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ये शिल्प, कला का महोत्सव तो नहीं

Sun, 21 Feb 2016 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Updated Sun, 21 Feb 2016 02:10 AM IST
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art doesnt seen in art festival
ताज महोत्सव- नाम तो इसे शिल्प, कला और संस्कृति के उत्सव का दिया गया, लेकिन जब रजत जयंती पर इसे भव्य बनाने की जरूरत थी, तब यह फीका रह गया। शिल्प और कला के उत्सव की जगह ताज महोत्सव किसी नुमाइश या नाइट बाजार की तरह से कामर्शियल बनकर रह गया। शिल्पग्राम में शुरू हुए महोत्सव में हस्त शिल्प के स्टॉल आपको तलाशने होंगे, जबकि रेडीमेड गारमेंट, क्राकरी, प्लास्टिक, परफ्यूम, अचार, पापड़ और खिलौनों के स्टॉल हर जगह नजर आ जाएंगे। शिल्प तलाशने के लिए महोत्सव में जाने वालों को मायूस होना होगा, क्योंकि राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार प्राप्त शिल्पियों की कला महोत्सव में नजर नहीं आएगी। कलाकारों ने भी इस साल दूरी बना ली है।
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हालांकि ताज महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रदीप भटनागर का कुछ और कहना है। उनके मुताबिक ताज महोत्सव में बदलाव हुए हैं, लेकिन इससे शिल्पियों की आय बढ़ रही है। कई शिल्पी महोत्सव की तारीखें बढ़ाने को कहते हैं। स्टॉल की संख्या जरूर कम हुई है। ऐसा खुला स्पेस कम रहने की समस्या के कारण किया गया है।
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न बनचारी का नगाड़ा, न शहनाई
हरियाणा के बनचारी से नगाड़ा टीम ताज महोत्सव की शुरुआत से ही आती रही है जो मुख्य प्रवेश द्वार पर रंग बिरंगे कपड़ों में डांस कर यहां आने वालों को अपने साथ नाचने को मजबूर कर देती थी, लेकिन इस साल आयोजन समिति के अधिकारियों ने बनचारी के नगाड़ा ग्रुप को बुलाया ही नहीं। इसी तरह प्रवेश द्वार के ऊपर शहनाई वादक बैठकर शहनाई वादन करते रहते थे, इस साल शहनाई भी नहीं सुनाई दे रही। 15 साल से महोत्सव में आ रहीं डा. संगीता और शिवानी मिश्रा ने कहा कि शिल्पग्राम में प्रवेश करते ही यह दोनों ही महोत्सव की उमंग और जोश बढ़ा दिया करते थे, लेकिन इस साल खालीपन लग रहा है।
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अफसरों की जिद से खाली रहे पंडाल
आगरा। ताज महोत्सव में भीड़ कम आने की पैरवी कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों की जिद के कारण पंडाल खाली पड़े रहे। महोत्सव के दूसरे दिन यूफोरिया बैंड के डा. पलाश सेन को सुनने के लिए भी ज्यादा दर्शक नहीं पहुंचे। हाल ये कि सोफे तक नहीं भर पाए। डा. पलाश सेन ने इसे लेकर कई बार तीखी टिप्पणियां भी कीं और व्यंग्य भी किए। दरअसल, सदर बाजार, आगरा क्लब, आगरा कालेज, पालीवाल पार्क, सूरसदन सहित 9 जगहों पर ताज महोत्सव के कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इससे शिल्पग्राम में भीड़ कम पहुंच रही है। इसका बुरा असर स्टॉल लेने वाले शिल्पियों और कंपनियों की बिक्री पर पड़ रहा है।
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