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आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला : अधिकारी अपने-अपने अधिकारों का करते रहे दुरुपयोग, जहां से मिला फायदा वहीं से उठाया

Tue, 14 Sep 2021 11:48 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 14 Sep 2021 11:48 PM IST
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Anganwadi Recruitment Scam: Officials misused their rights, took advantage from where they got
कासगंज घोटाले की खबर से संबंधित फोटो- कासगंज का विकास भवन - फोटो : KASGANJ
कासगंज। नौ साल पहले हुए घोटाले के दोषी अफसरों और कर्मचारियों ने अलग-अलग मामलों में अपने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। जिसको जहां मौका मिला उसने अपने अधिकारों का फायदा उठाते हुए पात्रों के अधिकारों का हनन किया। सभी घोटालेबाज अलग अलग मामलों के दोषी हैं। हालांकि इस दौरान विकास विभाग के मुखिया होने के नाते तत्कालीन सीडीओ सभी मामलों में दोषी हैं।
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आंगनबाड़ी नियुक्ति में फर्जीवाड़ा
वर्ष 2011-12 में जिले में हुई आंगनबाड़ी की नियुक्तियों में जो फर्जीवाड़ा हुआ उसमें चयन समितियों ने अपने-अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। विकास विभाग के मुखिया होने के नाते तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी की निगरानी में नियुक्ति हुई। जबकि सेवानिवृत्त जिला कार्यक्रम अधिकारी सैलजा सिंह चौहान, बाल विकास परियोजना अधिकारी जया श्रीवास्तव, मुकुंतला, आशीष कुमार, मुख्य सेविका शीला भारती, नुजहत परवीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शारदा, रजनी इस घोटाले में शामिल रहीं।
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विधायक निधि दुरुपयोग मामला
वर्ष 2010-11 में विधायकनिधि का दुरुपयोग हुआ। तत्कालीन सीडीओ ने 10 लाख रुपये विधायकनिधि से छदामी सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलराम में 4 कक्ष, बरामदा सहित निर्माण के लिए दिए, लेकिन यहां तत्कालीन प्रधानाचार्य सनिल कुमार और तत्कालीन प्रबंधक ममता देवी ने लगभग 4 लाख रुपये का गबन किया। तत्कालीन प्रधानाचार्य की मृत्यु हो चुकी है। जबकि इस मामले में तत्कालीन प्रबंधक ममता देवी गबन की दोषी हैं, जबकि सीडीओ निगरानी न करने व गबन दोनों के दोषी हैं।
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इंदिरा आवास योजना में घपला
वर्ष 2009 से 2013 तक इंदिरा आवास योजना के तहत विकासखंड पटियाली,सहावर, कासगंज, सोरों, सिढ़पुरा विकासक्षेत्र में बड़ा घोटाला पाया गया। यहां अपात्र लोगों के नाम इंदिरा आवास आवंटित किए गए। चूंकि इंदिरा आवास योजना में खंड विकास अधिकारी की संस्तुति पर परियोजना निदेशक और सीडीओ धनराशि का चैक जारी करते हैं। इसलिए इस मामले में तत्कालीन सीडीओ चंद्रशेखर सिंह, तत्कालीन पीडी उमेश त्यागी, पटियाली के तत्कालीन बीडीओ राधेश्याम द्विवेदी, सिढ़पुरा के तत्कालीन बीडीओ इंद्रपाल सिंह, कासगंज एवं सोरों ब्लॉक के तत्कालीन बीडीओ राजेश मिश्रा एवं सहावर के तत्कालीन बीडीओ अनुज श्रीवास्तव दोषी हैं।

पीडी पर तत्कालीन डीएम ने भी की थी कार्रवाई
वर्ष 2013 में तत्कालीन डीएम ने भी तत्कालीन पीडी उमेश त्यागी पर कार्रवाई की थी। उस समय पीडी पर कुछ दिनों के लिए सीडीओ का कार्यभार था। ऐसे में तत्कालीन पीडी ने इंदिरा आवास योजना के चैक पर अपने और सीडीओ दोनों के हस्ताक्षर किए थे। तब डीएम ने पाया कि नियमावली के तहत एक ही अधिकारी दो विभागों का कार्यभार संभालते हुए दोनों विभागों की वित्तीय व्यवस्था नहीं संभाल सकता। जब यह मामला सामने आया तो तत्कालीन डीएम ने तत्कालीन पीडी से सीडीओ का कार्यभार हटाया था।
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