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UP: अंसल बिल्डर हो सकता है दिवालिया घोषित...एनसीएलटी में लगाई गुहार, विकास शुल्क का 4.50 करोड़ से अधिक बकाया
Sun, 13 Jul 2025 02:59 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 13 Jul 2025 02:59 PM IST
सार
इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति के तहत बिल्डर ने 2008 में 477.50 एकड़ भूमि का मानचित्र पास कराया था। जबकि बिल्डर के पास सिर्फ 368.50 एकड़ भूमि का स्वामित्व था।
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बिल्डर पर एडीए का भी बकाया है।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
नक्शा पास कराने और भूमि बंधक रखने में धोखाधड़ी के आरोपी मैसर्स अंसल प्रोपर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर दिवालिया घोषित हो सकता है। बिल्डर ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलटी) में याचिका दाखिल की है। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को पक्षकार बनाया गया है।
विकास प्राधिकरण ने सात मार्च 2025 को मैसर्स अंसल प्रोपर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. के प्रमोटर्स प्रणव बंसल, सुशील अंसल और वाइस प्रेसीडेंट विनय यादव सहित अन्य अज्ञात के खिलाफ थाना लोहामंडी में केस दर्ज कराया था। आरोप था कि इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति के तहत बिल्डर ने 2008 में 477.50 एकड़ भूमि का मानचित्र पास कराया था। जबकि बिल्डर के पास सिर्फ 368.50 एकड़ भूमि का स्वामित्व था।
विकास शुल्क की एवज में जिस भूमि को एडीए में बिल्डर ने बंधक रखा, वो उसकी नहीं थी। इसके अलावा सिटी डेवलपमेंट चार्ज का करीब 4.33 करोड़ रुपये भी जमा नहीं किए। केस दर्ज होने के बाद बिल्डर ने एनसीएलटी में याचिका दाखिल की है।
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एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली ने बताया कि अंसल प्रोपर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर ने दिवालिया घोषित होने के लिए एनसीएलटी में आवेदन किया है। मामला एनसीएलटी में जाने से बिल्डर के खिलाफ जारी रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) भी वापस हो सकते हैं। एडीए ने 4.33 करोड़ रुपये की वसूली भू- राजस्व के माध्यम से कराने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय से आरसी जारी कराई थीं।
निखिल होम्स की 23 करोड़ की आरसी वापस
निखिल होम एसोसिएट के विरुद्ध जारी 23 करोड़ रुपये की आरसी भी प्रशासन ने वापस कर दी हैं। बिल्डर शैलेंद्र अग्रवाल ने एनसीएलटी में याचिका दायर की है। सदर तहसील से 40 से अधिक आरसी जारी थीं।
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विकास प्राधिकरण ने सात मार्च 2025 को मैसर्स अंसल प्रोपर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. के प्रमोटर्स प्रणव बंसल, सुशील अंसल और वाइस प्रेसीडेंट विनय यादव सहित अन्य अज्ञात के खिलाफ थाना लोहामंडी में केस दर्ज कराया था। आरोप था कि इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति के तहत बिल्डर ने 2008 में 477.50 एकड़ भूमि का मानचित्र पास कराया था। जबकि बिल्डर के पास सिर्फ 368.50 एकड़ भूमि का स्वामित्व था।
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विकास शुल्क की एवज में जिस भूमि को एडीए में बिल्डर ने बंधक रखा, वो उसकी नहीं थी। इसके अलावा सिटी डेवलपमेंट चार्ज का करीब 4.33 करोड़ रुपये भी जमा नहीं किए। केस दर्ज होने के बाद बिल्डर ने एनसीएलटी में याचिका दाखिल की है।
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एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली ने बताया कि अंसल प्रोपर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर ने दिवालिया घोषित होने के लिए एनसीएलटी में आवेदन किया है। मामला एनसीएलटी में जाने से बिल्डर के खिलाफ जारी रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) भी वापस हो सकते हैं। एडीए ने 4.33 करोड़ रुपये की वसूली भू- राजस्व के माध्यम से कराने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय से आरसी जारी कराई थीं।
निखिल होम्स की 23 करोड़ की आरसी वापस
निखिल होम एसोसिएट के विरुद्ध जारी 23 करोड़ रुपये की आरसी भी प्रशासन ने वापस कर दी हैं। बिल्डर शैलेंद्र अग्रवाल ने एनसीएलटी में याचिका दायर की है। सदर तहसील से 40 से अधिक आरसी जारी थीं।