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खंडहर में तब्दील आंगनबाड़ी केंद्र... कहीं छत नहीं कहीं दीवारें

Wed, 06 Oct 2021 02:24 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 06 Oct 2021 02:24 AM IST
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anganvadi centre
आगरा। आंगनबाड़ी केंद्र खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। कहीं छत नहीं हैं तो कहीं दीवारें गायब हैं। कहीं शौचालय की व्यवस्था नहीं है, तो कहीं छत गिरासू है। जर्जर इमारतों के कारण 35 से अधिक केंद्र जिले में प्राइमरी स्कूलों में संचालित हैं। जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए दो बार सर्वे हो चुका है, लेकि न प्रस्ताव अधूरा पड़ा है। आंगनबाड़ी केंद्रों का रखरखाव प्रधानों के जिम्मे है, परंतु उन्हें नाली, सड़क, खंड़जा से फुर्सत नहीं। आंगनबाड़ी केंद्रों के हालात बयां करती अमर उजाला की रिपोर्ट।
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खुले में बांटना पड़ रहा पोषाहार
बाह। बिजौली में आंगनबाड़ी केंद्र जूनियर स्कूल में संचालित हैं। केंद्र के शौचालय बदहाल हैं। उनमें कबाड़ भरा है। दरवाजे टूटे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि कक्ष नहीं होने से खुले में बच्चों को पोषाहार बांटना पड़ता है। नए केंद्र का प्रस्ताव भेजा है। प्रधान विनोद सिंह का कहना है कि खंडहर जैसा शौचालय विरासत में मिला है। जल्द इसकी मरम्मत कराई जाएगी। संवाद
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टूटे दरवाजे, छत गिरासू
अकोला। आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हाल है। छत गिरासू है। दरवाजे टूटे पड़े हैं। वर्षों से रखरखाव की व्यवस्था नहीं है। ब्लॉक में 10 से अधिक केंद्रों का यही हाल है। शौचालय सुविधा नहीं होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को परेशान होना पड़ता है। कार्यकर्ता अनीता देवी ने बताया कि कई बार लिख कर दे चुके हैं, लेकिन समस्या हल नहीं होती। प्रधान पूजा देवी का कहना है कि उन्हें किसी ने अवगत नहीं कराया। संवाद
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उखड़ गए जंगले, केंद्र जर्जर
फतेहपुर सीकरी। महदऊ गांव में आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हो चुका है। जंगले उखड़ चुके हैं। दरवाजे टूटे पड़े हैं। इमारत जर्जर हाल है। प्रधान तालेवर सिंह ने बताया कि केंद्र की मरम्मत के लिए अलग से कोई बजट नहीं मिलता। पंचायत निधि से रखरखाव नहीं हो सकता। नई इमारत बने, तभी केंद्रों का संचालन हो सकेगा। ब्लॉक में 56 ग्राम पंचायतों में 20 से अधिक केंद्रों की भौतिक स्थिति खराब है।
प्रधान बोले
निर्माण के लिए फंड नहीं मिलता
पतसाल गांव में आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर है। भवन निर्माण के लिए कोई फंड नहीं मिलता। सरकार को प्रस्ताव भेजा था। मगर कोई सुनवाई नहीं होती। प्रधानों को दोष देना बेकार है। - राजकुमार लोधी, प्रधान, पतसाल
जबरन बोझ डाला जा रहा
ग्राम पंचायत निधि से केंद्रों की मरम्मत नहीं हो सकती। जबरन पंचायत पर बोझ डाला जा रहा है। विभाग को शासन से केंद्रों की बदहाली दूर करने के लिए बजट मांगना चाहिए। - सुनील सिंह, प्रधान गामरी
कार्यकर्ता बोलीं
खराब हालात में करती हैं काम
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खराब हालात में काम करना पड़ता है। कोई मदद नहीं मिलती। बच्चों को पढ़ाने की जगह अन्य विभागों के काम लिए जाते हैं। - रोशनी सिंह, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
केंद्रों का कायाकल्प होना चाहिए
विभाग में भ्रष्टाचार है। शासन, प्रशासन आंगनबाड़ी केंद्रों पर ध्यान नहीं दे रहा। सरकारी स्कूलों की तरह आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प होना चाहिए। - अंजलि ठाकुर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

35 केंद्रों की इमारतें जर्जर
जिले में तीन हजार से अधिक केंद्र हैं। जिनमें 35 केंद्रों की इमारतें जर्जर हैं। इन केंद्रों के बच्चे अन्य स्कूलों में शिफ्ट किए हैं। जर्जर केंद्रों के ध्वस्तीकरण के लिए प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी को भेजा है। रखरखाव के लिए हमारे पास बजट नहीं। रखरखाव ग्राम पंचायत राज विभाग को करना होता है। - साहब सिंह यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी
फैक्ट फाइल......
- 3004 आंगनबाड़ी केंद्र हैं जिले में
- 1000 आबादी पर एक केंद्र प्रस्तावित है
- 1.24 लाख 3 से 6 साल के बच्चे हैं केंद्रों पर
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