फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   amar ujala focus group program over cleanliness of yamuna river in mathura

'अमर उजाला' के कार्यक्रम में यमुना को निर्मल बनाने पर मंथन, ब्रजवासियों से की यह अपील

Mon, 24 Jun 2019 06:50 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 24 Jun 2019 06:50 PM IST
विज्ञापन
amar ujala focus group program over cleanliness of yamuna river in mathura
यमुना घाट - फोटो : अमर उजाला
यमुना को साफ बनाने की जिम्मेदारी हर ब्रजवासी की है। जरूरत है कि हम किसी भी घाट पर गंदगी नहीं होने दें। शासन और प्रशासन को चाहिए कि वो यमुना के दोनों साइड को ग्रीन बेल्ट तैयार करे। खादर की भूमि पर रजिस्ट्री तत्काल बंद कर दी जाएं। फैक्ट्रियों का पानी रोक दिया जाए। यमुना के किनारे समानांतर नाला बनाया जाए। 
विज्ञापन


दिल्ली यमुना को सबसे ज्यादा दूषित कर रही है लिहाजा वहां का पानी रोका जाए। यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए जो काम हो रहे हैं उनके लिए मानीटरिंग कमेटी बनाई जाए। यह विचार सोमवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित ‘फोकस ग्रुप’ में यमुना को साफ-स्वच्छ बनाने के लिए अरसे से लड़ाई लड़ने वाले लोगों ने रखे। 
विज्ञापन


भगवान कृष्ण की नगरी में लगातार बढ़ते जल संकट और यमुना जी को साफ स्वच्छ बनाने के लिए अमर उजाला मुहिम चला रहा है। सोमवार को फोकस ग्रुप में आए सभी लोगों ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए मगर अबतक यमुना साफ नहीं हो सकी हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

करोड़ों रुपया खर्च हुआ लेकिन स्थिति जस की तस

amar ujala focus group program over cleanliness of yamuna river in mathura
अमर उजाला के कार्यक्रम में यमुना शुद्घिकरण को लेकर परिचर्चा करते लोग - फोटो : अमर उजाला
यमुना मुक्तिकरण अभियान के कोषाध्यक्ष श्रीचंद चौधरी ने कहा कि यमुना की सफाई के नाम पर अभी तक करोड़ों रुपया खर्च हो चुका है। सरकार कोई भी हो लेकिन किसी ने भी मानीटरिंग नहीं की। यमुना के नाम पर आने वाले पैसे का अफसरों ने बंदरबाट कर लिया था। 

वहीं, नमामि गंगे योजना के जिला संयोजक पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि हकीकत में यमुना शुद्धिकरण को लेकर अधिकारी बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। मीटिंग भी कागजों में ही कर ली जाती है। जब पांच बार फोन किया जाता है तब तो यमुना का निरीक्षण करने के लिए पहुंचते हैं। मीटिंग में भी स्थानीय लोगों को नहीं बुलाया जाता है।

श्री कृष्ण जन्मस्थान संस्थान के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि दिल्ली यमुना को सबसे ज्यादा दूषित कर रही है। वहां के सभी नाले सीधे यमुना जी में गिर रहे हैं। अगर वहां के नाले रोक दिए जाएं तो काफी हद तक समस्या का समाधान किया जा सकता है। दिल्ली में यमुना 22 किलोमीटर में है लेकिन प्रदूषण 79 फीसदी है। 

यमुना में गिर रहे 24 नाले

तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष कांतानाथ चतुर्वेदी ने कहा कि शहर में 24 नाले इस समय यमुना में गिर रहे हैं। प्रशासन की योजनाएं हवाई साबित हो रही हैं। बेहतर है कि जो प्लानिंग बनाई जाए उसमें स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जाए। फैक्टरी का जो पानी आ रहा है उसे रोकने के लिए कड़े कदम प्रशासन द्वारा उठाए जाने चाहिए।

याचिकाकर्ता महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल ने कहा कि खादर की जमीन पर अवैध कालोनियां बसती जा रही हैं। बिल्डिंग खड़ी हो गईं हैं। प्लाटिंग कर दी गई। प्रशासन को चाहिए कि खादर की जमीन की रजिस्ट्री को तत्काल बंद कर दे। यमुना के दोनों साइड को बाग-बगीचे तैयार किए जाएं। ग्रीन बेल्ट बनाई जानी चाहिए।

रामकृष्ण चतुर्वेदी ने कहा कि यूं तो घाटों पर यमुना की सफाई करने के लिए मशीन लगी हुई है। कर्मचारियों की भी नियुक्ति रहती है। लेकिन हमने कभी सफाई होते नहीं देखा। कभी मशीन खराब हो जाती है तो कभी स्टाफ नहीं रहता। महंगी मशीन का भी कोई प्रयोग नहीं हो पा रहा है। कोई देखने वाला ही नहीं। 

'मानीटरिंग कमेटी का होना जरूरी'

पार्षद रामदास चतुर्वेदी ने कहा कि काम के लिए मानीटरिंग कमेटी का होना जरूरी है। ताकि होने वाले कार्यों पर निगाह रखी जा सके। यमुना की तलहटी में पानी रिचार्ज करने की कोई व्यवस्था नहीं है। सारे कुएं बंद पड़े हैं। लिहाजा इन सभी कुओं को चालू किया जाए। इससे भूजल में भी सुधार हो सकता है।

यमुना मुक्तीकरण अभियान के महासचिव हरेश ठेनुआ ने बताया कि यमुना के लिए तमाम योजनाएं बनीं लेकिन वह सभी लंबित चली आ रही हैं। सरकार उन्हें तत्काल लागू करे। दिल्ली में ओखला और वजीराबाद के जो नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं उन्हें रोका जाए। सरकार को चाहिए कि वहां समानांतर नाला बना दे।

यह है हाल, यमुना है बदहाल

वर्तमान में जिले के छोटे-बड़े 100 नाले यमुना में गिर रहे।
तकरीबन 300 छोटे-बड़े कारखाने और फैक्टरियों का पानी यमुना को प्रदूषित कर रहा।
तकरीबन 10 सालों में यमुना शुद्धिकरण के नाम पर करीब 12 सौ करोड़ खर्च हो चुका है।
यमुना शुद्धिकरण और उसके कारणों को लेकर 10-12  याचिकाएं कोर्ट में दाखिल की जा चुकी हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed