शबनम-सलीम की फांसी का हाईकोर्ट से आएगा आदेश, मथुरा जेल को अभी नहीं मिली सूचना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 18 Feb 2021 12:03 AM IST

सार

  • जिला जज अमरोहा द्वारा तय की जाएगी दोनों की डेथ वारंट की तारीख 
  • मथुरा जेल में है महिला फांसीघर, जेल प्रशासन के पास नहीं कोई सूचना 
महिला कैदी शबनम
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विस्तार

शबनम की फांसी का आदेश उसके प्रेमी सलीम की फांसी के साथ हाईकोर्ट से आएगा। केस में राष्ट्रपति की दया याचिका के खारिज होने के बाद अग्रिम कार्रवाई होना शेष है। इसी के बाद दोनों की फांसी का रास्ता साफ हो सकेगा। फिलहाल मथुरा जेल प्रशासन के पास शबनम को फांसी दिए जाने संबंधी अभी कोई सूचना नहीं है।
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14 अप्रैल 2008 की रात प्रेमी के साथ अपने ही सात परिजनों की हत्या करने वाली शबनम और उसके प्रेमी सलीम को 16 अगस्त 2010 को जिला जज अमरोहा सैयद आमिर अब्बास हुसैनी ने फांसी की सजा सुनाई। इसके बाद दोनों के अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक फांसी की सजा को चुनौती दी लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। राष्ट्रपति ने भी दया याचिका को ठुकरा दिया है। अब न्यायालय की अग्रिम कार्यवाही बाकी है। जिसके बाद दोनों को फांसी होगी। 


शबनम के मामले में कोई भी सूचना अभी तक मथुरा जेल प्रशासन को नहीं मिली है। मथुरा जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र मैत्रेय ने बताया कि अभी तक उनके पास शबनम को मथुरा में फांसी दिए जाने संबंधी कोई भी सूचना नहीं आई है। सूचना आने पर ही फांसी लगाने के लिए तैयारी करेंगे। बता दें सिर्फ मथुरा जेल में ही महिला फांसीघर है। 

शबनम के अधिवक्ता अरशद अंसारी ने बताया कि जिला जज द्वारा अपना आदेश हाईकोर्ट भेजा जाएगा, जहां से डेथ वारंट जारी होगा। बता दें कि शबनम को फांसी की सजा को देखते हुए पिछले वर्ष 2020 फरवरी में मथुरा जेल में पवन जल्लाद आया था और उसने महिला फांसीघर का निरीक्षण किया था। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि अभी इस प्रकरण में जेल में कोई गतिविधि नहीं है।

सलीम हुआ मथुरा जेल से स्थानांतरित
शबनम के साथ फांसी सजा पाने वाले उसका प्रेमी सलीम मथुरा जेल में ही बंद था। कुछ दिन पूर्व उसे मथुरा जेल से आगरा सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया जहां से उसे फतेहगढ़ भेजा गया था।

30 गवाहों ने दी थी गवाही 
अमरोहा निवासी शबनम के वकील अरशद अंसारी ने बताया कि  केस में 30 गवाहों ने गवाही दी थी, जिसमें कोई चश्मदीद नहीं था। मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने दोनों को अभियुक्त माना था। केस में दोनों के खिलाफ अन्य कोई सबूत नहीं मिले थे। उसके बाद भी पुलिस ने हत्या का जिम्मेदार माना। पुलिस की जांच में कई बड़ी कमियां मिली हैं।

शिक्षामित्र थी शबनम
फांसी की सजा पाने वाली रामपुर जेल में बंद शबनम वारदात से पूर्व शिक्षामित्र थी। वह बच्चों को शिक्षा देती थी। इसी दौरान उसका अफेयर सलीम के साथ हो गया। 

अब कोई विकल्प नहीं बचा
अमरोहा निवासी अधिवक्ता कपिल शिकारा ने बताया कि शबनम और सलीम के केस में फांसी से बचने के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है। जनवरी में रामपुर के जेल अधीक्षक द्वारा जिला जज अमरोहा को बताया गया था कि उसकी दया याचिका निरस्त हो चुकी, इसलिए डेथ वारंट जारी कर दिया जाए। वर्तमान जिला जज के द्वारा इसकी अग्रिम प्रक्रिया में जेल अधीक्षक रामपुर से आदेश संबंधी कागजात मांगे जाने हैं। इसके बाद ही अग्रिम प्रक्रिया शुरू होगी।
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