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तीन साल बाद अंजुला की ‘घर वापसी’

Tue, 07 Jul 2015 02:18 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Tue, 07 Jul 2015 02:18 AM IST
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anjula singh mahore return in BJP
पूर्व मेयर और सपा सरकार में बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास समिति की अध्यक्ष रहीं अंजुला माहौर ने फिर से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। लखनऊ में प्रदेश कार्यालय पर उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने उन्हें सदस्यता दिलाते हुए आशा व्यक्त की कि इससे 2017 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों को बल मिलेगा। अंजुला माहौर ने 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया था।
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बता दें, अंजुला सिंह माहौर के भाजपा में शामिल होने की अटकलें लंबे समय से चल रही थीं।   पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिविर में अंजुला ने शिरकत कर इन अटकलों पर मुहर लगा दी। सोमवार को भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शिव प्रताप शुक्ला, मंत्री समीर सिंह, प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक की मौजूदगी में प्रदेश अध्यक्ष ने यह रस्मअदायगी भी कर दी। अंजुला सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होने की कोई ठोस वजह नहीं बता रहीं। हालांकि उन्होंने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को पिता तुल्य बताया। कहा कि मैं उनका अब भी सम्मान करती हूं। बकौल अंजुला, मैने क्रोध में आकर भाजपा का साथ छोड़ा था, मगर ज्यादा दिन तक मैं पार्टी से अलग नहीं रह पाई। मैं विशुद्ध रूप से भाजपाई हूं। बता दें कि अंजुला सपा में शामिल होने से पहले भाजपा के टिकट पर मेयर रही हैं। लगभग सवा तीन साल बाद उनकी वापसी हुई है।
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कठेरिया विरोधी खेमा बना ‘सारथी’
अंजुला सिंह माहौर सपा में ‘एडजेस्ट’ नहीं हो पा रही थीं। कमल का फूल छोड़ साइकिल की सवारी करने वाली पूर्व मेयर को शुरुआत में तो काफी बल दिया गया। प्रदेश में सरकार बनने के बाद उन्हें लाल बत्ती से भी नवाजा गया। मगर, समय के साथ सपा में उनका कद कम होता गया। सिर्फ लाल बत्ती ही नहीं छिनी, पार्टी में भी उन्हें कम महत्व दिया जाने लगा। इसको लेकर वह खफा भी चल रही थीं। इसी का नतीजा रहा कि वर्ष 2014 के लोेकसभा चुनाव से पहले भाजपा में उनके आने की चर्चाएं छिड़ गईं। उन्हें भाजपा सांसद डा. रामशंकर कठेरिया की जगह आगरा संसदीय सीट पर प्रत्याशी होने के दावे किए जाने लगे। मगर, कठेरिया उन्हें फिर से मात देने में कामयाब रहे।
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बता दें, अंजुला माहौर के भाजपा छोड़ने की मुख्य वजह कठेरिया से उनकी अनबन होना माना जाता रहा है। बहराल, इसके बाद अंजुला के भाजपा में शामिल होने की समय-समय पर अफवाहें उड़ती रहीं। लेकिन संगठन में कठेरिया की मजबूत पकड़ के चलते अंजुला के लिए पार्टी के दरवाजे नहीं खुल पा रहे थे। इधर, 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उनका विरोधी खेमा फिर से सक्रिय हो गया। सूत्रों की मानें तो पूर्व मेयर को भाजपा में लाने में भी कठेरिया के विरोध खेमे ने ही मुख्य भूमिका निभाई है। हालांकि पार्टी में शामिल होने के बाद अंजुला का कहना है कि भाजपा में उनका कोई विरोधी नहीं है। सभी ने उनकी वापसी पर सहमति व्यक्त की है। इधर, अंजुला की वापसी से कठेरिया के खेमे में खलबली मची हुई है।

अंजुला की ‘घर वापसी’ ने खोले रास्ते
अंजुला की ‘घर वापसी’ ने उन नेताओं के लिए भी भाजपा में शामिल होने के रास्ते खोल दिए हैं, जो पार्टी छोड़कर सपा में या दूसरे दलों में शामिल हो गए थे। यह लोग भी उन दलों में ‘एडजेस्ट’ नहीं हो पा रहे हैं। वह भी लंबे समय से ‘घर वापसी’ की राह तक रहे हैं। मगर, किन्हीं वजहों से पार्टी के दरवाजे उनके लिए नहीं खुल पा रहे थे। चर्चाओं की मानें तो इनमें सबसे पहले मेयर इंद्रजीत सिंह आर्य का नाम शामिल है। पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले वह भाजपा का दामन छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे। इसके तुरंत बाद ही उनके भाजपा में आने की कवायद शुरू हो गई थीं, लेकिन वह रंग नहीं ला पाईं। बीच-बीच में कई बार यह चर्चाएं उठीं। वह हिंदूवादी संगठनों के कार्यक्रम में शामिल होते रहे। सूत्रों के मुताबिक, इंद्रजीत सिंह आर्य की ‘घर वापसी’ में भी कठेरिया ही अड़चन बने हुए हैं। मगर अब यह अड़चन दूर होती दिख रही है। एक पूर्व मेयर की भी जल्द ‘घर वापसी’ की चर्चाएं हैं।

आरक्षित सीट पर निगाह
अंजुला की भाजपा में वापसी को 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव के नजरिये से देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो वह सुरक्षित विधानसभा सीट पर टिकट की दावेदारी करेंगी। इससे उन नेताओं की मुश्किल खड़ी हो जाएगी तो लंबे समय से इन सीटों पर टिकट के लिए मशक्कत कर रहे हैं। इनमें आगरा ग्रामीण और छावनी सुरक्षित सीट हैं। इन दोनों पर भाजपा में टिकट के लिए लंबी कतार लगी है।


सपा ने की आलोचना
अंजुला माहौर के भाजपा में शामिल होने पर सपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जिला मीडिया प्रभारी अमित शर्मा के अनुसार, भाजपा सांसद डा. रामशंकर कठेरिया से अनबन के बाद अंजुला माहौर सपा में शामिल हुई थीं। इसके बाद सपा ने लगातार उनका सम्मान बढ़ाया। अमित शर्मा का कहना है कि ऐसे दलबदल नेताओं को शहर की जनता जवाब देगी।
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