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Agra News: एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर, होम्योपैथी से ठीक हो रही मर्ज

Mon, 12 Jan 2026 02:43 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 02:43 AM IST
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Antibiotics are ineffective, homeopathy is curing the disease
होम्योपैथी कार्यालय में डॉक्टरों को किया गया सम्मानित।
आगरा। दुरुपयोग के कारण एंटीबायोटिक दवाएं बीमारियों में बेअसर साबित हो रही हैं। वहीं होम्योपैथी से बीमारियां ठीक हो रही हैं। एमडी जैन इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित दो दिवसीय ऑल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस के दूसरे दिन गंभीर रोगों में एंटीबायोटिक के बेअसर होने पर डॉक्टरों ने चिंता जताई। शोध के जरिये बताया कि ऐसी स्थिति में होम्योपैथी कारगर साबित हो रही है।
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आइडियल होम्योपैथिक वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उदयपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के डॉ. अनंत प्रकाश गुप्ता ने बताया कि लिवर, किडनी, सांस रोग, अस्थमा, निमोनिया, टीबी के 300 मरीजों पर शोध किया। ये ऐसे मरीज थे, जिनमें एंटीबायोटिक दवाएं रेजिस्टेंट हो गई थीं। इन मरीजों के बलगम, पस, थूक समेत कई जगह से नमूने लेकर लैब में पांच साल तक अध्ययन किया। इनके 10 कीटाणुओं पर होम्योपैथी के असर को देखा।
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उन्होंने बताया कि उन बीमारियों में होम्योपैथी 80-90 फीसदी कारगर साबित हुई, जिनमें एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर साबित हो गई थीं। कैंसर, किडनी, लिवर, पेट रोग, ऑटिज्म समेत अन्य रोगों में होम्योपैथी से ठीक हुए जटिल केस के बारे में भी चिकित्सकों ने जानकारी दी। कार्यशाला के अंतिम दिन महापौर हेमलता दिवाकर, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान और एमएलसी विजय शिवहरे ने कहा कि होम्योपैथी पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। ये सस्ती इलाज पद्धति है। समापन पर सभी को प्रमाणपत्र दिए गए।
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संगठन के सचिव और कार्यक्रम के आयोजक डॉ. पार्थसारथी शर्मा ने बताया कि दो दिन चली कार्यशाला में प्रदेश में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज खोलने, सीएचसी स्तर पर आयुर्वेद-होम्योपैथिक क्लीनिक खोलने और आयुष्मान योजना से होम्योपैथी को भी जोड़ने की मांग की गई। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज रहे हैं। कार्यशाला में डॉ. एनएस रघुराम, डॉ. एके सिंह, डॉ. चारू शुक्ला, सुनील जैन, राहुल जैन, सुनील बग्गा, राजदीप ग्रोवर, हरिकांत शर्मा, रोहित जैन आदि मौजूद रहे।



प्रदूषण से बढ़ रही हैं बच्चों में बीमारियां
संगठन के अध्यक्ष डॉ. जेएन सिंह रघुवंशी ने बताया कि प्रदूषण से अस्थमा, सांस रोग और फेफड़ों संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं। नाक की एलर्जी के मामले भी आ रहे हैं। इसमें बच्चे ज्यादा पीड़ित हैं। इससे मानसिक-शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। इसमें होम्योपैथी से उपचार से दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। बच्चे बीच में इलाज भी नहीं छोड़ते हैं।
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