अफसरों की आंखों के सामने रोडवेज को रोज लग रहा करीब 20 लाख का चूना, फिर भी कार्रवाई नहीं
- भगवान टाकीज, रामबाग, वाटर वर्क्स चौराहों से चलने लगे डग्गामार वाहन
- रोडवेज को रोजाना करीब 20 लाख रुपये का घाटा हो रहा है।
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आगरा में जिस आरटीओ दफ्तर की जिम्मेदारी डग्गामार वाहनों की सीज करने की है। उसके पास ही 50 डग्गामार बसें सवारियों भर रही हैं। ये रोडवेज बस अड्डे आईएसबीटी के ठीक सामने खड़ी होती हैं। इसके बावजूद इन्हें सीज नहीं किया जा रहा है, न ही इनके संचालकों पर कार्वराई की जा रही है। इनमें 20 से ज्यादा बसें एत्मादपुर के एक दबंग की बताई जाती हैं। इन पर आयुष्मान लिखा है। इनका छह महीने में एक बार भी चालान नहीं काटा गया है।
अमर उजाला टीम ने गुरुवार दोपहर एक से चार बजे तक आरटीओ दफ्तर के पास आईएसबीटी के सामने तक खड़ी डग्गामार बसों की गिनती की। इनकी संख्या 50 मिली, जबकि ट्रांसपोर्ट नगर और आईएसबीटी के बीच लगभग 300 मीटर की दूरी ही है। रोडवेज बस अड्डे के सामने ही डग्गामारों का समानातंर बस अड्डा चल रहा है। डग्गामार वाहन चलने से रोडवेज को रोज करीब 20 लाख रुपये का घाटा हो रहा है।
रोडवेज के चालक, परिचालकों के सामने ही इन बसों के कंडक्टर सवारियों को कम किराये का लालच देकर बैठा लेते हैं। रोडवेज में मथुरा का किराया 78 रुपये है, जबकि यह 60 रुपये में ले जाते हैं। हाईवे पर ही ट्रांसपोर्ट नगर के तिराहे पर भी यह डग्गेमार बसें खड़ी होती हैं। खंदारी व भगवान टाकीज की ओर से आने वाली सवारियों को रास्ते में ही मथुरा, दिल्ली के लिए बैठा लिया जाता है।
रोडवेज को रोजाना करीब 26 लाख का घाटा
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार पुंढीर ने बताया कि डग्गामार वाहनों से रोडवेज को रोजाना करीब 26 लाख का घाटा हो रहा है। एक सप्ताह पहले भी आरटीओ को इस तरह की परमिट शर्तों को उल्लंघन करने वाली और डग्गामार बसों के खिलाफ कार्रवाई करने का पत्र लिखा था। अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
आरटीओ (प्रवर्तन) अनिल कुमार ने बताया कि ट्रेनों के कम चलने के कारण प्राइवेट और डग्गामार वाहन तेजी से बढ़े हैं। इनकी धरपकड़ भी की जा रही है। प्रवर्तन दलों ने एक सप्ताह में सात बसें पकड़ी, लेकिन थानों में रखने की जगह नहीं होने के कारण सीज नहीं कर पाते हैं। केवल चालान करके छोड़ रहे हैं।
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने कहा कि डग्गामार वाहनों को सीज करने के लिए पुलिस की ओर से कभी भी ऐसा नहीं कहा गया है कि कि थानों में जगह नहीं है। जो भी गाड़ी सीज होती हैं। उसे रखा जाता है। जितनी भी डग्गामार बसें सीज की जाएंगी। सबको को रखने का इंतजाम किया जाएगा।
हादसा हो जाए तो मुआवजा मुश्किल
आरटीओ के आरआई सुधीर कुमार ने बताया कि डग्गामार या आउट ऑफ परमिट गाड़ी से हादसा होने पर अगर यात्री घायल हो तो उसे और अगर मृत्यु हो जाए तो उसके परिवारीजनों को कोर्ट जाना पड़ता है। रोडवेज में सिर्फ टिकट होने से ही मुआवजा मिल जाता है।