ही कबाड़ से ज्वेलरी बनाकर करीब पांच करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की गई। मामला सामने आने पर विभाग ने फर्म से वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
आईटीसी हड़पने वालों के खिलाफ पिछले कुछ समय से राज्य कर विभाग बड़ी कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में विभाग की रेंज-बी के अधिकारियों ने लोहामंडी निवासी सुभाष अग्रवाल और अंकित अग्रवाल की फर्म मेसर्स प्रकाश वायर्स के ठिकानों पर दस्तक दी। फर्म के मुबारकपुर स्थित निर्माण स्थल पर न तो मशीनें मिलीं, न ही किसी तरह का निर्माण होने के साक्ष्य मिले।
इस दौरान प्रतिष्ठान के परिसरों से जो दस्तावेज मिले, उससे कागजों पर ही कबाड़ की खरीद, आर्टिफिशियल ज्वेलरी के निर्माण व बिक्री का खुलासा हुआ। अधिकारियों ने बताया कि फर्म ने लोहे के कबाड़ को खरीदकर उससे करोड़ों रुपये के नकली आभूषण बनाने का दावा किया। चूंकि लोहे पर 18 प्रतिशत जबकि आर्टिफिशियल ज्वेलरी पर कम टैक्स लगता है।
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ऐसे में 15 प्रतिशत के इंवर्टेड टैक्स के रूप में करीब पांच करोड़ रुपये का क्लेम कर लिया। जांच में कर चोरी का पता चलने पर विभाग ने अब उनसे रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि फर्म से रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
बता दें, इसी महीने के पहले हफ्ते में राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने डीआर चेंस एंड वायर प्रोडक्ट्स, माधव मुरारी ज्वेलर्स ने इंवर्टेड टैक्स का फर्जीवाड़ा पकड़ा था। दोनों इकाइयों ने 7.60 करोड़ रुपये का रिफंड प्राप्त कर लिया। अनुसंधान शाखा को जांच में अहम दस्तावेज मिले जिसके बाद दोनों कारोबारियों ने 1.35 करोड़ रुपये भी जमा कराए थे। इसी के बाद विभाग ने इस ज्वेलरी मार्केट के कई अन्य कारोबारियों की भी जांच शुरू कर दी थी।
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आईटीसी हड़पने वालों के खिलाफ पिछले कुछ समय से राज्य कर विभाग बड़ी कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में विभाग की रेंज-बी के अधिकारियों ने लोहामंडी निवासी सुभाष अग्रवाल और अंकित अग्रवाल की फर्म मेसर्स प्रकाश वायर्स के ठिकानों पर दस्तक दी। फर्म के मुबारकपुर स्थित निर्माण स्थल पर न तो मशीनें मिलीं, न ही किसी तरह का निर्माण होने के साक्ष्य मिले।
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इस दौरान प्रतिष्ठान के परिसरों से जो दस्तावेज मिले, उससे कागजों पर ही कबाड़ की खरीद, आर्टिफिशियल ज्वेलरी के निर्माण व बिक्री का खुलासा हुआ। अधिकारियों ने बताया कि फर्म ने लोहे के कबाड़ को खरीदकर उससे करोड़ों रुपये के नकली आभूषण बनाने का दावा किया। चूंकि लोहे पर 18 प्रतिशत जबकि आर्टिफिशियल ज्वेलरी पर कम टैक्स लगता है।
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ऐसे में 15 प्रतिशत के इंवर्टेड टैक्स के रूप में करीब पांच करोड़ रुपये का क्लेम कर लिया। जांच में कर चोरी का पता चलने पर विभाग ने अब उनसे रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि फर्म से रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
बता दें, इसी महीने के पहले हफ्ते में राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने डीआर चेंस एंड वायर प्रोडक्ट्स, माधव मुरारी ज्वेलर्स ने इंवर्टेड टैक्स का फर्जीवाड़ा पकड़ा था। दोनों इकाइयों ने 7.60 करोड़ रुपये का रिफंड प्राप्त कर लिया। अनुसंधान शाखा को जांच में अहम दस्तावेज मिले जिसके बाद दोनों कारोबारियों ने 1.35 करोड़ रुपये भी जमा कराए थे। इसी के बाद विभाग ने इस ज्वेलरी मार्केट के कई अन्य कारोबारियों की भी जांच शुरू कर दी थी।