फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   another accident during Paratrooping after parachute does not open in agra

सात महीने में दूसरा हादसा, जब पैराशूट न खुलने से गई पैराट्रूपर की जान

Fri, 09 Nov 2018 01:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Fri, 09 Nov 2018 01:28 PM IST
विज्ञापन
another accident during Paratrooping after parachute does not open in agra
पैरा ब्रिगेड के जवान हरदीप सिंह का फाइल फोटो
आगरा के मलपुरा पैरा ड्रोपिंग जोन में सात महीने में यह दूसरा हादसा हुआ है, जब पैराशूट न खुलने से पैराट्रूपर की जान चली गई। दोनों बार पैराट्रूपर रिजर्व (इमरजेंसी) पैराशूट भी नहीं खोल पाए। इन हादसों से हैरानी इसलिए भी हो रही है कि क्योंकि सात महीने का समय बहुत लंबा नहीं है। 
विज्ञापन


वायुसेना में 33 साल पैराट्रूपिंग करने वाले कर्नल ( रिटायर्ड) अपूर्व त्यागी का कहना है कि इस तरह के हादसे बहुत कम होते हैं। इनकी वजह सिर्फ तकनीकी होती है। पैराट्रूपर छलांग लगा देता है लेकिन पैराशूट खुल नहीं पाता है। कई बार यह देर से खुलता है। हालांकि इसमें जान बच जाती है।
विज्ञापन


अपूर्व त्यागी पैराड्रोपिंग में इंस्ट्रक्टर भी रहे हैं। सेवानिवृत्ति के बाद कर्नल ब्राइटलैंड नाम से फतेहाबाद रोड पर स्कूल चला रहे हैं। सात महीने में हुए दो हादसों पर अमर उजाला से बातचीत में वो कहते हैं कि पैराट्रूपिंग बेहद रोमांचक होती है। 11 से 18 हजार फुट ऊंचाई से जहाज से पैराट्रूपर छलांग लगाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पेट में बंधा होता है रिजर्व पैराशूट

छलांग लगाते ही उनका पैराशूट खुल जाता है। यह छतरी की तरह होता है। इसमें परतें होती हैं। कई बार यह बंद इस तरह से हो जाता है कि परतें ज्यादा सिमट जाती है या फिर साइड की डोरियां (रस्सियां) नहीं खुल पाती है। एक लाख जंप में एक बार ही ऐसा होता होगा, जब दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से पैराशूट खुल नहीं पाता। इसकी सिर्फ तकनीकी वजह है।

पैराशूट को फोल्ड करते समय ऐसा कुछ हो जाता है कि यह खुल नहीं पाता या रस्सियां उलझ जाती हैं। इसे चूक नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि इसे बड़े ध्यान से फोल्ड किया जाता है। पैराट्रूपर के पास एक और पैराशूट होता है, जो उसके पेट के साथ बंधा होता है। इसे रिजर्व पैराशूट कहते हैं। 

यह इमरजेंसी के लिए ही होता है जब पैराशूट न खुल पाए। जवान हरदीप सिंह के केस में क्या हुआ, इसका नहीं पता, लेकिन कई मामलों में देखा गया कि पैराट्रूपर पैराशूट न खुल पाने पर इतने घबरा जाते हैं कि रिजर्व पैराशूट को खोल नहीं पाते हैं। ऐसा भी होता है कि कोशिश तो करते हैं लेकिन पैराशूट खुल नहीं पाता है।

कई बार देर से खुलता है पैराशूट

कर्नल (रिटायर्ड) अपूर्व त्यागी बताते हैं कि कई बार पैराशूट देर से खुलता है। जवान ने 1800 फुट से छलांग लगाई और पैराशूट 200 फुट की ऊंचाई पर आकर खुला। अपूर्व त्यागी खुद भी इस खतरे से गुजर चुके हैं। 

वह बताते हैं कि एक बार उनका पैराशूट नहीं खुला। वह आसमान से जमीन पर तेजी से जा रहे थे। अगले पल कुछ भी हो सकता था, लेकिन तभी पैराशूट खुल गया। मुश्किल से 150 फुट की ऊंचाई बची थी। 

मलपुरा के गामरी स्थित पैरा ड्रोपिंग जोन में गुरुवार दोपहर लगभग 11.5 हजार फुट की ऊंचाई से गिरने से पैरा ब्रिगेड के जवान हरदीप सिंह (26) की मौत हो गई। उनका पैराशूट नहीं खुला था। वो हेलीकॉप्टर से सीधे जमीन पर आकर गिरे। सेना के जवान उन्हें सैन्य अस्पताल ले गए। वहां उपचार के दौरान हरदीप ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed