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एएसआई ने सहारनपुर में खोज निकाला इतिहास का बड़ा खजाना
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 26 Sep 2017 06:02 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सहारनपुर में इतिहास का खजाना खोज निकाला है। सकतपुर में उत्खनन में पाए गए पुरावशेष 4200 साल पुराने निकले हैं। उत्खनन में प्राप्त तांबे की कुल्हाड़ी, मृदभांड और भट्टियों समेत पाए गए पुरावशेष जांच में कुछ 2200 ईसा पूर्व के मिले हैं। एएसआई ने सकतपुर के खेत में पांच महीने तक उत्खनन कर इतिहास का बहुमूल्य खजाना निकाला है।
सहारनपुर के रामपुर मनिहारिन तहसील के गांव सकतपुर में हड़प्पा के ही समकालीन सामान पाए गए हैं, जो ईसा से 2200 साल प्राचीन थी। एएसआई ने पुरावशेष की वैज्ञानिक जांच में गैरिक मृदभांड और तांबे की कुल्हाड़ी इतनी ही पुरानी पाई गई है। यहां खान पान में सिल-बट्टा का उपयोग मिला है।
वहीं भट्टियों के पाए जाने से कई और जानकारियां भी सामने आएंगी। एएसआई ने सकतपुर में 75 मीटर लंबे और 22 मीटर चौड़े क्षेत्र में पांच महीने तक उत्खनन किया था। इसमें आधा दर्जन ताम्र कुठार और 7.5 फीट लंबी और चार फीट चौड़ी भट्ठी मिली है।
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पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक यह भट्ठियां धातुओं को पिघलाकर हथियार और अन्य उपयोग की वस्तुएं बनाने में प्रयोग की जाती रही होंगी। एएसआई आगरा सर्किल अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम ने बताया कि सकतपुर में जो पुरावशेष मिले हैं वह चार हजार साल से ज्यादा पुराने हैं। यह हड़प्पा सभ्यता के समकालीन हैं।
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सहारनपुर के रामपुर मनिहारिन तहसील के गांव सकतपुर में हड़प्पा के ही समकालीन सामान पाए गए हैं, जो ईसा से 2200 साल प्राचीन थी। एएसआई ने पुरावशेष की वैज्ञानिक जांच में गैरिक मृदभांड और तांबे की कुल्हाड़ी इतनी ही पुरानी पाई गई है। यहां खान पान में सिल-बट्टा का उपयोग मिला है।
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वहीं भट्टियों के पाए जाने से कई और जानकारियां भी सामने आएंगी। एएसआई ने सकतपुर में 75 मीटर लंबे और 22 मीटर चौड़े क्षेत्र में पांच महीने तक उत्खनन किया था। इसमें आधा दर्जन ताम्र कुठार और 7.5 फीट लंबी और चार फीट चौड़ी भट्ठी मिली है।
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पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक यह भट्ठियां धातुओं को पिघलाकर हथियार और अन्य उपयोग की वस्तुएं बनाने में प्रयोग की जाती रही होंगी। एएसआई आगरा सर्किल अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम ने बताया कि सकतपुर में जो पुरावशेष मिले हैं वह चार हजार साल से ज्यादा पुराने हैं। यह हड़प्पा सभ्यता के समकालीन हैं।
नदी के दूसरी ओर भी पाई गई हड़प्पा सभ्यता
सहारनपुर और बिजनौर तक फैली हड़प्पाकालीन सभ्यता में अब तक नदी के एक ओर ही पुरावशेष पाए गए थे लेकिन सकतपुर में मिले पुरावशेष से हड़प्पाकालीन सभ्यता और भी बड़े इलाके तक फैले होने की उम्मीद जताई गई है।
एएसआई के मुताबिक पूर्व के अनुमानों के उलट हड़प्पाकालीन सभ्यता के विकास में यह उत्खनन कई नये आयाम जोड़ेगा और मील का पत्थर साबित होगा। यहां गैरिक मृदभांड, माला के टुकड़े, जानवरों की मूर्तियां, गाड़ियों के मिट्टी के पहिये, सिल-लोढ़े और मृदभांड में चित्र भी पाये गये हैं।
एएसआई के मुताबिक पूर्व के अनुमानों के उलट हड़प्पाकालीन सभ्यता के विकास में यह उत्खनन कई नये आयाम जोड़ेगा और मील का पत्थर साबित होगा। यहां गैरिक मृदभांड, माला के टुकड़े, जानवरों की मूर्तियां, गाड़ियों के मिट्टी के पहिये, सिल-लोढ़े और मृदभांड में चित्र भी पाये गये हैं।